सोमवार, 20 जुलाई 2026
अवैध ठेला
रविवार, 12 जुलाई 2026
दुविधा
लघुकथा :- दुविधा
आशीष कुमार
मेरे सामने पेपर है और मै दुविधा में हूँ।
मेरे सामने अतीत है जो बड़ी तेजी से गुजर रहा है। मेरी परवरिश ऐसी की गयी कि घर से स्कूल और स्कूल से घर। जल्द ही मेरी सरकारी जॉब लग गयी। मेरे जीवन से जुड़े सारे फैसले मैंने पिता जी पर ही छोड़ रखा था। इसलिए शादी के लिए भी जहाँ से रिश्ता आया , वहीं हाँ भी कर दी।
शुरू में सब ठीक था , इनकी नौकरी निजी क्षेत्र में थी , अच्छा कमाते थे। नेचर और लुक दोनों अच्छा था। मुझे जीवन में हर चीज अच्छी लगती थी। शादी के कुछ टाइम बाद , बच्चा भी हो गया। मेरी अध्यापक की नौकरी थी। मैं खुद में हर चीज के लिए सक्षम थी।
मुझे बचपन से आत्मनिर्भर बनाया गया था। मुझे खुद पर बहुत आत्मविश्वास था। मुझे न पता था ,यही आत्मविश्वास मेरे लिए , सबसे बड़ी मुसीबत बन जायेगा।
हमारी शादी के 7 साल होने को आये. बच्चा बड़ा हो रहा था , इसके साथ साथ इनके पिता की मानसिकता छोटी होती जा रही थी। शादी के समय मेरी जॉब से , इनको बड़ा गर्व हुआ था और अब धीरे धीरे मेरी जॉब , इनको दिक्क्त दे रही थी।
शुरू में कोई विशेष बात न थी, छोटी मोटी बहस होती थी। पर धीरे धीरे चीजे खराब होने लगी। कुछ उनका अहं भाव , कुछ नौकरी में इशू , एक मित्र द्वारा साझा व्यापार में धोखा के चलते शराब का सेवन करने लगे। बात यही न रुकी, बहस के साथ साथ अब उनका हाथ भी मुझ पर उठने लगा।
यह बात किसी से मैं बता न सकती थी। पिता जी से भी कुछ हद की बात साझा की और बताया कि चीजे अब बर्दाश्त से बाहर हो रही है। उनका मानना था कि चीजें धीरे धीरे ठीक हो जाएगी। उनको समझना चाहिए था कि अगर ऐसा होता तो मैं उन तक बात लाती ही न।
इस बार स्कूल की छुट्टी होते ही अपने पापा घर आ गयी। भले वो , मुझसे दूर थे पर उनके साथ की बहस , बदतमीजी मेरे जेहन से जा न रही थी। एक रोज बगैर किसी से बताये , कोर्ट चली गयी।
वकील ने पहले समझाने की कोशिस की पर मेरी परेशानी शायद उसे भी समझ आ गयी। मैंने उससे पेपर तैयार करने को बोल दिया। छुट्टी खत्म होने को थी और पेपर भी रेडी हो गए थे।
पिछले कई महीने रोते हुए ही गुजरे थे , मैंने कितने मौके दिए , बार बार माफ़ किया पर शराबी इंसान की बात का क्या भरोसा। अब जब पेपर रेडी होकर सामने है और मुझे बस हस्ताक्षर करने है , मैं बड़ी दुविधा में हूँ।
दुविधा , यह कि यह सब मैं अपने बेटे के अच्छे भविष्य के लिए सोच कर रही हूँ पर कहीं वो बड़ा होकर मुझे ही गलत न समझे। दुनिया क्या कहेगी , समाज क्या सोचेगा। बेटा , बगैर पिता के कमजोर न महसूस करे , उसके विकास में किसी तरह की चुनौती तो न आएगी। फिर ये भी लगता है , उनकी गलत आदतें , मेरी साथ बत्तमीजी को भी देखकर भी उसका बचपन सामान्य न रहेगा।
पीछे मैंने किसी के कहने पर " आपका बंटी " ( मन्नू भंडारी ) भी पढ़ी थी। उसको पढ़कर और भी तमाम प्रश्न उठ खड़े हुए। मेरी दुविधा की वजह शायद मेरी सहज कोमलता है पर अब मै और किसी और के बनाये नियम , उसूलों को न मानूंगी। जो विद्रोह मुझे काफी समय पहले कर देना चाहिए था , अब उसमे देरी करना उचित न होगा।
मैंने एक बार फिर से उन पेपर्स को पढ़ा और उन पर अपने हस्ताक्षर कर दिए।
© आशीष कुमार , उन्नाव।
12 जुलाई , 2026
बुधवार, 16 अगस्त 2023
post without title
काफी दिन दिनों से कोई कहानी न लिखी , वजह तमाम है जैसे समय का न होना , लैपटॉप व फ़ोन में आसानी से हिंदी टाइप न हो पाना और आखिरी पर सबसे महत्वपूर्ण बात इच्छा ही न होना।
तमाम नए अनुभव मिले , चीजों को बारीकी से अब भी देखता हूँ पर न जाने लिखने की अब वजह खास दिखती।
आज विशेष दिन है कोई अच्छी से कहानी तो याद न आ रही पर कुछ वाकये याद आ रहे है.
