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सोमवार, 20 अप्रैल 2015

Some more answers

भारत में भूमिहीनता बढने के कारक : 
१. बढती आबादी
२. विविध कारणों के चलते भूमि अधिग्रहण
रोजगार अवसरों की उपलब्धता : 
१. भारत के अधिकांश आबादी कार्य कुशल नही है , ऐसे भूमिहीन लोग के लिए मजदूरी ही रोजगार के रूप में उपलब्ध है . 
२. सरकार ऐसे लोगो के लिए विविध कार्यक्रम चला रही है , हाल में ऐसे लोगो के लिए आसानी से वित्त उपलब्ध कराने के लिए 'मुद्रा ' योजना चलाई गयी है . 
३. अच्छी अच्छी योजना होने के बावजूद , उनका ठीक से क्रियान्वयन न होने से , हाशिये पर खड़े लोगो को इसका लाभ नही मिल पाता है . 
४. नियमो की सही जानकारी का आभाव , दलालों तथा लालफीताशाही के चलते , भूमिहीन लोगो के रोजगार के अवसर बहुत सिमित है .

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कनाडा और भारत के बीच यूरेनियम समजौता 
संदर्भ एवम अभिप्राय
१. ३५० मिलियन डालर का सौदा , ५ सालो तक भारतीय रिएक्टर के लिए यूरेनियम की पूर्ति 
२. २०१३ में हुए सिविल नुक्लेअर डील के अनुपालन के तहत समजौता हुआ है 
३. कनाडा , संसार के सबसे प्रमुख यूरेनियम उत्पादक देशो में एक है , भारत की उर्जा जरुरते काफी हद तक इस समजौते पर निर्भर करती है . 
४. २०३२ में भारत नुक्लेअर उर्जा क्षमता ४५००० मेगावाट होगी . इसके लिए यूरेनियम के अबाध पूर्ति होना जरूरी है . 
५. भारत ने अन्य देशो से भी इस दिशा में समजौता कर चूका है पर भारत के लिए जितने अधिक विकल्प होंगे उतना ही अच्छा होगा .
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मिडिल वे , तिब्बत की सम्पूर्ण आजादी के बजाय आंशिक रूप से ऑटोनोमी की बात को बढ़ावा देता है . यह एक प्रकार से राज्य के भीतर राज्य की व्यवस्था लागु करने सरीखा है . 
भारत का नजरिया : चीन ने इसे यह कहते हुए ठुकरा दिया है कि यह सम्पूर्ण आजादी के के लिए कदम है . अगर तिब्बत का मुद्दा आसानी से सुलझ जाता है तो यह भारत और चीन के बीच अच्छे संबंधो को बढायेगा .

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यातायात संकुलन को कम /खत्म करने के उपाय 
१. सार्वजानिक परिवहन को बढ़ावा देना 
२. जिन्हें वास्तव में जरूरत हो उन्हें ही व्यक्तिगत वाहन लेने का परमिट देना ( चीन में ऐसा लागु कर बहुत हद तक लगाम लगाई जा चुकी है ) 
३. कार जैसे व्यक्तिगत साधन पर बड़ी मात्रा में कर लगा कर उसे खरीदने से ह्तोसाहित करना .
४. भारत में चौराहे पर अक्सर जाम लगता है वजह केवल लोगो द्वारा जल्दबाजी में गलत तरीके से ओवरटेक करने से होता है ....यहाँ पर ट्रैफिक पुलिस को सक्रियता दिखानी चाहिए 
५. सही नियमो की जानकारी का आभाव , कम जुर्माना , ट्रैफिक पुलिस की मिलीभगत के चलते , नागरिक उदासीन है . जरूरी होगा कि इन खामियों को दूर किया जाय

