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सोमवार, 28 मई 2018

What I read in last 15 days

हालांकि इसके अलावा भी काफी कुछ पढ़ा पर, यह नोट करने लायक था।

गुलजार की दो कहानी

1. धुंआ
2. तकसीम

रेणु

1. ठेस सिरचन की कहानी
2 . रसप्रिया -मृदरंगी पँचकौड़ी
3. लाल पान की बेगम- बिरजू की माँ, नाच देखने का पकरण

धर्मवीर भारती

1. बन्द गली का आखिरी मकान

अमरकांत

1 एक थी गौरा
2 दोपहर का भोजन
3 डिप्टी कलेक्टरी (सिविल सेवा की तैयारी करने वालो को जरूर पढ़ना चाहिए )
4 पोखरा
5. लड़का लडक़ी ( बहुत ही अच्छी)

अगस्टस स्ट्रिंग्बर्ग 
1. पुर्जा
2. धनिया की साड़ी

रमेश बक्षी

1 मुमताज महल का इयररिंग
2. जो सफल हैं

कई बार मैं जिक्र करता हूँ कि 500 से अधिक नावेल पढ़े होंगे और वो पुस्तकालय के रिकॉर्ड में होंगे भी पर मेरे पास अपनी पढ़ी पुस्तकों का लेखा जोखा नही है। यही सोच कर जो अब जो कहानी पढ़ता गया उसको नोट करता चला। नॉवेल या बड़ी बुक की संक्षिप्त समीक्षा लिखने का प्रयास करता रहता हूँ । उक्त कहानियां गद्य कोष पर ऑनलाइन उपलब्ध है और बहुत रोचक है। रेणु की कहानियाँ पर अलग से कुछ लिखने का विचार है। आंचलिक विषय वस्तु और भाषा मे वो बेजोड़ है।

©आशीष कुमार, उन्नाव, उत्तर प्रदेश।

सोमवार, 12 दिसंबर 2016

That 48 hours





                आम तौर पर जब पास के मार्किट से सामान लेने जाना होता है तो पैदल ही जाता हूँ पर कभी कभी आलसवश बाइक से भी चला जाता हूँ।  ५० मीटर भी दुरी न होगी।  उस दिन मुझे दूध लेने जाना था तो बाइक लेकर गया।  दूध ले रहा था दूसरी और केले दिखे। इन दिनों केले बहुत मीठे आते है। उन्हें लेने चला गया। केले ले रहा था तो चौराहे के तीसरी ओर मुझे सेब दिखे।  काफी दिन हो गये थे सेब खाए सोचा आज ले ही लिए जाये।  फलाहार अच्छी चीज होती है मन में सोचा। सेब तौला रहा था कि मुझे बहुत सोधी खुशबू की महक आई।  यकीनन अहमदाबाद में यह खुशबू विस्मय का विषय थी।  ऐसा लगा कि up वाली स्टाइल में कही पास आलू की टिक्की बनाई जा रही हो। इसमें लेश मात्र झूठ नही , उसकी दुकान मैंने खुशबू से ही खोजी।





