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मंगलवार, 19 जुलाई 2016

Every rainy season reminds us something .......


हर बारिश कुछ याद दिलाती है .........




  हमारी संस्कृति व् साहित्य में बारिश का मौसम बहुत ही खास माना गया है . यु तो जब से अहमदाबाद में रहने लगा तब से बारिश के आनंद से वंचित सा रहने लगा हूँ पर इस साल हमारे शहर में खूब बारिश हो रही है . आगे बढ़े से पहले नीरज जी वो प्रसिद्ध लाइन्स याद आ गयी 

अबकी सावन में यह शरारत मेरे साथ हुयी 
मेरे घर को छोड़ सारे शहर में बरसात हुयी 

मुझे बारिश में लिखने का बहुत दिनों से मन हो रहा था पर टालता रहा , पर आज रविवार , शाम जब सारा दिन पढ़ते पढ़ते उब गया तो लगा अब कुछ रच ही लिया जाय . यह अच्छा संयोग है कि बेडरूम की बालकनी वाला दरवाजा खुला है सामने जोर से बारिश हो रही है . 
साहित्य में बारिश के मौसम को उद्दीपन के तौर पर देखा गया है यानि कि इस मौसम में अपने आप ही कुछ होने लगता है .मुझे लिखने का मन होने लगा . बहुतायत प्रेम पीड़ा से ग्रस्त लोग भी इसे बरसात का असर मानते है . जायसी ने पद्मावत में बारिश को विरह से जोड़ कर लिखा है .
बरसे मघा झकोरी झकोरी ...............

उस दिन ऑफिस से जब लौट रहा था मैंने रास्ते में कुछ अनोखा देखा . आगे एक्टिवा में २ लडकियाँ थी . पीछे बैठी लडकी बारिश में सेल्फी ले रही थी . आगे एक और एक्टिवा में एक लडकी जा रही थी उसमे भी यही चल रहा था बारिश बस कहने को हो रही थी यानी वो  लडकियाँ सेल्फी खीच कर बारिश का लुफ्त के रही थी . अब इसमें सोचने वाली बात यह है कि मुझे इसमें विचित्र क्या दिख गया . क्या करू कमबख्त अपनी नजर ही कुछ ऐसी है जो सामान्य चीजो में असामान्य चीजे देख लेती है . मै हैरान इसलिए था कि वो इस बात की परवाह क्यू न कर रही थी कि उनका फ़ोन खराब भी हो सकता है पर क्या फर्क पढ़ता है .. दूसरा यह कि वो सेल्फी ले कर क्या करेगी फेसबुक में या व्हाट एप पर डालेगी . अगर अज्ञेय जी संवत्सर निबंध पढ़े तो यह सब विचित्र ही लगेगा . बारिश में भीगना ज्यादा महत्वपूर्ण है या सेल्फी के रूप में उन पलों को कैद करना ...... 


भीगने से अपने एक प्रयोगधर्मी मित्र याद आ गये जो अक्सर बारिश में भीगने को इस तरह से वर्णित करते कि किसी का भी मन बारिश में जा कर भीगने का होने लगे . जब भी बारिश होती वो बाइक पर निकल जाते सडक के किनारे गर्म चाय पीते . पिछले साल की बात है . वस्त्रापुर लेक पास एक पुस्तकालय  से वापस आ रहा था कि बारिश होने लगी . मै हमेशा बारिश से बचता हूँ पर उस दिन मित्र का वर्णन याद आ गया इसलिए बाइक रोकी नही चलता रहा . मेमनगर तक मुश्किल से २ किलोमीटर की दुरी रही होगी पर .... . बारिश के साथ हवा भी चलने लगी मै एक सिंपल हाफ टी शर्ट में था . मुझे उस दिन जो ठण्ड लगी हमेशा याद रहेगी . हाथ पैर दांत सब कपने लगे . हिम्मत न हो रही थी कि बाइक रोक दूँ क्यूकि अगर रुकता तो उस दिन घर पहुचने मुश्किल हो जाता . तब से मुझे बारिश में भीगने का मन नही होता है . हा बारिश आते ही मन भीगने लगता है . कुछ याद आता . याद आते है गाव में बिताये दिन .

खेतो में पानी भर जाता . बड़े बड़े मेढक निकलते और जोर जोर से आवाज लगाते . मिट्टी से बहुत सोधी सोधी खुसबू आती . इसी समय बहुत से त्यौहार होते है . मुझे गुडिया का त्यौहार बहुत पसंद था क्यूकि इस दिन घर से छुट मिलती तालाब में जाकर नहाने की . मेरे गावं में एक ही बढिया तालाब था जिसे बाबा का ताल कहते थे . उसमे मैंने घर से छुप छुप कर खूब नहाया है . छुपने की वजह यह थी आस पास के गाव में बहुत बार लडके तालाब में नहाते वक्त डूब कर मर गये थे इसलिए घर वाले कभी नही चाहते थे कि तालाब में जाकर कलाबाजी करू . अब वो तालाब सूख गया है . उसके पास एक खेल का मैदान है जिसमे साल में एक दो क्रिकेट के टूनामेंट होते है . 

बारिश के दिनों में ही  आम गुठली से छोटे छोटे पौधे निकलना शुरु होते थे . उनसे हम सीटी बनाते थे . पता नही आज वो सिटी बनती है या नही . इसमें भी डाट मिलती थी क्युकि बहुत बार आम की गुठली में सांप का बच्चा निकल आता पर नही सांप ही होता या केचुआ पर घरवाले सतर्क रहते . 

जब मै कक्षा ९ पहुचा तो पढने के लिए १० किलोमीटर दूर पहाडपुर नामक गाँव जाना पड़ा . रास्ता बहुत खराब होता उन दिनों . बीच में बहुत जगह पर पानी इस कदर भर जाता था कि साइकिल अनुमान से ही चलानी पडती थी . इस अनुमान में बहुत बार हम रास्ते के बगल में बनी खायी में साइकिल सहित घुस गये है . जब हम घुसे तो और दोस्त मजा लेते जब वो जाते तो हमे भी खूब मजा आता . हमारे बस्ते में एक बड़ी सी पोलीथिन होती जो पडोस के आंगनबाड़ी से ली गयी होती जिसमे पजीरी आती . पजीरी आती गर्भवती महिलाओ, बच्चो के बाटने के लिए होती थी पर वो अक्सर ब्लैक में बिक जाती जिसे लोग अपनी गाय भैस को खिलाते . बहुत लोगो का दावा था कि इससे दूध में अपार वर्धि होती है . 

तो पाठकों , बारिश से मुझे यह सब याद आता है ................अब जब बारिश बंद हो गयी है तो हम भी लिखना बंद कर दे वरना मेरे पास तो किस्सों की कमी नही आप भी कहेगे की बहुत समय खा गया हूँ . 


all rights reserved .Ⓒ asheesh kumar

सोमवार, 11 अप्रैल 2016

STRANGE BUT IT IS TRUE

है न यह विचित्र बात 

जैसा कि आपको पता है कि मै अपने मूल जिले से काफी दिनों से दूर रहता आ रहा हूँ . अक्सर जब कही परिचय देना होता है तो मै बताता हूँ कि मेरा जिला कलम व तलवार दोनों का धनी है . उन्नाव  से  सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी , प्रसिद्ध आलोचक राम विलास शर्मा जी , चित्रलेखा जैसे कालजयी नावेल के लेखक भगवती चरण वर्मा जी जैसे लोग जुड़े रहे है . यह चन्द्रशेखर आजाद की भी धरती है . ऐसा बहुत कुछ गर्व से बतलाता हु पर बहुत कम लोग इससे मेरे जिले को पहचान पाते है . मेरे पाठक भी शायद इस unnao  नाम से अनजान हो पर आज आपको ऐसी बात बताने जा रहा हूँ जो निश्चित ही आप ने सुना होगा . 