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संस्थागत सब्सिडी का प्रचलन पिछले दो दशक में बहुत ज्यादा बढ़ गया है . पूर्व की तुलना में यह कई गुना बढ़ा दी गयी है . इसके बावजूद न क्रषि और नही किसान के दशा में कोई इसका प्रभाव नही दिखलाई पड़ता है . इसकी वजह कुछ निम्न है .
१. भारत में कुछ वास्तविक किसान है और कुछ दिखावे के लिए ( यथा अमिताभ बच्चन ) . वास्तव में क्रषि के लिए सब्सिडी में बड़ा हिस्सा शहर में रहने वाले किसान और खेती के लिए दे दिया जाता है 
२. उक्त के लिए बैंको ने २००० में लाये गये एक प्रावधान ( डायरेक्ट तथा इन डायरेक्ट क्रषि सब्सिडी ) में लूपहोल खोज लिया और भारी मात्रा में क्रषि के नाम पर सब्सिडी जारी करते रहे . 
३. सरकार ने कहा है सक्षम लोग सब्सिडी न ले पर क्रषि के नाम पर कम्पनी और पूजीपति द्वारा इस लूट के लिए किसी भी तरह की बेचैनी किसी को भी नही दिखती है .
क्रषि के लिए , किसान के लिए तथा भारत की समस्त आबादी की खाद्य जरुरतो की लगातार पूर्ति होती रही इसके लिए जरूरी होगा कि क्रषि के नाम पर इस तरह सब्सिडी की लूट बंद हो . किसान वैसे भी कम बारिश और बे मौसम की बारिश के चलते बहुत ज्यादा परेशान और बदहाली में है . उन के लिए जारी धन उन तक पहुचना ही चाहिए .

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स्पोंसोरेड डाटा का आशय इन्टरनेट का शुल्क भुगतान उपभोक्ता द्वारा न करके सेवा प्रदाता द्वारा किये जाने से है . यह टोल फ्री नंबर के सरीखा है जिसमे नि शुल्क काल होती है .
अर्थव्यवस्था के नजरिये से कैसे लाभदायक 
१. भारत में महगा डाटा शुल्क लोगो को इन्टरनेट के उपयोग करने से रोकता है .
२. नि शुल्क होने से लोगो में इन्टरनेट प्रयोग करने हेतु प्रोत्साहन मिलेगा .
३. डिजिटल डिवाइड , कम होगा .
४. डिजिटल भारत के उद्देश्य की पूर्ति होगी .
५. सरकार की लोगो तक तथा लोगो की सरकार तक पहुच बढ़ेगी फलत विकास को गति मिलेगी .









बुधवार, 15 अप्रैल 2015

मनरेगा की सफलता का आलोचनात्मक मूल्याकन

मनरेगा की सफलता का आलोचनात्मक मूल्याकन
१.मनरेगा को ग्रामीण इलाके में रोजगार स्रजन , गरीबो को आर्थिक सहायता , ग्रामीण मजदूरों को शहरी क्षेत्रो में पलायन रोकने की टूल के तौर पर जाना जाता रहा है .
२. अपने पहले ही साल से यह योजना , गावो में अपने उद्देशो की पूर्ति में सफल रही
३. समय बीतने के साथ ही यह योजना कई खामियों यथा फर्जी जॉब कार्ड , गैर लाभदायक कार्य ( तालाब खुदवाने के नाम पर मिट्टी इधर उधर मात्र करना ) के चलते अलोकप्रिय होने लगी .
४. आशय यह कि भले ही इससे बहुत से लोगो को रोजगार मिल रहा था पर इस योजना में खर्च किया जा रहा धन , किसी भी तरह से देश को आर्थिक लाभ न दे रहा था .
५. सरकार ने इसमें धन आवंटन कम किया , प्रशासन ने भी रूचि कम कर दी . लोगो को कम रोजगार , धन भुगतान होने लगा . इस तरह से योजना अपने उद्देश से भटक गयी .
मनरेगा योजना के लिए कई तरह के सुझाव दिए गये है जिससे इस योजना में खर्च किया जा रहा धन , ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल सकता है . इस लिए जरूरी होगा कि इस खत्म करने के बजाय इसको संसोधन कर जारी रखा जाय .

गुरुवार, 26 मार्च 2015

ANSWER WRITING PRACTICE

प्रश्न : क्या भारत में VIP कल्चर को नैतिक माना जा सकता है ?