मार्केट में उसकी दुकान दिखती नही थी क्युकी उसकी ठेलिया पीछे लगती थी। मैंने अपने हाथो में दूध , केला और सेब लिए उसके पास पहुच गया। ५ मिनिट में सारी जानकारी ले डाली।  इटावा का आदमी था , पहले चंडीगढ़ में आलू टिक्की बेचा करता था अब ३ महीने से यही है।  मैंने उससे हर चीज जानने की कोशिस की कितनी लागत लगती है , बिक्री कितनी होती है , बचत कितने की होती है।  उसके किराये के तौर पर कितने रूपये देने पढ़ते है। इन सब के पीछे वजह यह थी कि मुझे अपने प्रान्त का आदमी मिल गया था और अपने घर जैसा कुछ खाने को मिलता। २० रूपये में दो टिक्की दिया।  बहुत स्वादिष्ट थी।  कुल मिलाकर वो ३ चीजे बेच रहा था।  मैंने बाकि चीजे दुसरे दिन खाने का वादा करके चला आया। चलते चलते उसे कुछ बिजनेस से जुड़े कुछ टिप्स भी दिए।  आपको पता ही होगा सरकारी आदमी , हमेशा धंधे की ओर आकर्षित होता है और धंधे वाला आदमी , सरकारी नौकरी के प्रति आकर्षित रहता है। वैसे भी इन दिनों स्टार्ट up का खूब चलन है मैंने उसे ऐसे ज्ञान दिया जैसे मै आईआईएम , अहमदबाद से पढाई करके निकला हूँ।  उसकी दुकान से जब चला तो मेरे मन में यह बात घूम रही थी मान लो यह आदमी का धंधा खूब चल निकला और इसने अपनी ठेलिया की चैन सीरिज खोल दी तो। 


अगले दिन में ऑफिस न जाकर , फील्ड पर जाना था।  गाड़ी लेने आई थी।  सारा दिन काम किया और रात में देर तक पढाई की। अगले दिन भी गाड़ी लेने आई। फिर सारा दिन काम किया और रात में पढाई की। तीसरे दिन मुझे ऑफिस जाना था।  सुबह देर से उठा पता न क्या सुझा सोचा आज खाना भी बना लिया जाय। खाना बनाते बनाते ११ बज गया।  जल्दी से खाना पैक कर , हेलमेट उठा कर नीचे गया। मेरा नया रेड कलर का हेलमेट बड़ा प्यारा है इसलिए इसे बाइक के साथ न रख फ्लैट में रखता हूँ।  

नीचे जाकर देखा तो बाइक न दिखी। एक पल को यकीन न हुआ। आखे मीच कर देखा तो भी बाइक न थी।  मेरी जान सूख गयी। सोसाइटी में कैमरे भी लगे है , सोचा यहाँ से कौन ले जा सकता है। इतना तो यकीन था जो भी बाइक की चोरी की होगी पकड़ा तो जायेगा ही।  हाथ में हेलमेट लिए मै गेट तक आ गया।  दिमाग पर जोर डालने लगा , कही मै ही तो बाइक नही ले गया था। अगर गया भी होगा तो पास तक ही।  सच में , दोस्तों आपको अजीब लग रहा होगा मुझे जरा भी याद नही आ रहा था कि बाइक कब और कहाँ तक ले गया था।  पता नही किस विश्वास से मै चौराहे तक आ गया।  मुझे दो जगह की संका हो रही थी या तो मै दूध लेने गया होऊंगा या फिर अगले चौराहे तक होटल में खाना खाने। 

चौराहे के दूसरी ऑर एक गन्दी सी बाइक दिखी। मुझे अपनी बाइक पहचाने में जरा भी देर न लगी।  पुरे ४८ घंटे वह वही खड़ी रही। मैंने डेरी वाले से बोला मेरी यह बाइक है और मै ले जा रहा हूँ। उसने कहा ले जाओ तुम्हारी ही है न ? मै ने उसे यकीन दिलाया हा मेरी ही है।  बाइक उठाते वक्त , मैंने चारो तरह नजर डाली , बाइक डेरी के बाहर लगे एक कैमरे के दायरे में थी। शायद किसी ने उसे उस जगह तक खिसका दिया था।  


Copyright - ASHEESH KUMAR 

( दोस्तों , कैसी लगी यह घटना ( यह कहानी नही हकीकत है . ) ................ क्या आप भी कभी इस तरह कुछ भूले है . ) 





