मैंने आईएएस की परीक्षा कैसे पास की
काफी समय से अपने ब्लॉग पर लिखता आ रहा हूँ। वर्षों में इतनी सामग्री जमा हो गई है कि उससे शायद 10 किताबें तक तैयार हो सकती हैं। लिखना तो लगातार होता रहा, लेकिन उन्हें पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने के लिए समय और मन दोनों एक साथ नहीं मिल पाए।
अब कुछ समय मिला है, तो पुराने लेखों को फिर से पढ़ने, सँवारने, विषयवार जोड़ने और किताब का रूप देने में मन लग रहा है।सच कहूँ तो अपनी वर्षों पुरानी रचनाओं को एक-एक करके पुस्तक बनते देखना अपने आप में एक अलग ही सुख है।
शायद लेखन की भी अपनी यात्रा होती है पहले विचार आते हैं, फिर शब्द बनते हैं, वर्षों तक कहीं सुरक्षित पड़े रहते हैं और एक दिन वही शब्द पुस्तक बनकर नई यात्रा शुरू करते हैं।अभी शुरुआत है… बहुत-सी पुरानी रचनाएँ और कई पुस्तकें अपनी बारी का इंतज़ार कर रही हैं।धीरे-धीरे उन्हें भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास रहेगा।
मैंने आईएएस की परीक्षा कैसे पास की’ केवल सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी संबंधी पुस्तक नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की एक यात्रा है। लेखक आशीष कुमार ने सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि, सीमित संसाधनों और सरकारी नौकरी के साथ तैयारी करते हुए लगभग नौ वर्षों तक संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा का सामना किया और अपने अंतिम प्रयास में सफलता प्राप्त की। पुस्तक इसी वास्तविक अनुभव से निकले व्यावहारिक सूत्रों को सरल हिंदी में प्रस्तुत करती है।
पुस्तक के 40 अध्याय लक्ष्य निर्धारण, समय-प्रबंधन, पढ़ने की सही पद्धति, पुनरावृत्ति, उत्तर-लेखन, मुख्य परीक्षा की रणनीति, समाचारपत्रों के उपयोग, एकाग्रता, अध्ययन-कक्ष, समय-सारिणी, व्यक्तित्व विकास और आत्मअनुशासन जैसे विषयों पर केंद्रित हैं। लेखक बार-बार यह स्पष्ट करते हैं कि सफलता किसी एक कोचिंग, पुस्तक, रणनीति या असाधारण प्रतिभा पर निर्भर नहीं होती; अपनी परिस्थितियों को समझकर लगातार प्रयास करना अधिक महत्वपूर्ण है।
इस पुस्तक की विशेषता इसका अनुभवजन्य और आत्मीय स्वर है। असफलताओं, सीमाओं और कठिनाइयों को छिपाने के बजाय लेखक उन्हें सीख में बदलते हैं। इसलिए यह पुस्तक केवल यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए नहीं, बल्कि हर उस विद्यार्थी और युवा के लिए उपयोगी है जो बड़े लक्ष्य के लिए धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहता है।
आशीष कुमार, उन्नाव .
