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रविवार, 4 नवंबर 2018

Story of a great teacher : Pro. Anil Gupta


वो अध्यापक जिनके पढ़ाये लड़के करोड़ो की जॉब पाते है


( प्राक्क्थन :- तमाम युवा लड़कों की भांति मैं जब इस तरह की खबर अख़बार में पढ़ता  था कि अमुक लड़को को करोड़ो का पैकेज मिला तो मन में सबसे पहले यही सवाल उठता कि यार इनको क्या पढ़ाया जाता होगा और इनको पढ़ाने वाले कौन लोग होंगे। मन में कहीं इच्छा थी ऐसे लोगों से मिलने की और एक दिन उनसे मुलाकात हो ही गयी )

अहमदाबाद में स्पीपा नामक लोक प्रसाशन का महत्वपूर्ण संस्थान है। उसके दो सेण्टर है।  एक जो इसरो के सामने है वो इन दिनों तोड़ कर फिर से बनाया जा रहा है। यह उन दिनों की बात है जब यहाँ पर एक बड़ा सा सेमिनार हाल था। उस हाल में मैंने प्रो पुरुषोत्तम अग्रवाल( प्रसिद्द आलोचक व पूर्व सदस्य , संघ लोक सेवा आयोग ) , इरा सिंघल मैडम ( आईएएस   )जैसे महत्वपूर्ण व्यक्तित्व को सुना और समझा था। ऐसे ही एक सेमिनार में उनको देखा। मैं जब पहुँचा तब उनका लेक्चर शुरू हो चुका था। न नाम पता था और वो क्या है यह भी नहीं जानता था। 

बात हो रही थी ग्रास रुट इनोवेशन की। अगर हिंदी में कहे तो जमीनी स्तर के नवाचारों की। लगभग 1 घंटे उनको सुना और बस सुनता ही रहा। ऐसे ऐसे विचार कि दिमाग के तंतु खुल जाये। प्रथम दृष्ट्या लगा कि वो दिव्य विभूति है। लेक्चर खत्म हो गया।   संचालक मृणाल पटेल ( मृणाल।ऑर्ग ) ने घोषणा की कि सर ने अपना मानदेय स्पीपा को ही छात्र हित संवर्धन हेतु वापस कर दिया है । दरअसल स्पीपा में हर लेक्चर देने वाले को कुछ मानदेय देने की व्यस्था है। सेमिनार हाल में बहुत भीड़ थी पता नहीं यह बात कितने लोगों ने सुनी व् नोटिस की थी। मुझे तो यह चीज और भी  प्रभावित कर गयी।

मैं उनसे मिलना चाहता था इसलिए दौड़ कर बाहर निकला। सर , तेजी से निकले और उनको गाड़ी लेकर चली गयी। यह 2015 / 2016  की बात होगी.बाद में उनके बारे में मैंने जानकारी जुटाई।  उनका नाम प्रो अनिल गुप्ता था और वो आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ाते थे। मन में उनसे मिलने की बड़ी इच्छा था पर जब तक समय न हो तक चीजे घटती नहीं है। 

इस साल (2018 )  फरवरी में जब स्पीपा जब upsc के लिए मॉक इंटरव्यू आयोजित कर रहा था , एक में अनिल सर को बुलाया गया था। दुर्भाग्य से उस दिन मुझे घर आना पड़ा था ।  इसलिए उनसे मिलते  मिलते रह गया। 

भला हो मनोज सोनी ( ममता संस्थान , गाँधीनगर ) सर का।  उन्होंने अनिल सर से समय लिया और इंटरव्यू देने वाले  जिन छात्रों को रूचि थी उनको लेकर सर  के घर गए।  घर के बेसमेंट में सर ने ऑफिस बना रखा है। उस दिन 10 से भी कम लोग थे , इसलिए बढ़िया से जानने व् सुनने का मौका मिला। वही पर बैठे बैठे मन में ख्याल आया कि सर इतने योग्य है , इनको कोई पुरुस्कार क्यों नहीं दिया गया. बाद में गूगल किया तो पता चला कि उन्हें तो २००४ के आस पास ही पदम् श्री दिया जा चूका है।

