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गुरुवार, 25 सितंबर 2014

if you are Girl , this is specially for you /.टॉपिक 51 : दो शब्द आधी आबादी के नाम

टॉपिक 51 :   दो शब्द आधी आबादी के नाम 


कहा जाता है सिविल सेवा में , प्रश्न के अर्थ समझ ले यानि कि वो क्या पूछना चाह रहे है तो आप आधा प्रश्न हल चुके।  सिविल सेवा में आधी आबादी का मतलब महिला से है। एक निबंध भी अभी पूछा गया था " कामकाजी महिला की दोहरी जिम्मेदारी"  .  आज कुछ मै पेज की आधी आबादी के लिए कुछ लिखने जा रहा हूँ।  यदपि मुझे ज्यादा पता नही क्या लिखना है फिर  भी मै लिख रहा हूँ क्यकि आधी तो नही पर यहाँ पर इस पेज पर  पांचवा हिस्सा उनका है। लगभग २०० लोग (female) इस पेज से जुड़े है। कई दिनों से सोच रहा था कि उन पर केंद्रित कुछ लिखा जाय आखिरकार उनके भी कुछ सपने है , कुछ महत्वकांक्षा है , कुछ कर गुजरने की।  जब नारी केंद्रित कुछ निबंध या लेख लिखना होता है हम इन लाइन्स से शुरआत करते है 

"नारी तुम केवल  श्रद्धा हो , पियूष स्रोत सी बहा करो " 

( यहाँ ऐसा कुछ नही है लिखने जा रहा हूँ जो है साफ और स्पष्ट है )इस विषय पर विविध आयाम है पर मै पेज पर सिर्फ इस आयाम को ले रहा हूँ कि यदि आप फीमेल है तो तैयारी कैसे करे या फिर इससे जुडी समस्याऐ। हमारे समाज में आज कितनी प्रगति हो चुकी है फिर भी फीमेल की  जगह , उसके प्रति सोच , नजरिया अभी पुराना और संकीर्ण है। मै बड़े शहरों , महानगरो की बात नही कर रहा हूँ। महानगरो में  सोच में काफी बदलाव आ चूका है। यह नारी काफी हद तक स्वत्रंत है , आत्मनिर्भर है और इसके चलते डिसीजन लेने के लिए भी स्वत्रंत है।

मै छोटो शहरों , गांव की बात  रहा हूँ। हाशिये पर खड़ी युवा नारी की बात कर रहा हूँ क्यूकी ये असली भारत का प्रतिनिधित्व करती है। यहाँ भी उसके सपने है , वो अपने पैरो पर खड़ी होना चाहती है। वो भी आत्मनिर्भर होकर अपने जीवन का स्वत्रंत निर्णय लेना चाहती है। पर उसे दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ता है एक और उसे न ठीक से अवसर दिया जाता है पढ़ने का या कुछ करने दूसरी और जल्द से जल्द उसकी शादी कर के उसकी सीमित आजादी को और सीमित  कर दिया कर दिया जाता है। परेंट्स की ऐसा करने की अपनी वजह होती है। 
मेरी खुद की कोई बहन नही है पर मैंने अपने परिवेश , उन घरों में जहाँ टूशन पढ़ाता था वहाँ पर लड़का और लड़की के प्रति  भेदभाव को बहुत बारीकी से देखा है महसूस किया है।

 छोटी छोटी चीज में भेदभाव। क्या कोई ऐसा भी घर है जहां इसके विपरीत होता हो जहां लड़की को अच्छे स्कूल में पढ़ाया जाता हो लड़के को कमतर स्कूल में पढ़ाया जाता हो। या फिर लड़की को एक बार फेल होने पर उसे दुबारा पढ़ाया जाता हो  लड़के को फेल होने पर घर बैठा दिया जाता हो। है न अजीब बाते पर सोचो पढ़ कर ही अजीब लग है पर आज भी छोटे शहरों और कुछ हद तक बड़े शहरों में इससे मिलती जुलती समस्याओ को आज ' आधी आबादी ' को फेस करना पड़ रहा है। 

किरण बेदी , कल्पना चावला जैसे लोगो की कहानी सबके जुबान पर रहती है पर क्या हमें उपर वर्णित उन करोङो युवा नारियों की स्थिति , उनकी दशा से आँख बंद कर लेनी चाहिए। हर माँ जानती है उसकी बेटी ही उसके प्रति वास्तविक लगाव रखती है उसे ही उसकी सबसे ज्यादा परवाह है फिर भी वह ( माँ ) बेटी और बेटे में कही न कही भेदभाव कर ही बैठती है और शायद इससे बेटी को सबसे ज्यादा चोट पहुँचती है। कभी किसी पोस्ट में कुछ वास्तविक उदाहरणों से इस बात को साबित करुगा आज अपने मूल विषय पर वापस लौटते है। 