(1 )
सबसे पहली बात तो यही अजीब लगती है कि अब पायः सरकारी ऑफिस में छुट्टी भी मिलती है तो इस शर्त के साथ कि फ़ोन पर उपलब्ध रहना। समझ न आता इस शर्त के साथ छुट्टी कैसी। एक मित्र काफी दिनों बाद जैसे तैसे पहाड़ो पर जाने के लिए छुट्टी ली , शर्त जुडी थी. बेचारे अपनी पूरी छुट्टी में बैठ कर पीपीटी बनाते रहे। अब कसम खायी है कि ऐसी छुट्टी न लेंगे , भले कितना ही वक़्त गुजर जाये.
(2)
आज लैपटॉप पर फेसबुक खोला तो एक मित्र याद आ गए। आईपीएस है मध्य प्रदेश में। साथ इंटरव्यू दिया था , उनका चयन हो गया था मेरा न हुआ था। मुखर्जी नगर जाना हुआ तो मैंने रिक्वेस्ट कि सर मुलाकात हो सकती है क्या। बात बन गयी। हडसन लेन में किसी रूम में मिले। पहली बार रूबरू किसी सफल व्यक्ति से मिल रहा था। २० मिनट की मुलाकात रही होगी. तमाम बातों के बीच में मैंने देखा उन्होंने लैपटॉप पर फेसबुक खोला और देखा २ मिनट में जितनी भी उनके सामने पोस्ट आयी , सब में फटाफट लाइक करते चले गए। न तो उन्होंने बताया , मैंने पूछा कि बिना पढ़े , देखे ऐसे लाइक के क्या मायने। तमाम दिनों तो मै उसके अलग अलग अर्थ निकलता रहा जैसे ---- समय बचा रहे थे या फिर सबको सोशल दिखाने की कोशिस कर रहे थे पर अगर समय ही बचाना था तो फेसबुक खोला ही क्यू था और सोशल दिखना ही था तो कम से कम ध्यान से पढ़ते तो सही।
- आशीष , उन्नाव।
16 august , 2023
बुधवार, 20 जून 2018
International Yoga Day : A Story
शुक्रवार, 25 मई 2018
Muft ka yash
सोमवार, 11 अप्रैल 2016
STRANGE BUT IT IS TRUE
रविवार, 17 जनवरी 2016
STRANGE HOUSE : UNCLE'S FLOWER POT
गुरुवार, 7 जनवरी 2016
First time in restaurant
सोमवार, 4 जनवरी 2016
STORY OF YO YO HONEY SINGH IN HINDI
नया नया LAPTOP लिया था।OFFICE से आने के बाद एक सूत्री कार्यक्रम था एक दो HOLLYWOOD की मार धाड़ ACTION वाली मूवी देखना। एक दिन मकान मालिक का लड़का १६ बर्ष का लड़का ROOM आ गया उसने बोला मेरे पास फिल्मो का बहुत अच्छा COLLECTION है मुझसे ले लो। झट से वो अपनी PEN DRIVE में सामग्री ले आया।
उसने कहा मै तुम्हे एक चीज दिखाऊ और उसने एक SONG फुल आवाज में बजा दिया उसने कुछ और गाने बजाए। १० या १५ मिनट बाद मुझे लगा मेरे लैपटॉप के SPEAKER से ठीक से आवाज नही आ रही है। तब उसने ये बताया ये सारे गाने यो यो शहद सिंह के है। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था। १६ बर्ष के किसी महानगरीय लड़के से ज्यादा ज्ञान किसी को नही होता है उसने यह लैपटॉप के स्पीकर खराब करने वाली कला अपने साथियो से सीखी थी। उसने बताया कि यो यो के गानो में बीट बहुत ज्यादा होती है और काफी कुछ TECHNICAL LANGUAGE में बताया।
खैर उस समय यो यो को नाम धीरे धीरे फ़ैल रहा था। अपनी माँ भी अपने बेटे को गर्व के साथ यो यो के रैप सुनाने को कहती और उनके बेटे ने भी कोर्स की तरह यो यो के रैप रट रखा था वो बगैर मतलब समझे गाने लगता
" तुझे बिठा कर रखा था मैंने रानी पलकों पर
तूने मारी ठोकर समझी आ जाऊंगा सडको पर ..."
हमारे room partner गुरु जी काफी पहुंचे हुए थे। मेरे शहर में कोई स्टार के कार्यक्रम होते तो उसके free पास उनको जरूर मिल जाते। गुरु जी इस तरह के कार्यक्रमों में जाते नही थे। शहर में पता चला यो यो आ रहे है। गुरु ने राहुल से वादा कर लिया कि वो पास जुटा लेंगे। यो यो आये पर गुरु जी को पास न मिल सके। उस दिन मुझे अहसास हुआ कि यो यो वाकई बहुत ज्यादा popular है।
मंगलवार, 29 दिसंबर 2015
story of childhood
बुधवार, 2 सितंबर 2015
Interesting story of IRA SINGHAL , IAS TOPPER 2015
HOW TO START PREPARATION, SOME USEFUL TIPS
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SUCCESS TIPS BY NISHANT JAIN IAS 2015 ( RANK 13 )
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निबंध में अच्छे अंक लाने के लिए जरूरी है कि उसमे रोचकता और सरसता का मिश्रण हो.........आज से कुछ लाइन्स या दोहे देने की कोशिश करता हूँ......
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नीला चाँद कल रात में अंततः इस उपन्यास का पठन पूरा हो गया। शिव प्रसाद सिंह द्वारा लिखे गए इस बहुचर्चित उपन्यास की विषय वस्तु 11 वी सदी के स...