आपको याद है २०१३ में एक जगह पर एक साधू ने सपने में देखा था कि जमीन में १००० टन सोना दबा है . इस खबर की चर्चा सारे भारत के साथ वैश्विक स्तर पर हुई थी  . सोना तो नही मिला पर मुझे बड़ी आराम हो गयी है . अब लोगो से इतना ही कहना होता है कि उसी जिले से हूँ जहाँ पर सोना खोदा जा रहा था . 

है न यह विचित्र बात जानना किस चीज से चाहिए पर जानते किस चीज से है . 

गुरुवार, 7 जनवरी 2016

First time in restaurant



जीवन में कुछ ऐसी घटनाये होती है जो जेहन से कभी नही उतर पाती . १२ एक town से पास किया था . graduation करने के लिए अपने जिले के head quarter   में आ गया . यह शहर तो नही था पर मुझे शहर जैसी ही feeling उन दिनों आती थी .
मै कुछ भी नही जानता था . हर चीज से डर लगता था . १२ वी के एक और साथ ने भी मेरे साथ ही admission लिया था . यह बहुत गहरे मित्र थे . इनके बारे में बहुत सी रोचक बाते है जो आने वाले समय में बताता रहूँगा . आज उनकी ही एक छोटी सी याद .... उनके लिए कुछ नाम सोचना पड़ेगा .. क्या लिखू .. वो पढाई के साथ साथ कपड़े भी बेचते थे  cycle  पर .. इसलिए आप इनको कपड़े बेचने वाला कह सकते है .

एक दिन जब ये college  में मिले तो अपने एक अनुभव को मुझसे share  किया . पिछली शाम वो अवस्थी रेस्ट्रोरेन्ट गये थे . हमारे शहर में दो ही रेस्टोरेंट थे एक अवस्थी , दूसरा railway station ( Unnao) के सामने मनोरंजन रेस्टोरेंट ...
इनके बारे में मेरे कुछ ख्याल थे जैसे कि यह काफी महगे होते है इनमे बड़े लोग ही जाते है ... मै बस सोच कर रह जाता कि शायद  कभी इनमे मै भी जाकर कुछ खा सकू ..

जब उन साथी ने बताया कि वो बस १० रूपये में २ समोसे खा कर ही रेस्ट्रोरेन्ट का  experience  ले चुके है तो मेरे मन भी रेस्ट्रोरेन्ट में जाने की बड़ी लालसा जागी . साथी ने बताया कि कैसे  waiter  टेबल पर पानी दिया और साथी ने उससे news paper  मांग पढ़ा . मैंने उससे कहा कि मुझे भी वो ले चले न पैसे मै लगा दूंगा . वो हँसते हुए बोला अभी  चलो इसमें क्या है – साथी के साथ मै भी  restaurant गया . उस दिन न्यूज़ पेपर तो पढने तो टेबल पर नही मिला पर मेरे लिए बहुत नये अनुभव का दिन था . इस पहले कभी टेबल पर बैठ कर कुछ भी नही खाया था . गावं में तो दुकान पर खुले में समोसे बिकते थे और सब खड़े होकर ही समोसे खाया करते थे .

यह  बिलकुल सच्ची कहानी है .. आज मै सोचता हूँ कि मै कमजोर और दब्बू था .. मन में कितनी हीनता थी उन दिनों . उस दिन से लेकर आज तक मुझे याद नही कितनी जगह और कितने महगी महगी जगह होटल में खाना खाया पर वो पहले पहल रेस्टोरेंट में १० रूपये के समोसे जिन्दगी में कभी भुलाये नही जा सकेगे .

शनिवार, 28 नवंबर 2015

The Hindu : is it Compulsory for ias preparation

क्या " हिन्दू" पढ़ना अपरिहार्य है ?

सिविल सेवा के बारे में जानकारी जुटाने के साथ ही आपका परिचय " हिन्दू " से हो जाता है।  एक ऐसा newspaper जिसे रामबाण माना जाता है। जिसकी कीमत सामान्य से तीन गुना ज्यादा है और एक मात्र ऐसा समाचार पत्र जिसको कुछ शहरों में एक दिन पुराना होने के बावजूद 15 रुपए में भी बेचा जा सकता है। हमारे ahmedabad में यही दशा है एक दिन पुराना और कीमत सामान्य पेपर से ५ गुना अधिक। जिसको पढ़ने में 4 घंटे लगते है ( कुछ मित्रो के अनुभव के आधार पर ) . फिर भी सफल होना है तो पढ़ना है इसे। पर उनका क्या जिनकी इस तक पहुच नही है जिनके पास english में इतनी दक्षता नही है कि इसे 1 घंटे में समाप्त कर सके
आज कुछ इस रामबाण के विकल्प के बारे में बातचीत करते है। पहले ही बता दू कि हिन्दू का सच में विकल्प है नही। पर कुछ हद तक उसकी पूर्ति ऐसे कि जा सकती है।
पत्र सुचना कार्यालय (PIB) की वेबसाइट पर नियमित जाते रहे रहे। वहा काफी अच्छे लेख मिल जायेगे।
हिदू पेपर के बाद INDIAN EXPRESS  को महत्वपूर्ण माना जाता है उसमे भी EDITORIAL  हिन्दू जैसे ही मिल जायेगे (अफ़सोस यह पेपर भी इंग्लिश में है पर कीमत सामान्य है।  इसी ग्रुप का एक पेपर आता है जनसत्ता। मेरी समझ से उस पेपर की गुणवत्ता बहुत अच्छी है ) अफ़सोस यह है कि इन पेपर तक बहुत कम लोग ही पहुच पाते है।
 हिंदी समाचार पत्रों से मै काफी दिनों से दूर हु इस लिए पता नही कि उसमे कोई अपने मतलब का छप रहा है या नही। पहले तो उसके सम्पादकीय सिर्फ POLITICAL ISSUE पर हुआ करते थे। 

रविवार, 6 सितंबर 2015

My reward : a sweet message from our reader....

 काफी समय पहले , इंटरनेट पर हिंदी से जुडी सामग्री और मार्गदर्शन के आभाव की पूर्ति हेतु मैंने ब्लॉग/पेज  बनाया पर लिखने लगा।  इस दौरान मुझे सैकड़ो मित्रो से बातचीत का अवसर मिला , संवाद हुआ। कभी कभी कुछ अनजान लोग भी , बहुत सुन्दर प्रतिक्रिया देते है तब बहुत अच्छा FEEL होता है।  कल मुझे एक मैसेज मिला। मेरे लघु प्रयास को ऐसे प्रोत्साहन से महती संबल मिलता है। साथ में जुड़ने के लिए सभी को पुनःश्च शुक्रिया।



