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बुधवार, 26 अगस्त 2020

AAM PAPAD OR AMAVAT

अमावट/आम पापड़ 

पता नहीं जब आप इसे पढ़ने जा रहे, उससे पहले उक्त शब्दों को सुना है या नहीं। अगर आप गांव देहात से जुड़े है तो आपने अमावट के बारे में जरूर सुना होगा। अमावट यानी जिसको सुनकर ही मुँह में पानी आ जाय, क्या बच्चे क्या जवान सबके मुँह को भाने वाला। 

अभी अमावट खाते खाते इसके तमाम पहलुओं पर मन विचार करने लगा। अच्छा बता तो दूँ कि अमावट यानी क्या ...फलों के राजा आम के बारे में तो आप जानते ही होंगे। अमावट , Mango के रस से बनाया जाता है। आमों का रस निकालिये, एक कपड़े पर उसकी परत बनाइये, धूप में सुखाइये। अगले दिन उसी परत पर यही किया दोहराइए। आपको कई दिनों तक ऐसा करना पड़ेगा। तब जाकर तैयार होगा अमावट, जिसे ज्यादा साफ सुथरी भाषा में लोग आम पापड़ कह देते हैं।
मेरा जब भी home जाना होता, mother से एक ही फरमाइश होती कि कहीं से अमावट खरीद लेना। धीरे धीरे लोग अमावट बनाना बन्द कर रहे है, वजह इसमें बहुत ताम झाम होता है और यह बड़ी मेहनत व धैर्य का काम है।

मैंने ऐसा सुना है कि मेरे दादा के childhood में आम की बहुत बड़ी बाग हुआ करती थी। रोज बैलगाड़ी भर आम आया करते थे। मेरे बचपन मे पुरानी बाग के एक्का दुक्का पेड़ बचे थे, बड़े जबर व तगड़े। हमारे बचपन में एक झोला आम न मिलते तो bullckcart भर रोज के आम वाली बात फर्जी लगती।

खैर मेरे बाबा ने फिर से बाग लगाई, पुरानी बाग में देसी पेड़ ज्यादा थे। इस बार बाबा ने मीठे व स्वादिष्ट पेड़ो की पौध तैयार की। पेड़ रोपे गए, वो बड़े हुए और हमने अपनी आँखों से देखा। किसी किसी दिन बाग में 4 से 5 बोरा आम इक्क्ठा होते। घर आते। अब इतने आमों को खाये कौन..कुछ इधर उधर बाटे जाए । 
बचे आमों  दादी को बड़े से कठोलवा ( लकड़ी का बना बड़ा सा भगोना/ओखली) में मूसल से मसल मसल कर आमरस बनाते देखा। छत पर अमावट के लिए तमाम कपड़े पड़े रहते। वैसे अगर आप अमावट को बनते देख ले तो शायद कभी खाने का मन न करे। तमाम मखियाँ, पीली बर्र आमरस चाटने को बेताब दिखेंगी। आमरस को निकाल कर कपड़ो पर रोज परत बनाने का चाची करती थी। आम का सीजन खत्म होने पर घर में 50/70 किलो तक अमावट तैयार होता। यही हाल मौसी के घर पर भी देखा। मुझे याद है एक बार उनके घर 1 कुन्तल अमावट बेचा गया था। घर के खाने के लिए लोग अच्छे व मीठे आमों के रस को अलग निकाल कर अमावट के अच्छे साफ टुकड़े तैयार करते। बाकी काला, खट्टा, गीला अमावट बेचने को तैयार किया जाता। जितना साफ अमावट, उतने बढ़िया दाम।
( आम पूूड़ी )

इस बार भी घर गया तो अमावट याद आया। मां से पूछा कि अमावट तो बोली अब लोगों ने अमावट बनाना बन्द सा कर दिया। अबकि औरतों से कहाँ इतना काम हो पायेगा। एक दो लोगों को बताया कि उन्होंने अपनी जरुरत भर के लिए अमावट बनाया है, बेचेंगी नहीं। खैर , मुझे इस बार भी मां ने किसी जगह से अच्छी क्वालिटी के अमावट का जुगाड़ कर दिया। 
एक बात बताना भूल गया, अमावट को चाहे तो आप सूखा खाये अगर मन करे तो उसे एक दिन पहले पानी मे भिगो कर बढ़िया मीठी चटनी के रूप में खाये, मजा दोनों तरह से आएगा।
(अमावट को दांतों से चबाने में अलग ही आनंद आता है)

थोड़ा बौद्धिक स्तर पर बात करें तो अमावट के रूप में हमारे यहाँ अतीत से food processing का चलन है। लोग जब बहुत मात्रा में आम गिरने लगते तो उसके रस को धूप में सुखाकर संरक्षित कर लिया करते। उसे पूरे साल ( कई बार 2, 3 साल) तक उपयोग में लाते।

तो अब आप बताइए कि आप ने अमावट को चखा है या अभी इसके स्वाद से वंचित है ?

© आशीष कुमार, उन्नाव।
26 अगस्त, 2020।


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