मान लीजिये  आप भी इन्हीं सब के बीच में है और कुछ करना चाहती है तो कैसे शुरुआत करेंगी ? जब कोई लड़का ऐसी स्थिति में होता है तो मै उसे आत्मनिर्भरता के कुछ टूशन पढ़ाने के लिए लिए सलाह देता पर आप शायद घर घर जाकर टूशन न पढ़ा सके। आप कोई स्कूल या कोचिंग में कुछ टाइम दे सकती है। अपने आस पास कोई दीदी को तलाशिये जो सफल हो वो आपके लिए सबसे अच्छी मागर्दर्शक होगी। शुरुआत छोटी परीक्षा से करे। सरकारी टीचर या बैंक में शायद आपको सबसे जल्दी सफलता मिल जाये। और एक बार आप कही छोटी जगह पर सफल हो जाये तो अपनी तैयारी बंद न करे आगे बढ़ने के लिए , बड़ी परीक्षा के लिए तैयारी करते रहे।

हर राज्य में सिविल सेवा के लिए निशुल्क आवासीय कोचिंग चलती है पर इस बारे में ज्यादातर लोग अनभिज्ञ रहते है।   लखनऊ में समाज कल्याण विभाग की कोचिंग है , यहाँ   अहमदाबाद में 'स्पीपा' है , गांधीनगर में 'ममता'। मेरे ख्याल से हर राज्य में ही ऐसी ही व्यवस्था होगी।( प्लीज अगर आप ऐसी किसी सुविधा के बारे में जानते है या वहाँ रहे है तो प्लीज कॉमेंट में शेयर करे ) और एक बार आप ऐसी जगह में एंट्री कर गयी तो आप के लिए सारी मुश्किले आसान हो जाएगी। 

(और क्या लिखु वैसे भी  स्त्री विमर्श में माना गया है कि एक नारी ही नारी की व्यथा को बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकती है। सोचे हुए यथार्थ से , भोगा  हुआ यथार्थ ज्यादा प्रामाणिक, जीवंत  होता है फिर जैसा मुझसे बन पड़ा लिखा।  अपने कुछ सुधी पाठक जनों से भी अपेक्षा है कि वह भी इस विषय पर अपने विचार दे कि कैसे एक युवा नारी  और किन किन समस्याओं का सामना कर रही है और वह इन परिवेश में रहते हुए , आगे बढ़  कैसे बढ़ सकती है। )

बुधवार, 24 सितंबर 2014

MOM /मंगल मिशन 2014

मंगल मिशन 2014


हमारे देश में कभी कभी गर्व के ऐसे क्षण आते है जब सारा देश सामूहिक रूप से खुशी का अहसास करता है। कल की यादगार सफलता कुछ ऐसी ही थी। हर जागरूक नागरिक इस ऐतिहासिक सफलता की खुशी को  अपने अपने तरीके से व्यक्त कर रहा था। सच में पहली ही बार में , इतने कम बजट में ऐसी सफलता अतुलनीय है। 
मुझे याद आता है पश्चिमी देशो द्वारा जारी किये जाने वाले कुछ सूचकांक। वैसे को कई है पर एक की बात करता हूँ भष्टाचार सूचकांक में भारत का स्थान ९४ था पिछले वर्ष। इसी तरह कई रिपोर्ट में पढ़ने को मिलता है कि भारत में कुपोषण की स्थिति , अफ्रीका के कुछ देशो भी बदतर है। ऐसे रिपोर्ट पढ़कर मन बहुत दुखी होता है। ये लगता है हमारे देश की छवि , वैश्विक स्तर पर कितनी खराब है ?
कल की सफलता को इस आयाम से भी देखा जाना चाहिए कि इसके चलते हमारे देश के प्रति बने पूर्वाग्रहों को तोड़ने में भी बहुत सफलता मिली है। चीन, जापान जहां असफल रहे वहां हम सफल है। 
वैज्ञानिको ने अपना काम , अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा दी है। इसी तरह जिस दिन समाज के हर अंग अपनी जिम्मेदारी को निभाने लगेंगे बगैर संसाधनो का रोना रोये उस दिन देश की गरिमा , उसकी अश्मिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण पल होंगे। आखिरकार आने वाला कल हमारा है , ये सदी भारत की है।  

मंगलवार, 16 सितंबर 2014

Importance of seclusion (एकांतवास का महत्व)