आदरणीय आशीष सर,

मैं नहीं जानता आप कौन हो ? जब मैनें सर्च इंजिन में 'आईएएस हिंदी' खोजा तो आपका पेज खुल गया ! पेज को स्कीप करने ही वाला था कि मेरी नज़र एक पोस्ट जिसमें इकॉनोमिक्स के 'इम्पोर्टेंट टॉपिक' पर पड़ी ! मैनें उल्लेखित उन सारे अध्यायों की सूची पढ़ी ! पढ़कर खुशी इस बात की हुई की आपका चयन बिल्कुल सटीक है और दु:ख इस बात का कि काश: मैं आपके पेज को पन्द्रह दिन पहले पढ़ लेता तो इस वर्ष की प्रांरभिक परीक्षा का एक प्रश्न जिसके बारे में मैनें कहीं नहीं पढ़ा था "बासल- 3" सही हो जाता (यानी 2.67 अंक का फ़ायदा) !
यहाँ उल्लेखनीय है कि महोदय, मैनें इसी वर्ष स्नातक किया है और महज दो महीने की गभींर तैयारी (स्वाध्याय) से इस साल की सिविल सेवा की प्रांरभिक परीक्षा में प्रविष्ट हुआ और मेरा स्कोर 92 (जीएस पेपर में, कैटेगिरी- ओबीसी) बन रहा है ! मुझे नहीं मालूम प्रा. परीक्षा उतीर्ण कर पाऊँगा कि नहीं पर मेरी यह धारणा पहले से अधिक प्रबल हो गयी है कि "हाँ, मैं कर तो सकता हूँ !"
महोदय, आपका कार्य नि:संदेह बेहतरीन और सराहनीय है ! हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए उपयोगी सामग्री और लक्ष्योन्मुखी मार्गदर्शन का आज भी अभाव है ऐसे समय में आपका कार्य और भी श्रेयस्कर हो जाता है ! जिस तरीके से आप लिखते हो, साहित्यिक पृष्ठभूमि झलक रही है ! हाँ, इतनी गंभीर मानवीय संवेदनाएं, परिपक्व अनुभव, चयनात्मकता और विश्लेषित मार्गदर्शन साहित्य ही दे सकता है ! महोदय, मैं साहित्य से तो नहीं हूँ पर सिविल सेवा के मुख्य परीक्षा के लिए मेरा यही विषय है ! बहुत लगाव है हिंदी रग-रग में बसती है ! सिविल सेवा एकमात्र लक्ष्य है, सामर्थ्य भी है (बोर्ड परीक्षा में राजस्थान टॉपर रह चूका हूँ) और जूनून भी है मगर पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियां बहुत विपरित है ! मेरे माता-पिता नरेगा में दिहाड़ी-मजदूरी कर परिवार चलाते है ऐसे में बहुत बार किताबें खरीद पाना भी मुश्किल हो जाता है !
खैर, सफ़लता कोंचिग फ़ैक्टियों और भारी भरकम स्टडी मैटेरियल की भी मोहताज़ नही होती, सीमित संसाधनों में भी अक्सर अवसर तलाश लिए जाते है ! मौलिक बुद्धि और आंतरिक ऊर्ज़ा का दोहन अत्यावश्यक है ! "जब निकल पड़ा है प्यासा तो ये ज़रूरी नहीं है कि हर जगह शुष़्क जमीं ही आए, दरिया भी ज़रूर आयेगा !" महोदय, आपसे विनम्र प्रार्थना रहेगी कि आप हमारा सतत् मार्गदर्शन करते रहें और जामवंत की भूमिका निभाते रहे ! अाख़िर में आपके नि:स्वार्थ कार्य और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद और एक बड़ा सारा सलाम ! - विकास कुमार लम्बोरिया गाँव- खरसण्डी, त. नोहर, जिला- हनुमानगढ़ (राज.)

गुरु की कहानी

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

भाई कुछ लगा लो ?


           New car लेकर kanpur जाना हुआ।  एक शॉप पर रुक कर कुछ खरीद रहा था।  एक आदमी पास आया और बोला " आपकी कार बहुत चमक रही है। " मै मुस्कराया और बोला "अभी जल्दी ही निकली है तो चमकेगी ही"।  वो कुछ बेचैन लग रहा था।  वो बोला "भाई साहब , कार में कुछ लगा लीजिये , बहुत चमक रही है कही नजर न लग जाये।  कुछ कालिख पोत लीजिये। मै हँसने लगा और बोला कालिख तो मिल नही रही है आप कहो तो एक black पालीथीन पीछे एंटीना में लटका लूँ । हँसी मजाक करने की मेरी भी बहुत आदत है।  

           खैर वहां  से मै निकल कर बेनाझाबर रोड तरफ आ गया।  कार में कुछ सजवाना चाहता था।  नयी कार थी। Road पर डर लग रहा था कही कोई खरोच न मार दे। अचानक मेरी नजर अपने कार में अगले दरवाजे पर गयी मेरा दिल धक से रह गया।  वाइट कलर पर निशान तुरंत पता चल जाते है।  मैंने दुखी मन से दरवाजे पर हाथ फिरा कर देखा तो मुस्कुरा उठा।  निशान न थे।  वो काली ग्रीस थी जो किसी  न जाने कब पोत थी। 

बुधवार, 24 दिसंबर 2014

चलो एक बार फिर से घूमने चले.……………।

चलो एक बार फिर से घूमने चले....


पढ़ाई के दिनों में जब कभी बाहर निकलना हुआ तो बस   exam  के सिलसिले में।   Lucknow , Delhi , Allahabad  और जबलपुर में एग्जाम दिए तो साथ में वहाँ  दर्शनीय स्थल tourist place  भी देख लिए। केवल घूमने के लिए कही  निकलना तो जॉब में आने के बाद शुरू  हुआ खासकर जब से अहमदाबाद , गुजरात में पोस्टिंग हुई। पिछले साल नल सरोवर से शुरुआत हुई  और कच्छ  की  white desert  वाली यात्रा तो जीवन के सबसे यादगार थी।

इस बार भी plan  बन गया है बहुत जल्दी प्लान बनाया गया है सिर्फ ४ दिनों सारी  प्लानिंग की गयी।  बहुत ज्यादा रोमांचित महसूस कर रहा हूँ। दोस्तों के साथ घूमने का अलग ही मजा है।  एक दोस्त का काम है प्लान बनाना , दूसरा बजट देखता है और कुछ सम्पर्क सूत्र तलाशता है ताकि यात्रा में कोई असुविधा न हो।  मेरा काम है यात्रा अनुभव को शब्दबद्ध करना।  सभी लोग अपनी अपनी जम्मेदारी  बखूबी निभाते है और तब बनती है एक बेहतरीन यात्रा। न भुलाये जाने वाले पल।
   
यहाँ  की ठंड बहुत अच्छी है गुलाबी गुलाबी।  घूमने के लिहाज से बिलकुल मुफीद।  दीव , पलिताना , गिर की lion  सफारी , और न जाने क्या क्या। आप ने वो पंक्तियाँ  तो सुनी ही होंगी

सैर कर दुनिया कि ग़ाफ़िल , ये जिंदगानी फिर कहाँ  
जिंदगानी गर रही तो ये नौजवानी फिर कहाँ। 

शुक्रिया  दोस्तों ,इतना अच्छा प्लान बनाने के लिए।  अकेले तो मै  घूमने से रहा सच में ऐसे  दोस्त न  हो तो कभी शायद  ही निकलना हो पाता।

सोमवार, 22 दिसंबर 2014

टॉपिक : ५२ तीसरा संवाद


          प्रिय दोस्तों बहुत दिनों बाद आप से   रूबरू हो रहा हूँ। अरसा हो गया  आप से बातें किये  हुए।  सोचा था कि   हर ५००  लाइक के  गुणक में आप से संवाद करुगा पर बहुत व्यस्त रहा , इसके चलते आप को 26  सितम्बर के बाद से नई , टॉपिक वाली पोस्ट पढ़ने को नही मिली।  इस बीच कुछ लोग ने मेसेज भी किया कि  बहुत दिन हो गए कोई स्टोरी पढ़ने को नही मिली।  दोस्तों , अब इंतजार खत्म हुआ आप जितना पढ़ने के लिए बेकरार थे उससे ज्यादा मै  लिखने के लिए  बेचैन था।  हर रात  मै  यही सोचा करता हूँ कि  मुझे क्या क्या लिखना है ?