सोमवार, 11 अप्रैल 2016

STRANGE BUT IT IS TRUE

है न यह विचित्र बात 

जैसा कि आपको पता है कि मै अपने मूल जिले से काफी दिनों से दूर रहता आ रहा हूँ . अक्सर जब कही परिचय देना होता है तो मै बताता हूँ कि मेरा जिला कलम व तलवार दोनों का धनी है . उन्नाव  से  सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी , प्रसिद्ध आलोचक राम विलास शर्मा जी , चित्रलेखा जैसे कालजयी नावेल के लेखक भगवती चरण वर्मा जी जैसे लोग जुड़े रहे है . यह चन्द्रशेखर आजाद की भी धरती है . ऐसा बहुत कुछ गर्व से बतलाता हु पर बहुत कम लोग इससे मेरे जिले को पहचान पाते है . मेरे पाठक भी शायद इस unnao  नाम से अनजान हो पर आज आपको ऐसी बात बताने जा रहा हूँ जो निश्चित ही आप ने सुना होगा . 

आपको याद है २०१३ में एक जगह पर एक साधू ने सपने में देखा था कि जमीन में १००० टन सोना दबा है . इस खबर की चर्चा सारे भारत के साथ वैश्विक स्तर पर हुई थी  . सोना तो नही मिला पर मुझे बड़ी आराम हो गयी है . अब लोगो से इतना ही कहना होता है कि उसी जिले से हूँ जहाँ पर सोना खोदा जा रहा था . 

है न यह विचित्र बात जानना किस चीज से चाहिए पर जानते किस चीज से है . 

सोमवार, 25 जनवरी 2016

love at present time

प्रेम और रेवड़ी :कौन सस्ता ,कौन महँगा  ???

विषय थोड़ा सा अमर्यादित लग सकता है आपको ,मैं पूरी कोशिश करुँगी इसे मर्यादित तरीके से लिखने की। फिर भी अगर कलम कहीं फिसल जाये तो आप सब से मुआफ़ी चाहती हूँ। घबराइये नहीं ;मैं आपको कचरा नहीं परोसने जा रही हूँ।  आपकी मानसिक तंदुरुस्ती का ख़्याल रखना मेरी जरूरत भी है और जिम्मेदारी भी। 
    प्रेम के सन्दर्भ में दो बातें अक्सर मेरे दिमाग में कौंधती हैं -एक तो यह कि भारत जैसे देश में जहाँ प्रेम के प्रतीक स्वरूप राधा -कृष्ण को वर्षों से पूजा जाता रहा है ;वहाँ प्रेम को इतना अनैतिक क्यों समझा जाता है। किसी और को क्या कहूँ मैं ख़ुद इस विषय में कुछ भी कहने या सुनने से कतराती हूँ। ऐसा लगता है कि जैसे आत्मा अपवित्र हो रही हो। और जो दूसरी बात है वह यह है कि हमारे यहाँ लोगों को दाल -सब्जी मयस्सर हो न हो ;प्रेम हर किसी को प्राप्त है। यहाँ हर आदमी के पास अपनी प्रेम कहानी है और वह भी एक -दो नहीं ;दर्जनों की संख्या में। हास्यास्पद लगता है ;सोचती हूँ कभी-कभी कि  क्या प्रेम रेवड़ी से भी ज्यादा सस्ता हो गया है। 
   मेरे घर के पास में ही वीरबहादुर सिंह नक्षत्रशाला है और उसी से लगा भीमराव अम्बेडकर पार्क भी है। काफी खुली जगह है यह। लगभग हर शाम मैं यहाँ जाती हूँ।मेरे थोड़े -बहुत सामाजिक ज्ञान के लिये शाम के वक्त की यह सैर ही जिम्मेदार है ;क्योंकि बाहर की बौरायी हुयी हवाएँ हमारे घर की चहारदिवारी को लाँघ नहीं पातीं। हर रोज़ कुछ हैरत भरा देखने -सुनने को मिलता है और मैं अवाक् रह जाती हूँ। लेकिन अब बुरा नहीं लगता ;शायद आदी हो गयी हूँ। 
   ऐसे ही एकदिन का वाक़या है -पार्क में टहलते वक्त मैंने देखा एक जगह ५-७ युवा लड़के  बड़ी एकाग्रता पूर्वक कुछ सुन रहे थे। थोड़ा नजदीक  जाने पर ज्ञात हुआ कि ,उनमें से एक अपनी तथाकथित प्रेमिका से बातें कर रहा था और बाकी के उन बातों के मजे ले रहे थे। मैंने मन ही मन सोचा बेचारी भोली -भाली लड़की को उल्लू बना रहे हैं। कुछ दिनों बाद  एक और घटना देखने को मिली ;फर्क मात्र इतना था कि अबकी बार उन लड़कों की जगह कुछ चमकती सूरत लिये बेहद नाजुक दिखने वाली लड़कियां थीं। शायद ये सब कुछ बेहद आम है और अंडरस्टुड भी। अगर मुझे घुटन हो रही है तो दोष मेरा है। 
   ये टाइम पास के नये तरीके हैं ;जिन्हें हमारी आजकल की मॉडर्न और एक्स्ट्रा जीनियस जनरेशन प्यार  का नाम देती है। यह प्रेम सचमुच बेहद सस्ता है और सर्वसुलभ भी ;परन्तु उतना ही घटिया और सर्वथा हेय। मेरी समझ से प्रेम अत्यंत दुर्लभ है। वह यूँ  गली ,नुक्कड़ ,चौराहे पर भटकता हुआ न मिलेगा। भटकता हुआ इस तरह का प्रेम महज़ गुमराह कर सकता है। प्रेम की अनुभूति की जा सकती है परन्तु अभिव्यक्ति नहीं। अभिव्यक्ति के बाद प्रेम ,प्रेम न रह कर कलंक बन जाता है और सर्वथा दुखदायी ही होता है। कहते हैं जिस विषय की उचित मालूमात न  हो उस विषय पर जुबान नहीं खोलनी चाहिए। अतः अब मुझे तरीकन मौन हो जाना चाहिए। 
   चैतन्य रहिये ..... खुश रहिये