एकांतवास का महत्व 



प्रतियोगी EXAM एक साधना है। आप इसके साधक। आज की दौड़ -भाग भरी LIFE में हम अपने लिए समय नही निकल पाते है। जब से संचार क्रांति हुई है हर कोई TECHNOLOGY में इतना रम गया है कि उसके सिवा उसे कुछ नजर नही आता है। what app  , Facebook  में कितना समय निकल जाता है पता ही नही चलता। पढ़ने को हम ५ , ६ घंटे पड़ते है पर बीच बीच में उक्त में अपना समय जाया करते रहते है। इसके चलते हम किसी विषय को पढ़ते हुए अपना चिंतन नही कर पाते है जोकि सिविल सेवा में सबसे जरूरी चीज मानी जाती है। आपका मौलिक चिंतन ही आपको अंतिम SUCCESS दिलाता है। 

आज कोई अकेला नही रहना चाहता है क्योंकि  अकेलेपन में ऊबन होती होती है और शायद इसी कमजोरी के चलते social sites का चलन तेजी से बढ़ा है। आज भीड़ में अलग दिखने वाले कम ही लोग दिखते है। पर जो अलग दिखते है है निश्चित ही वो एकांतवास का महत्व जानते है। 

केवल Civil Service ही नही आप किसी भी क्षेत्र में सफल होना चाहते है तो आप को अकेले रह कर स्वतः मौलिक चिंतन करना होगा। आपके लिए आपका सबसे अच्छा गुरु , मार्गदर्शक आप खुद ही है। आप खुद जानते है कि आप में कमी क्या है अपना MONEY , और कीमती TIME कहा जाया कर रहे है। मैंने अक्सर देखा है लोगो को सफलता के लिए सलाह मागते हुए पर आप विचार करिये कोई भी सफल व्यक्ति के तरीके हर किसी के लिए कैसे लागू हो सकते है ? आप उसकी सलाह को अपनाते है पर फिर आपको सफलता नही मिलती है वजह वही है आप के खुद के मौलिक चिंतन की कमी। 

एकांतवास के महत्व के चलते ही माता पिता उनके लिए Study Room अलग बनवाते है ताकि वो अपनी पढ़ाई पूरी एकाग्रता से कर सके। बड़े शहरों में Paid Study Room होते है वो आपको सिर्फ शांति से बैठकर पढ़ने का माहौल उपलब्ध कराते है। वहां पर आपको कोई वो आपको कोई पुस्तक या समाचार पत्र नही देते बस शांत वातावरण उपलब्ध कराने का पैसा लेते है। 

मैंने कही पढ़ा था और ये बाद स्वम् पर आजमा कर भी देखी पढ़ाई के लिए बंद कमरे से अच्छी कोई जगह नही। बस आप और आपकी किताबे। पढ़ते रहिये लगातार जब तक आप शिथिल  न हो जाये।हम कई बार ऐसा प्रयास भी करते है पर हमारा Smartphone हमारे एकांत को खत्म कर देता है। अभी ऊपर जिस Study Room का जिक्र किया है वहां पर मै देखता हूँ लोग साइलेंट मोड पर MOBILE पर व्हाट एप पर चैट करते रहते है अब भला बताइए आप का वहां जाने का क्या मतलब है ? अगर आप बंद कमरे में पढ़ाई की जगह Chatt कर रहे है तो तब तो हो गयी पढ़ाई ?


HOW TO START PREPARATION FOR UPSC

आज नौकरी के लिए बहुत ज्यादा चुनौतियां है। आप को  लोगो से अलग रह कर , विशेष रणनीति बनाकर ही पढ़ाई करनी होगी अन्यथा आप हमेशा सफलता से कुछ कदम दूर ही रहेंगे।आज से ही अपने लिए कुछ TIME निकलना शुरू करे। अपने अकेलेपन से प्यार करे। अपनी BOOKS से प्यार करे। अगर आप बोर हो तो भी Smartphone या Laptop से दूर रहे। बोरियत मिटाने के लिए भी कुछ मनोरंजक पत्रिकाये , Comix , Novel  पढ़े। कुल मिला कर आपको पढ़ना ही है। पढ़ाई को ही मनोरंजन का साधन बनाये।

क्या दया दुःख का कारण है ?

©Asheesh kumar, unnao

सोमवार, 1 सितंबर 2014

टॉपिक:49 आप MS EXCEL के बारे में कितना जानते है ?


टॉपिक:49   आप MS EXCEL  के बारे में कितना जानते है ?

