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शुक्रवार, 17 मार्च 2017

प्रयाग स्टेशन की एक कहानी


लिखने के लिए जरूरी है आपके पास बहुत अनुभव हो, बारीक़ नजर हो जिससे आप परिवेश को अपना विषय बना सके।
मेरे पास संचित अनुभव बहुत हो गया है जो कभी कभी शब्दों के रूप में उमड़ने लगता है पर हर बार रोक लेता हु मन को समझा लेता हूँ कि पहले प्राथमिकताओ पर ध्यान क्रेंद्रित करो ।

हर बार जब भी सफर करता हूँ दर्जनों चीजें नजर के सामने पड़ जाती है , कानों को सुनाई पड़ जाती है । लगता है कि अब बस करो दुनियादारी । लिखो क्योंकि लिखना असंतुष्ट मन को अपार संतुष्टि देता है । अहमदाबाद से इलहाबाद तक सफर हो गया और फिर उन्नाव लौट रहा हूँ ।

ट्रेन में सफर करते वक़्त जब करने को कुछ न बचे तब एक ही सगल याद आता है लिखना  ☺

इलाहाबाद में प्रयाग स्टेशन पर एक रोचक आदमी मिला । मिला क्या बस उसे सुना वो कोई स्कीम समझा रहा था वही पोंजी स्कीम जिसमे कुछ रूपये जमा करो , सामान लो , लोगो की chain बनाओ और लाखों कमाओ । कुछ पल को मुझे अजीब लगा आज भी ये चीजे चल रही है । वो आदमी काफी ऊँची आवाज में समझा रहा था मजे की बात यह कि उसके श्रोता कौन थे ओडिशा से आये मजदूर और उनका ठेकेदार जो किसी ईट के भट्ठे में काम करने जा रहे थे । अब एक प्रश्न उभरता है कि कैसा होगा वो आदमी । मैंने चुपके से उसकी तस्वीर निकाल ली है पूरा वाकया फिर कभी ।

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