द्वारा :- एक प्रबुद्ध पाठिका ( s.d.g.) 



द्वारा :- एक प्रबुद्ध पाठिका ( s.d.g.) उनकी रिक्वेस्ट पर उनका नाम गोपनीय रखा गया है . 

( यदि आपके पास भी कोई अच्छा सा लेख हो तो उसे मुझे मेल ashunao@gmail.com  पर भेज सकते है . ) 



रविवार, 17 जनवरी 2016

STRANGE HOUSE : UNCLE'S FLOWER POT


"घास वाले अंकल"


प्रिय मित्रो .. आपको मेरी के पुरानी  POST  याद होगी लडकी जो भगवान खाती थी ..उसमे मैंने बताया था कि वो घर सच में अजूबा था .. कुछ ५ MEMBER  थे परिवार में और सब विलक्ष्ण .... आज परिवार के मुखिया ..यानि अंकल जी कहानी ..वैसे वास्तविक मुखिया तो औंटी जी थी 
.
अंकल जी सरकारी महकमे किसी छोटी पोस्ट पर थे .. सीधे साधे गौ जैसे ... उनके PERSONALITY  का वर्णन करने में मेरी लेखनी सक्षम नही है इसलिए उनके व्यक्तिव को रहने देते है सीधे STORY  पर आते है ..

उनकी छत पर कुछ गमले रखे थे ...उन गमलो कभी फुल रहे होंगे पर इन दिनों सूखे थे ..उसे गमले में न जाने कहाँ से घास उग आई . यह दूब थी जो काफी लम्बी होती है .. गमले में दूब बढती रही बढती रही और इतनी बढ़ी की रेलिंग से लटकने लगी . आम तौर पर लोग अपने बगीचे से दूब को खर पतवार समझ कर निकलते रहते है पर .. अंकल जी की सोच .. उनका नजरिया ..माशा अलाह ..
.
मैंने एक दिन अपने कमरे से देखा अंकल जी नहाने के बाद उपर गमले में पानी डालने गये है ... कुछ दिनों में पता चला कि दूब की तेजी से बढने के पीछे अंकल जी मेहनत है उसको खाद पानी दे कर अंकल जी तेजी से बड़ा कर रहे थे ..