लिखना सच में बहुत अजीब होता है।  बहुत बार एक बार में आप बहुत अच्छा , रोचक लिख सकते है तो कई बार घंटो लिखना और काटना ------  ।  जब कभी मै  सोचता हूँ इतने बड़े और अच्छे लोग मेरा मतलब प्रतिभाशाली लोग इस पोस्ट को पढ़ेंगे तब जरा सा नर्वश  महसूस करने लगता हूँ आपको पता है यहाँ  काफी नामचीन लोग है।  मैं दो लोगो का जिक्र कर रहा हूँ एक साथी kbc  के बड़े विनर है दूसरे देल्ही  के नामचीन कॉलेज के प्रोफेसर --------। ऐसे बहुत से लोग है जिनको यहाँ देखकर वाकई हैरानी होती है मैंने शुरू  के ५० लोगो से सिवा  किसी को पेज लाइक  करने के लिए बाध्य नही किया बस  स्वतः लोग आते गए। 

शुक्रिया , दोस्तों आपके यहाँ होने के लिए।  मेरे पुराने दोस्त जानते है मैंने आज तक कभी भी चलताऊ , सूचना  नही पोस्ट की। मेरी कोशिस हमेशा रही है आपको वो दूँ जो आपको कही  नही मिलता है।  अनुभव----- सूचना  से ज्यादा महत्वपूर्ण होता है और यही चीज है जो आपको कोई देना नही चाहता है। इसी लिए इस पेज को मै अलग मानता हूँ। 

खेद के साथ कहना पढ़ रहा है पिछले दिनों दो लोगो को ब्लॉक करना पड़ा। जैसे जैसे लोग बढ़ेंगे ये चीजे शुरू  होनी ही है। वजह आप से शेयर कर लूँ  , कभी कभी लोग कमेंट में पोस्ट से इतर  बात करते है या कभी कभी किसी पेज या ब्लॉग का लिंक दे कर प्रचार करते।  ऐसे लोगो की यहाँ जगह नही , प्लीज सॉरी।  कोई भी चीज कितनी अच्छी क्यू न हो उसको प्रचार के माध्यम से थोपना मेरे ख्याल से उचित नही है। आप में गुणवत्ता होगी तो लोग स्वतः आपको महत्व देंगे। 

नया साल आने वाला है कुछ नई चीजे की जाय। मुझे ठीक याद नही कितने लोगों  ने मुझसे तैयारी करने के सम्बन्ध में संपर्क किया। सभी के एक जैसे प्रश्न थे मुझे टिप्स दे दो , किताबे बता दो , आपके पास नोट्स है क्या-----या ऐसे ही कुछ।  सच कहूँ  मै  कुछ और अपेक्षा कर रहा था।  मुझे लगता लोग वो क्यू नही पूछते जो सबसे जरूरी है।  खैर कुछ दिन हुए , किसी ने मुझसे  सम्पर्क किया और ठीक वही  प्रश्न पूछे  जिनकी मै  अपेक्षा कर रहा था। 

मैंने कई बार कोशिस  की है यहाँ  पर   आप सक्रिय सहभागिता करे पर अफ़सोस -----। आप एक बात बताये लाइक  करने से या nice  पोस्ट लिखने से आपको वाकई कुछ फायदा होता है।  पिछले माह मैंने कई answer लिख कर पोस्ट किये।  अपने बहुत अच्छा रिस्पांस दिया , शुक्रिया। पर ज्यादा अच्छा होता कि  आप भी एक आंसर लिख कर अपलोड करते।  मुझे पता था कि  मेरे आंसर बहुत ज्यादा अच्छे नही है पर मुझे लिखना था बगैर यह सोचे कि  लोग क्या कहेंगे। बहुत टाइम लगता है इसमें मुझे पता है पर इससे गुजरे आप पार  नही पा  सकते है।  

एक बार फिर , उत्तर लेखन अभ्यास फिर शुरू करने का इरादा है। अगर आपको प्रतिभाग करना है तो आपका भी स्वागत है। मै आपको एक सॉफ्टवेयर बताउगा।  उसको अपने एंड्रॉयड  मोबाइल में डाउनलोड करके आप बहुत आसानी से अपने नोट्स में लिखे आंसर , अपलोड कर सकते है।  शुरुआत इस साल के सिविल सेवा ( मुख्य ) परीक्षा के प्रश्नो से करनी है। 

कुछ पुराने वादे  भी पूरे  करने है।  मैंने एक पोस्ट में आपसे पूछा था कि  सफलता के लिए सबसे जरूरी क्या होता है ? आप ने अपने अपने उत्तर भी पोस्ट किये थे पर मैंने अपना जबाब न दिया था।   मैंने वादा  किया था कि  एक मोटिवेशनल सीरीज लिखूँगा।  लिखने का मन बनाया पर मन ठीक से तैयार न था उस तरह की पोस्ट लिखने के लिए मन बहुत शांत और स्थिर होना बहुत जरूरी है। व्यस्त तो मै हमेशा  ही रहता हूँ पर इस साल जून से लेकर अगस्त तक , जिंदगी बहुत उथल पुथल से भरी रही। कुछ सबसे चुनौती भरा समय था अब जाकर कुछ मौसम शांत हुआ है सब कुछ ठीक रहा तो वो मोटिवेशनल सीरीज जल्द पूरी करनी है।  

मैंने एक बार आने वाली पोस्टो के बारे में लिखा था।  उसमे एक टॉपिक था " जिंदगी के साथ प्रयोग मत करे " . उसकी भी काफी समय  पहले किसी  ने माँग  की थी।  टॉपिक काफी उलझन भरा है पर कुछ सुलझाने की कोशिस  करुँगा।बातें  बहुत सी है उनका अंत नही है।  बहुत दिनों बाद मुखातिब हो रहा हूँ तो ऐसा होना  स्वाभाविक है।  आशा है पुरानी आत्मीयता बनी रहेगी। आप बताइये कैसे है और क्या चल रहा है ? आप के लिए अच्छे , सुखद , खुशनुमा समय की शुभकामनाओं  के साथ विदा -----। बहुत जल्द ही एक रोचक , प्रेरणादायक पोस्ट के साथ मिलता हूँ।   

बुधवार, 9 जुलाई 2014

HINDI MOVEMENT FOR UPSC

TOPIC 42
निरपेक्ष कैसे रहा जा सकता है ?