इन दिनों नवाचारों पर बड़ा जोर दिया जा रहा है। सर , की ख्याति वैश्विक स्तर पर इस क्षेत्र में है। कई वैश्विक संस्थानों  के वो सदस्य है।   हनी बी नेटवर्क , नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन , शोध यात्रा आदि के बारे में अपने सुना हो तो समझ लीजिये इनके पीछे उनके ही विचार है। इस दिन वो अपनी अनोखी बातों व विचारों से गहरे तक प्रभावित किया। उन्होने एक ऐसे विषय पर बात की जिस पर मुझसे upsc के वास्तविक इंटरव्यू में उसी विषय पर बात हुयी। 

रिज़ल्ट आने के बाद एक बार फिर से उनसे मिलने का अवसर मिला । मिठाई , गिफ्ट की औपचारिकता  के बहाने मिला । इस बार भी समय बहुत कम मिला पर कम समय में भी वो तमाम गहरी बातें समझा देते है।  सर उन्ही दिनों कच्छ की तरफ शोध यात्रा पर जा रहे थे. ऑफर किया हो "चलो" । मन में बड़ी इच्छा होते हुए भी एकाएक छुट्टी आदि के लफड़े के चलते  जा न  सका। इतना जरूर है कभी न कभी उसमें जाऊंगा जरूर। सर व उनकी टीम गांव में जाकर जमीनी नवाचारों को संस्थागत जरूरी सहयोग मुहैया करती है। धन्य है ऐसे गुरुजन। उन्हें शत शत नमन।  

© आशीष कुमार , उन्नाव , उत्तर प्रदेश।  

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

if you are Girl , this is specially for you /.टॉपिक 51 : दो शब्द आधी आबादी के नाम

टॉपिक 51 :   दो शब्द आधी आबादी के नाम 


कहा जाता है सिविल सेवा में , प्रश्न के अर्थ समझ ले यानि कि वो क्या पूछना चाह रहे है तो आप आधा प्रश्न हल चुके।  सिविल सेवा में आधी आबादी का मतलब महिला से है। एक निबंध भी अभी पूछा गया था " कामकाजी महिला की दोहरी जिम्मेदारी"  .  आज कुछ मै पेज की आधी आबादी के लिए कुछ लिखने जा रहा हूँ।  यदपि मुझे ज्यादा पता नही क्या लिखना है फिर  भी मै लिख रहा हूँ क्यकि आधी तो नही पर यहाँ पर इस पेज पर  पांचवा हिस्सा उनका है। लगभग २०० लोग (female) इस पेज से जुड़े है। कई दिनों से सोच रहा था कि उन पर केंद्रित कुछ लिखा जाय आखिरकार उनके भी कुछ सपने है , कुछ महत्वकांक्षा है , कुछ कर गुजरने की।  जब नारी केंद्रित कुछ निबंध या लेख लिखना होता है हम इन लाइन्स से शुरआत करते है 

"नारी तुम केवल  श्रद्धा हो , पियूष स्रोत सी बहा करो " 

( यहाँ ऐसा कुछ नही है लिखने जा रहा हूँ जो है साफ और स्पष्ट है )इस विषय पर विविध आयाम है पर मै पेज पर सिर्फ इस आयाम को ले रहा हूँ कि यदि आप फीमेल है तो तैयारी कैसे करे या फिर इससे जुडी समस्याऐ। हमारे समाज में आज कितनी प्रगति हो चुकी है फिर भी फीमेल की  जगह , उसके प्रति सोच , नजरिया अभी पुराना और संकीर्ण है। मै बड़े शहरों , महानगरो की बात नही कर रहा हूँ। महानगरो में  सोच में काफी बदलाव आ चूका है। यह नारी काफी हद तक स्वत्रंत है , आत्मनिर्भर है और इसके चलते डिसीजन लेने के लिए भी स्वत्रंत है।

मै छोटो शहरों , गांव की बात  रहा हूँ। हाशिये पर खड़ी युवा नारी की बात कर रहा हूँ क्यूकी ये असली भारत का प्रतिनिधित्व करती है। यहाँ भी उसके सपने है , वो अपने पैरो पर खड़ी होना चाहती है। वो भी आत्मनिर्भर होकर अपने जीवन का स्वत्रंत निर्णय लेना चाहती है। पर उसे दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ता है एक और उसे न ठीक से अवसर दिया जाता है पढ़ने का या कुछ करने दूसरी और जल्द से जल्द उसकी शादी कर के उसकी सीमित आजादी को और सीमित  कर दिया कर दिया जाता है। परेंट्स की ऐसा करने की अपनी वजह होती है। 
मेरी खुद की कोई बहन नही है पर मैंने अपने परिवेश , उन घरों में जहाँ टूशन पढ़ाता था वहाँ पर लड़का और लड़की के प्रति  भेदभाव को बहुत बारीकी से देखा है महसूस किया है।