उत्तर : नैतिक नही माना जा सकता है .
भारत में अति महत्वपूर्ण व्यक्ति के लिए 
१. प्रोटोकाल के नाम में कई गाडी , गार्ड , के सेवा उपलब्ध करायी जाती है 
२. सर्किट हाउस होने के बावजूद ५ सितारा होटल में रहने के लिए प्रबंध किया जाता है 
३. प्लेन में मुफ्त सफर करने में ( आम जन पर हिकारत भरी टिप्पड़ी " कैटल क्लास " भी करना उनके स्वभाव में होता है . )
समाज पर प्रभाव 
१. आम जन की नजर में लोक सेवक का महत्व कम होता है .
२. समाज पर आर्थिक बोझ 
३. लोक सेवा के कर्तव्य और उत्तरदायित्व से विमुख होने से , सामाजिक समरसता पर प्रभाव 
४. आम जन में भी अनैतिक धन , पॉवर , vip बनने की आकाक्षा का जन्म
vip को ख्याल रखना होगा कि उन्हें जो अधिकार और शक्ति दी गयी , वह उनके समाज के प्रति जबाबदेही के लिए है न कि उसका व्यक्तिगत लाभ लेने हेतु
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प्रश्न २ कृषि-पारिस्थितिकी से आप क्या समझते है ? 
उत्तर 
कृषि-पारिस्थितिकी का आशय , क्रषि के प्रबंधन में पर्यावरण का हित सर्व प्रमुख रखने से है .
वकालत क्यू : 
१. मिट्टी का उपजाऊपन दिनों दिन कम होना 
२. फ़ूड प्रोडक्ट्स में रासायनिक उर्वरको , कीटनाशको का बढ़ता दुष्प्रभाव 
३. ग्रीन इकोनोमी हेतु 
४. सतत विकास के मद्देनजर 
५. आने वाली पीढ़ी को भी शुद्ध खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो सके .
६. " खाद उपजाऊ मिट्टी की जगह नही ले सकते " डोनाल्ड वोस्टर
सार रूप में - इंडस्ट्री के हित को , आम जन के हित के उपर महत्व देना उचित नही है .
---------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------प्रश्न : भ्रष्ट अधिकारी को कठोर सजा देने के गुण तथा अवगुणों पर प्रकाश डाले ? 

गुण : 
१. भ्रष्टाचार पर रोक 
२. नीतियों का प्रभावी तरीके से लागू होना 
३. जनता में विश्वास 
५. लोकत्रंत की मजबूती 
६. समाजिक उन्नयन
अवगुण : 
१. अच्छे ईमानदार अधिकारी , किसी भी तरह की पहल से उदासीन हो सकते है .
२. कठोर और तेज सजा में कई बार झूठे आरोप के आधार पर किसी ईमानदार अधिकारी दण्डित किया जा सकता है .
३. जनता के लिए भले अच्छा हो पर उचित जाँच के बगैर सजा देने से शासन में , अधिकारी वर्ग में असंतोष जन्म सकता है , जिसके चलते नीतिगत ठहराव आ सकता है .

बुधवार, 25 मार्च 2015

how to improve higher education Quality in India

उच्च शिक्षा में सुधार  हेतु कुछ सुझाव



१. जरूरी नही है कि नियमित शिक्षक ही रखे जाये . कुछ नामचीन विद्वानों की सेवा , अंशकालिक आधार पर ले कर , उनसे उच्च स्तर की , गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलवाई जा सकती है .
२. आवश्यक संसाधन , जैसे लैब , उपकरणों के लिए csr की मदद ली जा सकती है .
३. किसी भी देश के लिए मानवीय पूंजी का स्तर जितना उच्च होगा , उस देश का भविष्य उतना ही अच्छा होगा . इसलिए भारतीय स्टूडेंट्स को समय की मांग के अनुरूप शिक्षा दिलवाई जाये .
४. नये नये विषयों के प्रोजेक्ट देकर , स्टूडेंट्स को बेहतर और उपयोगी शिक्षा दी जा सकती है .

AEROPONICS एरोपोनिक्स : मिट्टी के बजाय हवा में पौधों को उगाना

एरोपोनिक्स : मिट्टी के बजाय हवा में पौधों को उगाना
तकनीक : जल के माध्यम से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध करना
भारत के संदर्भ में :
१. विविध प्रकार के स्वस्थ, बीज तैयार करने हेतु उपयोगी ( आलू )
२. कही भी उगाया जा सकता है
३. जिस तरह से उपजाऊ मिट्टी की कमी होती जा रही है . यह तकनीक आने वाले कल के लिए एक उम्मीद जगाती है .
४. भारत जैसे विशाल देश की आबादी को भोजन उपलब्ध कराने के लिए , इस तरह की तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है .
५. चुकि तकनीक महगी और आधुनिक है इसलिए आम जन की पहुच से दूर
६. इस तकनीक में दक्ष लोग की कमी है .

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