पिछले दिनों कई मित्रो ने मुझे हिंदी से जुड़े आंदोलन की कई पोस्ट से मुझे टैग किया पर कमेंट करना तो दूर लाइक भी न किया पता नही क्यू। ऐसा लगता था कि इससे उदासीन ही रहू तो बेहतर है। वजह बेहद साफ है। मुझे डर लगता था  कि मन जो रोष भरा है उसे संतुलित तरीके से कैसे व्यक्त करू। 
कल शाम को एक मित्र से बातो बातो में लगा कि इससे निरपेक्ष कैसे रहा जा सकता है। दिल्ली में आंदोलन की कुछ तस्वीरें देखी जिसमे रात में सड़क पर साथी लेटे है। इन सबसे कोई कैसे और कब तक निरपेक्ष रह सकता है खास कर जब इसी बात की ताजी ताजी मार खुद खा चूका हो। 
हमारी भी कुछ सीमाये है। कुछ नियमो के अधीन है। इस लिए विशेष कर अपने इस पेज पर हमेशा संतुलित और अनुशासित पोस्ट की है। इस पोस्ट को भी बहुत चुन कर , नपे तुले शब्दों में लिखने का प्रयास कर रहा हूँ। मेरा विशेष निवेदन है कि प्लीज इस पेज की गरिमा बनाये रखना। गंभीर , अनुशासित टिप्पणी का स्वागत रहेगा। 

मन्नू भंडारी की नावेल महाभोज में एक पात्र है विशू। अपनी दशा भी कुछ वैसी ही है। हाल में जिस तरह से लोग अपने अधिकार की मांग कर रहे है वो तो होना  ही था। मै इतनी बारीकी से उस पर नजर नही रख पा रहा हूँ। अपने कुछ अनुभव जरूर शेयर करुगा और आप देखेगे की हिंदी की आयोग में इतनी दुर्गति क्यू है। 

सभी को लगता है कि हिंदी से  आयोग में इंटरव्यू दिया जा सकता है पर सच इससे इतर है। मेरा इंटरव्यू एक मैडम के बोर्ड में पड़ा था जिनके बारे में मशहूर है कि वो बहुत मूडी है। उनका पहला प्रश्न था कि what is conventional energy sources ?  आज मै केंद्रीय सरकार में कार्य कर रहा हूँ काफी हद तक इंग्लिश समझ और बोल सकता हूँ। पर उन दिनों मै ऐसा न था। मुझे कन्वेंशनल का मतलब समझ में नही आया। मैंने अनुमान से कहा कि आप नवीकरणीय ऊर्जा की बात कर रही है। मैडम  ने बहुत अजीब नजरो से देखा और कहा तुम्हे कन्वेंशनल का मतलब नही पता। खैर बात इतनी नही थी। रूम के कोने में दुभाषिया बैठा था। मैडम ने उनकी और देखा। उसने मेरी और देखते हुए कहा अरे कन्वेंशनल मतलब  कन्वेंशनल   …… . मैडम ने उसकी ओर और तीखी नजरो से देखा। तो वो अपने सर में हाथ मरते हुए बोला कि वो दिमाग में है पर जुबान में नही आ रहा है कि कन्वेंशनल  का हिंदी में मतलब क्या होता  है ?  अब बाकी आप पाठको पर छोड़ता हूँ कि हिंदी की आयोग में इस दशा पर क्या टिप्पणी करनी चाहिए। 
बातें बहुत सारी है धीरे धीरे लिखता रहूँगा पर जो लोग इस बार २४ अगस्त को pre देने जा रहे है उनसे यही कहुगा। आप उस पर ज्यादा या कहु पूरा ध्यान दे। वरना इस बार pre में ही बाहर हो गए तो हिंदी २६ से और कम पर सिमट जाएगी। अब अधिक दिन बचे नही है  और  बार pre मेरे अनुमान से सबसे कठिन होने वाला है। हाँ अगर आप इस बार pre में भाग नही ले रहे है और किसी के अधीन कार्यरत नही है तो इसमें जरूर प्रतिभाग करे। यह हमारी अस्मिता का प्रश्न है। इससे निरपेक्ष रह कर आप सकून से नही रह सकते। 
मुझे लगता है कि दिल्ली में बत्रा सिनेमा के बगल में कुछ साथी जमा हुए है। काश मै वहाँ एक भाषण दे पाता 
मांगो में मुझे कुछ सबसे जरूरी चीजो का आभाव दिख रहा है। सबसे बड़ी मांग होनी चाहिए आयोग में हिंदी से जुड़े लोगो को मेंबर बनाया जाये। आपको तो पता ही है हिंदी को आज इस दशा में में लाने के पीछे कुछ प्रयोगधर्मी लोगो का हाथ है। 
दूसरा सबसे जरूरी , हिंदी की जो कॉपी चेक करते है। उनको अपने दिमाग में भी यह बात लानी चाहिए कि १० अंक से सवाल में ८ अंक भी दिए जा सकते है। हिंदी में ऐसा पता नही क्यू है शुरू से देख रहा हूँ पूरे अंक देना अच्छा नही माना जाता है। इंग्लिश बोर्ड में ९५ या ९८ प्रतिशत अंक लाना बहुत आम बात है। हिंदी में इधर कुछ सालो में ९०, ९२ प्रतिशत अंक आने लगे है वरना पुराने दिन तो याद ही है आपको। मेरे कहने का मतलब बस इतना है कि हिंदी की कॉपी भी इंग्लिश की तरह कुछ उदार हो कर चेक की जानी चाहिए। 


( समय का बहुत आभाव है बहुत कुछ लिखा जाना शेष है फिर किसी रोज। कुछ लोग मेरे नाम को कमेंट में लिख देते है। प्लीज , पर्दे में ही मुझे रहने दे। नाम को आगे रख पुरे मन से न लिख पाउँगा।  )

















सोमवार, 7 जुलाई 2014

Think freely , Get extraordinary success

टॉपिक 41 

जरूरी है स्वतंत्र निर्णय 



LIFE में कई बार ऐसे मुकाम आते है जब आपको कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ते है। आप से कोई AGREE नही होता है न घर न परिवार न यार न RELATIVE । सभी आपको को आसान, परम्परागत रास्ता चुनने को कहते है सलाह देते है। परम्पराओ को तोडना आसान नही होता है। अगर आप लीक से हटकर OPTION को चुनते है तो आपको बहुत सा विरोध , तरह तरह कि बाते सुनने को मिलती है। आप के सामने या पीठ पीछे कहा जाता है कि पगला गया है , दिमाग खराब हो गया है, सटक गया है ( अवधी में) . और अंततः आप का COURAGE  खत्म हो जाता है। चाह कर भी आप अपने तरीके से नही जी पाते है। प्राय : दूसरो की WISHES का पालन करने में ही LIFE समाप्त हो जाता है।


 Rousseau ने लिखा है कि मनुष्य स्व्तंत्र पैदा होता है पर हमेशा जंजीरो में जकड़ा रहता है। हममे से कुछ लोग ही इन जंजीरो को तोड़ पाने का साहस जुटा पाते है। कभी ऐसे इंसान से आप मिले जिसने हमेशा परम्पराओं को तोडा हो। वह आपसे हमेशा यही कहेगा कि पहले पहल आपका खूब विरोध होगा पर जब आपके निर्णय सही साबित होने लगेगें सब आप के साथ आ जायगें।

एक उम्र तक हम अपने माता पिता के DISCIPLINE  में रहते है और रहना भी चाहिए। हमे पता नही होता है कि क्या उचित है और क्या अनुचित ? पर एक समय के बाद आपके विचारो में टकराव होना शुरू हो जाता है। पिता कहते है कि बेटा तुमसे न हो सकेगा ( गैंग्स ऑफ़ वसेपुर के रामधीर सिंह कि तरह ) .आप मन ही मन सोचते है कि तुम अभी देखना मै क्या कर दिखाऊगां।
Paulo coelho लिखते है कि आप तब तक स्व्तंत्र है जब तक आप विकल्प नही चुनते। एक बार आप ने विकल्प को चुना आप कि स्व्तंत्रता खत्म हुई। विकल्प कैसा ही हो आप को उसे सही PROVE करना ही होगा।
वो जो लीक पर चल रहे है या चलने जा रहे है उनसे सहानुभूति जतायी जा सकती है। और वो जो परम्पराओ को तोड़ कर , सबकी बातो ,सलाहो को अनसुना कर अपने अनुसार , अपनी शर्तो पर , अपने बनाये नियमों पर , चल रहे है या चलने जा रहे है उनसे क्या कहा जाय। …… दोस्त जिंदगी तो आप ही जी रहे हो बाकि तो सब केवल जिंदगी काट रहे है।