मेरे इंटर के दिनों के एक साथी दिल्ली में सिफ्ट कर  गए थे। काफी लम्बे अंतराल के बाद दिल्ली जाना हुआ तो उनसे मुलाकात हुई। निजी क्षेत्र में जॉब करते थे। पुराने अच्छे  मित्र आवभगत बहुत अच्छे से करते है मुझे बस स्टॉप पर रुकने को बोल दिया था वो जॉब से जब लौट कर आये तो मुझे साथ लेकर अपने कमरे ले कर गए। रास्ते में हरी ताजी सब्जी , दही (रायता के लिए ) खरीद कर गप्पे लड़ाते उनके कमरे पहुँचना हुआ। अगर आप किसी मेट्रो शहर जाओ तो यही मन करता है किसी रिश्तेदार के घर ठहरने के बजाय किसी सिंगल रह रहे दोस्त के पास ठहरने को मिले और होटल का खाना खाने के बजाय घर का बना खाने को मिले। मेरे साथ दोनों चीजे हो रही थी मन बहुत खुश था।  भाई , ने उस दिन क्या खाना बनाया था पहली बार मुझे रायता अच्छा लगा (मैंने उनसे इसे बनाने की विधि सीख ली ).

खाने के बाद असल मुद्दे की बात शुरू हुई मुझसे पूछा एक्सेल आता है ( वो माइक्रोसॉफ्ट के लोकप्रिय सॉफ्टवेयर MS EXCEL की बात कर रहे थे ) मैंने जी है आता है उसके बगैर किसी ऑफिस में काम नही हो सकता है। भाई बोलो "दिखाओ क्या क्या आता है "?  मुझे जो जो करना आता था वो उन्हें दिखाया। वो ख़ामोशी से चुपचाप देखते रहे। फिर बोले ये कुछ नही है अब मै तुम्हे दिखता हूँ एक्सेल क्या चीज है। भाई ने एक्सेल पर अपनी महारत दिखानी शुरू कि और मै हक्का बक्का उन्हें देखता रहा। कितनी ही शॉर्ट ट्रिक वो दिखाते गए। जब वो रुके तो मेरे मुँह से निकला "आपको तो बहुत ज्यादा आता है।" दोस्त ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैंने कोई बच्चों वाली बात कर दी। वो बोले मुझे सिर्फ 0. 001 % ही आता है। फिर वो बहुत देर तक एक्सेल का गुणगान करते रहे। दरअसल वो MS EXCEL से बहुत ज्यादा प्रभावित थे। 

हाल में मै एक लम्बी यात्रा पर था। सफर में आपको सोचने का बहुत अच्छा वक़्त मिलता है अगर आप अकेले और ac डिब्बे में हो तो. मुझे ये घटना  बरबस याद आयी थी।  पिछली पोस्ट में मैंने आप पूछा था सफलता के सबसे जरूरी क्या होता है ? बहुत सारे दोस्तों ने जबाब दिए और सभी से पूर्णतः सहमत हूँ। किसी ने मेरी ही पुरानी पोस्ट से पॉइंट उठा कर कॉपी कर दिया। खैर , उस दिन ट्रेन में अकेले लम्बी यात्रा में मुझे एक बात पर बहुत ज्यादा सोचता रहा। मुझे भी कुछ ऐसी चीज मिली मुझे बहुत अनोखी लगी। दरअसल उस दिन मै प्रश्न पूछने में चूक गया था दरअसल मेरा मतलब था कि आप के पास से हर चीज छीन ली जाय या दूसरे शब्दों में कहु कि आप के पास कुछ न हो या फिर आप पैदा ही ऐसी जगह हुए हो जहां कुछ भी न हो। कोई धन नही , कोई संसाधन नही तब आप किस चीज पर जोर देंगे ? आप किसके बूते सफलता पायेगे। 

एक बार फिर आप से प्रश्न है। आज कुछ हिंट दे रहा हूँ आने वाले दिनों में उसके ही बारे में लिखने वाला हूँ और वो चीज सबके पास होती है बस हम उसके बारे जानते ही कम है हमे पता ही नही होता है इसके बारे में ठीक एक्सेल की तरह। 


( समझ में शायद  न आया हो मै किस बारे में बात कर रहा हूँ  कोई बात नही कुछ दिन इंतजार करिये एक रोचक और जरा लम्बा विषय है छोटी छोटी कड़ी में लिखने का इरादा है।  अगर सब कुछ ठीक रहा तो  आने वाली कुछ पोस्ट सबसे अहम साबित होने वाली है खास तौर पर उनके के लिए जो सबसे ज्यादा हताश है परेशान है जिनके सपने बहुत बड़े है पर संसाधन का आभाव है। पुराने मित्र जानते है मुझे अपना नाम सामने लाना पसंद नही तो प्लीज कोई भी कमेंट नाम से मत करिये। कई दोस्तों को पिछले कमेंट एडिट करवाना पड़ा मुझे खेद है।  बस अजीब लगता है सीधा सीधा अपने नाम को देखना। लिखने के बाद मै भूल जाना चाहता हूँ क़ि ये मैंने लिखा है। )

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