 छोटी छोटी चीज में भेदभाव। क्या कोई ऐसा भी घर है जहां इसके विपरीत होता हो जहां लड़की को अच्छे स्कूल में पढ़ाया जाता हो लड़के को कमतर स्कूल में पढ़ाया जाता हो। या फिर लड़की को एक बार फेल होने पर उसे दुबारा पढ़ाया जाता हो  लड़के को फेल होने पर घर बैठा दिया जाता हो। है न अजीब बाते पर सोचो पढ़ कर ही अजीब लग है पर आज भी छोटे शहरों और कुछ हद तक बड़े शहरों में इससे मिलती जुलती समस्याओ को आज ' आधी आबादी ' को फेस करना पड़ रहा है। 

किरण बेदी , कल्पना चावला जैसे लोगो की कहानी सबके जुबान पर रहती है पर क्या हमें उपर वर्णित उन करोङो युवा नारियों की स्थिति , उनकी दशा से आँख बंद कर लेनी चाहिए। हर माँ जानती है उसकी बेटी ही उसके प्रति वास्तविक लगाव रखती है उसे ही उसकी सबसे ज्यादा परवाह है फिर भी वह ( माँ ) बेटी और बेटे में कही न कही भेदभाव कर ही बैठती है और शायद इससे बेटी को सबसे ज्यादा चोट पहुँचती है। कभी किसी पोस्ट में कुछ वास्तविक उदाहरणों से इस बात को साबित करुगा आज अपने मूल विषय पर वापस लौटते है। 

मान लीजिये  आप भी इन्हीं सब के बीच में है और कुछ करना चाहती है तो कैसे शुरुआत करेंगी ? जब कोई लड़का ऐसी स्थिति में होता है तो मै उसे आत्मनिर्भरता के कुछ टूशन पढ़ाने के लिए लिए सलाह देता पर आप शायद घर घर जाकर टूशन न पढ़ा सके। आप कोई स्कूल या कोचिंग में कुछ टाइम दे सकती है। अपने आस पास कोई दीदी को तलाशिये जो सफल हो वो आपके लिए सबसे अच्छी मागर्दर्शक होगी। शुरुआत छोटी परीक्षा से करे। सरकारी टीचर या बैंक में शायद आपको सबसे जल्दी सफलता मिल जाये। और एक बार आप कही छोटी जगह पर सफल हो जाये तो अपनी तैयारी बंद न करे आगे बढ़ने के लिए , बड़ी परीक्षा के लिए तैयारी करते रहे।

हर राज्य में सिविल सेवा के लिए निशुल्क आवासीय कोचिंग चलती है पर इस बारे में ज्यादातर लोग अनभिज्ञ रहते है।   लखनऊ में समाज कल्याण विभाग की कोचिंग है , यहाँ   अहमदाबाद में 'स्पीपा' है , गांधीनगर में 'ममता'। मेरे ख्याल से हर राज्य में ही ऐसी ही व्यवस्था होगी।( प्लीज अगर आप ऐसी किसी सुविधा के बारे में जानते है या वहाँ रहे है तो प्लीज कॉमेंट में शेयर करे ) और एक बार आप ऐसी जगह में एंट्री कर गयी तो आप के लिए सारी मुश्किले आसान हो जाएगी। 

(और क्या लिखु वैसे भी  स्त्री विमर्श में माना गया है कि एक नारी ही नारी की व्यथा को बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकती है। सोचे हुए यथार्थ से , भोगा  हुआ यथार्थ ज्यादा प्रामाणिक, जीवंत  होता है फिर जैसा मुझसे बन पड़ा लिखा।  अपने कुछ सुधी पाठक जनों से भी अपेक्षा है कि वह भी इस विषय पर अपने विचार दे कि कैसे एक युवा नारी  और किन किन समस्याओं का सामना कर रही है और वह इन परिवेश में रहते हुए , आगे बढ़  कैसे बढ़ सकती है। )

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