(खेद है  पोस्ट पुरानी है कुछ लोग इस पोस्ट को पहलें पढ़ चुके है [पर आशा करता हूँ आपको पसंद आएगी।  काफी वयस्त हूँ इसलिए कुछ नया न लिखा पा रहा हूँ।) 

गुरुवार, 19 जून 2014

वो अब टॉपर है भाई।

वो अब टॉपर है भाई।

फेसबुक एक आभासी दुनिया है जिसके अपने कुछ फायदे और कुछ नुकसान है। यहाँ पर आप ऐसे लोगो से जुड़ सकते है जिनसे आप वास्तविक दुनिया में शायद कभी न मिल पाये। अपने रूचि के अनुरूप लोगो की गतिविधियों पर नजर रख सकते है।   . 
  पिछले दिनों सिविल सेवा का रिजल्ट आया। नए टॉपर सामने आये और लोगों  ने उनसे जुड़ने का प्रयास शुरू कर दिया। कई लोगो की तरह मैंने भी कुछ को रिक्वेस्ट भेजी। मेरी उम्मीद के विपरीत , मेरी रिक्वेस्ट सभी ने एक्सेप्ट कर ली (पिछले जन्मो के कुछ अच्छे करम होंगे वरना हम जैसे हजारो है )। खास तौर से पहले रैंक पर चयनित GAURAV AGARWAL की एक्सेप्टन्स मेरे लिए सच में बहुत खुशी और हैरानी भरी रही। सबके अपने अपने कारण होते है। हर साल मै कुछ लोगो से जरूर जुड़ने का प्रयास करता हु ताकि उनकी टॉपर बनने के बाद की गतिविधियों से रूबरू होता रहू मेरे लिए इसी में प्रेरणा छुपी होती है। 
मै बहुत  विनम्रता से कुछ  निवेदन विशेष कर CIVIL SERVICE के नए खिलाड़ियों से  करना चाहता हूँ कृपया अन्यथा मत लीजियेगा   
१. आप भी प्रयास करें कुछ लोगो से जुड़ जाये। अगर आप कोई टॉपर एड नही करता तो आप उसे फॉलो कर सकते है। एड न करने की कुछ वजह ये हो सकती है - अपने अपनी प्रोफाइल पिक वास्तविक न लगाई हो , या फिर आपके टाइम लाइन पर कुछ ऐसी पोस्ट हो वो उसे उचित न लगे। 
२. प्लीज , किसी भी टॉपर से ऐसे प्रश्न न करे वरना आपको जबाब शायद ही मिले। 
आप ने कितने घंटे पढ़ाई की थी ?
 नोट्स कैसे बनाया था ? 
मुझे कुछ टिप्स दे दीजिये (सबसे गुस्सा दिलाने वाला प्रश्न )
सी सैट क्या है (मुझे आज किसी ने मैसेज करके  यही पूछा था  )
कौन सी पेन से लिखू ? 
कितने बजे तक रात में पढ़ना चाहिए ? 
क्या खाते थे ? ( मजाक कर रहा हूँ पर हो सकता है कोई जिज्ञासु सवाल कर सकता है )

अब लाख टके का सवाल है कि टॉपर से पुछू क्या ? मेरी समझ से कुछ नही। उनसे कुछ मत पूछिये । लम्बे समय से वह जी जान लगा कर , पढ़ रहे थे उन्हें आराम करने दीजिये। बेहतर हो आप अपने आस पास उन लोगो को तलाशिये जो टॉपर होते होते रह गए हो यकीनन वह किसी टॉपर से ज्यादा अच्छे से बता सकते है कि करना क्या है ?(अगर आपकी सेवा से प्रसन्न हुए तो वरना ये लोग भी आपको महत्व देने से रहे। चलो एक टिप्स मै बता देता हूँ इस आभासी दुनिया में किसी भी व्यक्ति की नजर में आना है तो उसकी हर पोस्ट प्रसाद समझते हुए शेयर करिये , लाइक और कमेंट   का जमाना गया। शेयर करना ठीक वैसा ही जैसे स्कूल में गुरूजी के पैर छूना। )

अगर आपके १० आईएएस और २० आईपीएस फेसबुक पर दोस्त है तो.…………………………………………जबाब दो तो ………………………। 


सोमवार, 16 जून 2014

वो जो झंडा उठाये है हिंदी का




सभी मित्र जो इस वर्ष सिविल सेवा में सफल हुए है उनको हार्दिक शुभकामनाये। हिंदी की क्या पोजीशन रही है अभी साफ नही है। मेरे दो परिचितों का चयन हुआ है जो कि हिंदी से है। एक १०७ रैंक पर है दूसरा २७० रैंक आस पास है। पहला आईएएस और दूसरा ips . दोनों ही मित्र पहले से भारतीय राजस्व सेवा में चयनित हो चुके थे। जब अपने किसी आस पास के साथी का चयन होता है बहुत अच्छा लगता है। मुझे बेहद खुशी है जिन मित्र का आईएएस के लिए चयन हुआ है उनसे दिल्ली में मुलाकात हुई थी। हो सकता है उनका किसी पत्रिका में इंटरव्यू भी आपको पढ़ने को मिले पर मै अपना दृश्टिकोण रखना चाहूंगा। वो बहुत ही सामान्य , सरल स्वभाव के लगे। पिछले वर्ष जबकि वह irs बन चुके थे उसके बावजूद उनके स्वभाव में कहीं भी इस बात का प्रभाव नजर नही आता। मुझे उनके बारे ज्यादा तो नही पता है पर कुछ चीजे जरूर बताना चाहूँगा। उनकी सफलता इस लिए भी खास हो जाती है कि वह शादी हो जाने के बाद भी इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए लगे रहे। उनको प्रदर्शन में जरा भी रूचि नही है। दिल्ली में एक कोचिंग में वो पढ़ते थे पिछले साल उनके सर ने कहा कि पत्रिका में इंटरव्यू देना है तो उन्होंने मना कर दिया। वजह आप समझ सकते है इससे उनका ध्यान भंग होता। वह ख़ामोशी से लगे रहे और अपने मुकाम को पा लिया। अगर आप को सर्वोच्च तक पहुँचना है तो खामोशी अख्तियार करना ही पड़ेगा। फेसबुक में एक pic में अक्सर दिख जाती है " मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे" . साथी के बगैर अनुमति के मै यहाँ पर लिख रहा हूँ इसलिए उनके नाम का उल्लेख नही कर रहा हुँ. अभी तक वह फेसबुक पर उपलब्ध नही है (वजह फिर वही है खामोशी से काम करने की आदत ). अब शायद वह यहाँ पर उपलब्ध हो अगर सम्भव हुआ तो आप सभी से जरूर परिचय करवाऊंगा और जो पत्रिका के इंटरव्यू में बाते सामने नही आ पाती है उनको सामने लाने का प्रयास रहेगा। हिंदी की उम्मीद जीवित रखने के लिए उनको बहुत बहुत धन्यवाद। 

फुटनोट :- प्रिय मित्रो , आपने इस पेज को लाइक किया , यहाँ की पोस्ट को पसंद किया अपने मित्रो को इस पेज के लिए invite किया , पोस्ट को शेयर करते है। इसके लिए आप का हार्दिक आभार। मुझे कई लोगो ने कहा आपका पेज सबसे अलग है यहाँ की पोस्ट सबसे अलग होती है आप इनमे कुछ करने की पेरणा पाते है। यह बाते ही मुझे लिखने के  लिए प्रेरित करती है। मेरे पास अक्सर कुछ मैसेज आते है मै लगभग सभी को जबाब देने का प्रयास करता हूँ पर कुछ चीजे मुझे लगता है साफ कर देना चाहिए। दोस्तों इन प्रश्नो के जबाब देना कठिन होता है 
१.  बेस्ट किताबे कौन सी है? 
२. बेस्ट ऑप्शनल कौन सा है या फिर मै कौन सा सब्जेक्ट लू ?
३. कौन सी कोचिंग बेस्ट है ?
४. मुझे कुछ ट्रिक्स बता दीजिये ?

लगभग सभी लोग जानते है कि  मैं न तो कोई विषय का एक्सपर्ट हूँ , न मेरी कोई कोचिंग है और सबसे बड़ी बात मै इस फील्ड में सफल नही हूँ। बस हिंदी से गहरा लगाव है लेखन का शौक है उसी का रिजल्ट यह पेज है। 
वैसे इसी नाम से एक ग्रुप और ब्लॉग  है।  ग्रुप में कुछ फाइल अपलोड करने की सुविधा रहती है और ब्लॉग में सारी पोस्ट टॉपिक वाइज आसानी से जल्दी पढ़ी जा सकती है। नए मित्रो से निवेदन है कि अपनी जिज्ञासा मैसेज करने के पूर्व शुरुआत से देख ले पेज पर असुविधा हो रही है तो ब्लॉग पर देख ले ,  ध्यन्यवाद। 

कुछ दोस्तों को मै विशेष रूप से ध्यन्यवाद देना चाहुगा जो लगातार मेरी पोस्ट को शेयर करते रहते है।   








गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

इलाहाबाद : पूर्व का आक्सफोर्ड वाला शहर

इलाहाबाद : पूर्व का आक्सफोर्ड वाला शहर 

मेरे बड़ी हसरत रही है कि किसी नामचीन विश्वविद्यालय से पढाई करू और तैयारी करने के लिए इलाहाबाद में रहूँ । दोनों ही इच्छा अधूरी रह गयी । इलाहबाद से मेरी दोनों तरह की यादें जुड़ी हैं । इसी शहर में मेरे सारे पढाई से जुड़े मूल डाक्यूमेंट रेलवे स्टेशन पर किसी ने पार कर दिया तो दूसरी ओर चिंतक जी जैसे अजीज दोस्त दिये । इन्द्रजीत राना, अरविन्द चौधरी (दोनों असिस्टेंट कमांडेंट ), शिवेन्द (सीपियो इंसपेक्टर ), अमित गुप्ता ( पी. सी. एस. आयोग ) अनिल साहू (टी. जी टी ) जैसे मित्रों की लम्बी फेरहिस्त है जिनकी कहानी सुनकर सुस्त से सुस्त युवा भी दिलोजान से पढाई करने लगे.. जिनकी जीवन कथा मायूस, हताश युवा के लिए अमृत से कम न होगी । इस ब्लॉग  के माध्यम से बहुत नये इलाहाबादी मित्र जुड़ गए हैं मुझे टूटे हुए अंतराल जुड़ने की ख़ुशी है ।
मुझे जरा हिचक हो रही हैं इस पर  ऐसी पोस्ट करते हुए क्योंकि इसमें डायरेक्ट पढाई से जुड़ा कुछ भी नहीं है । पोस्ट करने के पीछे कुछ मित्रों का इलाहाबाद से जुड़े संस्मरण लिखने का पुराना आग्रह था । पहले ही स्पष्ट कर चुका हूँ कि मैं इलाहाबाद में कभी भी नियमित नही रहा हूँ । मेरे सारी पढाई मेरे शहर उन्नाव में ही हुई हैं । इलाहाबाद मैं २ , ३ महीने में एक दो दिन के किताबें खरीदने जाता था इस दौरान ही मैने इस खूबसूरत शहर को जाना । २० , २५ दिनों के अनुभवों के आधार पर ही लिखने की जुर्रत कर रहा हूँ । गलती से अगर शहर के अनुरूप न बन पड़े तो माफ करना । यह 2006 से 2010 तक के दौरान का इलाहाबाद है ।
मैने बताया कि इलाहाबाद किताबो के लिए जाता था पता है क्यों क्योंकि इलाहाबाद का खरा दावा है कि उससे सस्ती किताबें कोई शहर उपलब्ध नहीं करा सकता है । आप हैरानी होगी कि यहाँ योजना, कुरूक्षेत्र मे भी कुछ ऱुपये की छूट मिल जाती हैं. दर्पण, कृानिकल की बात ही मत करिए ।
इलाहाबाद की सबसे अच्छी बात, चीजों का सस्ता होना है उन दिनों समोसा और चाय 1 रूपये में मिला करती थी (ताज़ा रेट क्या है? ) । किसी यार दोस्त की आवभगत 10 रूपये में अच्छे से की जा सकती है । शहर में बहुत ही मिठास है यहाँ पर अनजान मित्र का भी स्वागत बहुत हर्ष से किया जाता है । खाना बनाने खासकर पनीर में बड़े बड़े खानसामे मात खा जाय । खाने से याद आया कि दोपहर में बहुतायत साथी दाल चावल ही बनाते हैं (थे ) इससे दोहरा फायदा होता है समय की बचत और पेट भी हल्का (है न सीखने वाली बात ) । दोपहर में हल्की नींद लेना वहाँ के जीवन का अनिवार्य हिस्सा हैं.. अ.. अ.. क्या लगता कि वो यह सब करते हैं तो पढते कब है?
अगर आप को कभी कोई इलाहाबादी यह कहे कि पढ़ने में अभी तुम बच्चे हो तो बुरा मत मानना । जितनी देर, एकाग्र होकर वह पढ सकते हैं आप से शायद ही हो पाये । चिंतक जी वाली कहानी याद है न कैसे मुझे डॉटा था कि इस कमरे में भी बात नहीं होगी । सब बातें ठीक है पर एकाग्रता से समझौता नहीं ।
इलाहाबाद से मैने बहुत कुछ सीखा है पर एक जरुरी चीज़ न सीख पाया.. वह है सर कहना । शायद यह छोटे शहर के, साधारण कालेज की पढ़ाई का नतीजा है कि हमउम्र के लिए सर नहीं निकल पाता । इलाहाबाद मे सर के विशेष मायने है सर मतलब केवल रोब गाठने से नहीं है । सर आप के हर काम में मदद करते हैं... कमरा दिलाना, सामान, किताबें, प्रेम मोहब्बत से लेकर मार पीट तक... ( भागीदारी भवन में एक सर काफी परेशान लग रहे थे पता चला कि किसी को साथी के रूम पर पुलिस गई थी सर उसको हास्टल में छुपाने के लिए परेशान थे ) भागीदारी भवन में ही मुझे किताब की जरूरत थी मैने एक मित्र को रूपये दिए । मित्र जब किताब लाये तो पता चला कि उसके दाम बढ़ गये । मैने जब रूपये देने चाहे तो नाराज होकर बोले कि सर कहने के मायने जानते हो । इलाहाबाद मैं सच में नहीं जानता था ( राना सर किरण इतिहास के 10 रूपये आज भी मुझ पर उधार है पर मैं उन्हें चुका नही सकता शायद कभी नहीं )


यदि आप इस बार आईएएस के प्रीएग्जाम में बैठने जा रहे है तो आपके लिए कुछ जरूरी सलाह



नोट: इस पोस्ट के लिए अपने गैलेक्सी फोन का जिसके चलते इतनी बड़ी पोस्ट हिंदी में लिख पाया और एक ३ घण्टे के ट्रेन सफर का आभारी हूँ । इलाहाबाद क्या आप इसे पढ़ रहे है ? पोस्ट जारी रहेगी । इलाहाबाद के मित्र कृपया इसे शेयर करे.. बदलाव के बारे में बताएं

रविवार, 20 जनवरी 2013

USEFUL TIPS FOR FCI MAINS


कर्मचारी चयन आयोग (STAFF SELECTION COMMISSION )

भारतीय खाद्य निगम (FOOD CORPORATION OF INDIA   द्वारा  आयोजित  मुख्य परीक्षा (MAINS) के लिये महत्वपूर्ण सुझाव:


  • सर्वप्रथम बचे हुये शेष  दिनों को अपनी प्राथमिकता के अनुसार विभाजित कर लें।



  •  इस परीक्षा में सिर्फ गणित और अंग्रेजी के प्रश्न आयेगे।  इसलिये कुछ दिनों के लिये इन दोनो विषय पर अपना FOCUS करें।



  • हिन्दी माध्यम के लिये अंग्रेजी बहुत बडी चुनौती है इस के SPECIAL रणनीति अपनाये।



  • गणित का आप का प्रदर्शन  आपके अन्तिम चयन में सहायक होगा। कृपया गणित के नये भाग की तैयारी के लिये आवश्यक  सामग्री एकत्र कर, उसका खूब अम्यास करें। यहाॅ पर अंगेजी माध्यम के विद्यार्थीयों से आप बढ.त ले सकते है।



  • बात को मत भूले कि आप की गणित तैयारी कितनी ही अच्छी हो । आप को अन्तिम चयन  के लिये अंग्रेेजी में औसत पदर्षन करना ही होगा। मानक पुस्तकों से आप सटीक सामग्री निकालकर उसका दोहराव करें। जमकर करें। रात दिन एक कर दें। हर पल आपके जेहन में सिर्फ परीक्षा हाल की छवि रहे।



  •  अगर सम्भव हो कही पर इस परीक्षा के अनुरूप कुछ टेस्ट आदि में प्रतिभाग कर लीजिये। पर ख्याल रहे कि आप का महत्वपूर्ण समय जाया न हो।



  • परीक्षा हाल में अपना धैर्य बनाये रखे। पेपर को कठिन देख कर अपना संतुलन न खो दे।



  • बहुत तेजी से कठिन QUESTIONS को नजरन्दाज करते हुये उन प्रष्नो हल करें जिन को आप घर में बहुत बार हल कर चुकें है।



  • यह एक मनौवैज्ञानिक तरीका है आप जैसे सरल QUESTIONS को हल कर लेगें आप में आत्मविष्वास मे आ जायेगा। इसके बाद आप कठिन प्रश्नो  को बहुत ही आसानी से हल कर मे स्वयं को सक्षम पाएंगे।

  •  अगर इस के विपरीत कठिन प्रश्न  मे अगर प्रारम्भ मे ही जूझने लगे। तब क्या कहूॅ , परीक्षा हाल से निकल कर खीज से भरे होगें और यह कहेगे कि मै कर सकता था बस समय कम पड गया बाद में बहुत आसान  प्रश्न थे।

  • यहाॅ पर यह भी स्पष्ट कर दूॅ कि यह सीरीज पर निर्भर करता है कि आप को पहले कठिन प्रश्न  दिखते या सरल। जैसा हो उसके अनुरूप आप  अपनाये। इस बात से निश्चित  रहे अगर आप ने ईमानदार तरीके से तैयारी की है तो आप के अनुरूप प्रश्न जरूर मिलेगंे।


  • दोस्तो , भगवान  पर अगाध विश्वास  रख कर ईमानदारी से प्रयास करे। कर्मचारी चयन आयोग ने आज तक कभी भी मेहनती ईमानदार से लगे रहे युवा को कभी निराश  नही किया है।


गुरुवार, 17 जनवरी 2013

HOW TO CONTINUE YOUR PREPARATION IN HINDI WORKING IN NON HINDI STATE



              अगर आप गैर हिन्दी भाषी राज्य में JOB कर रहे हो तो हिन्दी की सामग्री  (HINDI MATERIAL)मुश्किल से मिल पाती है। अगर सौभाग्य से आप के शहर में कोई कोई ऐसा विक्रेता है भी तो आप नियमित तौर पर वहा जा नही सकते। योजना(YOJANA),कुरूक्षेत्र जैसी मूलभूत पत्रिकायें आपको शायद की मिल सकें। इस लेख में उक्त समस्याओं से निपटने के लिये कुछ सुझाव प्रस्तुत है। यह लेख उन मित्रों के लिये भी समान रूप से सहायक होगा जो दूर दराज के परिवेश में रह है। जहाॅ तैयारी का न तो महौल है न ही सहायक सामग्री की उपलब्धता।


1. सर्वप्रथम आप योजना , कुरूक्षेत्र का कोई अंक खरीदे। उसमे सदस्यता फार्म (SUBSCRIPTION FORM )  मिल जायेगा। आप ने निश्चित ही इसे देखा होगा पर शायद ही आपने विचार किया हो यह आप की एक बडी समस्या का हल है। क्योंकि इसे भरना बहुत उलझन भरा लगता है साथ भी यह डर लगता है पता नही समय से डाक से पत्रिका मिल भी सकेगी। दोस्तों , इसको आप भर कर पास के डाकघर(POST OFFICE) चले जाइये। 100 रू का पोस्टल आर्डर लीजिये। वछित जानकारी भर कर भेज दीजिये। दूसरे या तीसरे माह से आप के ये पत्रिकायें घर पर प्राप्त होने लगेगीं। 


2. अगर आप की साहित्य में अभिरूचि है तो आप इस सूची में आजकल पत्रिका को भी शामिल कर लीजिये। प्रकिया पूर्व जैसी ही है। तीनों पत्रिकायें  भारत सरकार के प्रकाशन विभाग (PUBLICATION DIVISION) से निकलती है । इनका मूल्य सामग्री की तुलना में नगण्य है। तीनों ही पत्रिकाओं का घर पर पाने का स्वानुभव है। बहुत ही अच्छा महसूस होता है नयी पत्रिका को पाकर। 


3. विज्ञान प्रगति को भी ऐसे मगा सकते है  इनको मगाॅना इस मायने में आसान है क्योकि ये पोस्टल आर्डर (POST ORDER) को स्वीकार करती है जिसको बनवाने में सिर्फ 5 मिनट लगते है।

4. इसको साथ ही आप इण्टरनेट से भी बहुत सा मैटर डाउनलोड कर सकते है। बहुत जल्द आपको मैं इसके बारे में बताउॅगा। मेरी एक सलाह है आप डाउनलोड की हुई सामग्री को हार्ड कापी में ही  पढे। 

5. आप कही भी जाॅब कर रहे हो समय निकाल कर दिल्ली के मुखर्जी नगर का चक्कर लगाते रहे। इलाहाबाद में भी आप को न्यूनतम दामों में सिविल सेवा की हिन्दी में प्रमाणिक सामग्री मिल जायेगी। दिल्ली में आप को कुछ नामचीन कोचिग संस्थानों के नोटस की कापी आसानी से मिल जायेगी।


6. आज के दौर में इण्टरनेट के माध्यम से भी आप हिन्दी में नामचीन पुस्तके मगाॅ सकते है। यह सब बहुत आसान है। सबसे अच्छी बात यह है कि आप को भुगतान HOME DELIVERY    के बाद करना है। 

आपको ये पोस्ट कैसी लगी ? कृपया टिप्प्णी करना न भूले।  आप  धन्यवाद 

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