दूब सच में बहुत ज्यादा बड़ी हो गयी थी ..वह रेलिंग से लटक कर बहुत  नीचे  आ गयी थी . एक रोज मैंने अंकल जी कहा कि बहुत लम्बा पौधा हो गया है लगता है WORLD RECORD बनेगा..”..मै उसे दूब कहकर  अंकल जी FEELINGS HURT  नही करना चाहत था . अंकल जी मुग्ध हो गये और बगैर कुछ बोले रेलिंग से लटकती दूब को सहलाने लगे .

उनका घर तो छोटा ही था पर कमरे कई थे ...औंटी जी किसी भी कमरे में हो उनमे खास शक्ति थी ..उनके कान बहुत तेज थे  . अंदर से बोली ...तुम भी आशीष मजाक कर रहे हो ...फालतू में घास बढती जा रही है ..मै किसी दिन उसको हटाने वाली हूँ ..” . बस इतना कहना था कि अंकल जी अपने दुर्लभ रूप नजर आये .. इतनी जोर से चिल्लाये कि घर के पीछे पीपल से २ ३ कौवे उड़ के भाग खड़े हुए .... उस दिन अंकल जी औंटी को बहुत सी बाते सुनाते हुए  सख्त हिदायत दी कि खबरदार उस पेड़ ( दूब)  को हाथ भी लगाया . वैसे तो औंटी जी की हमेशा चलती थी उस घर में . पर उस रोज अंकल जी का गुस्सा देख लगा कि मर्द कितना ही मरगिल्ला हो ..दब्बू हो .. उसको कभी अंडर वैल्यूएशन नही करना चाहिए .

मै वहां लगभग २० महीने रहा ..दूब बढती रही ..गर्मी में जब धुप बहुत प्रबल होने लगती उस गमले को जुट के टुकड़े से ढक कर रखा जाता .. दूब छत से लटक नीचे जमीन पर आ कर फैलने लगी थी .

अगर आप यह कहानी पच न रही हो तो दोष मेरा नही है ... वो पूरा घर ही विलक्ष्ण था ... वैसे आप सोच रहे होंगे कि दूब का अंत में हुआ क्या ? तो आप जिज्ञासा शांत कर दू ..
उनके घर को छोड़ने के कुछ महीनों बाद जब मै उधर गया तो देखा कि उनके घर में घास रेलिंग पर नही लटक नही रही है . अंकल ने  बातचीत में उस पौधे के दुखद अंत .. और गौरवशाली विदाई के बारे में बताया ( वो कहानी फिर कभी ..) 


मंगलवार, 12 जनवरी 2016

when people become stone ! funny story

जब लोग पत्थर के बन गये                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                चाट बेचने वाले की दुखद कहानी याद है . मैंने बताया था उस घर में सैकड़ो stories छुपी है . अचानक ये याद आ गयी . अमूमन पढाई करने वाले लडके देर रात तक पढ़ते है और सुबह देर से उठते है . एक morning जब सोकर उठा तो पाया मोहल्ले के women का जमघट सुबह ही लग गया है . आम तौर पर यह दोपहर में खास तौर पर जब light चली जाती थी तब लगता था . ये ऐसी चौपाल होती थी जिसमे महिलाये अपने घरो के बाहर बनी staris पर बैठ कर गप्पे लड़ाया करती थी .
जब बाहर निकला तो बगल वाली चाची ने तुरंत ही टोक दिया कैसे घोड़े बेच कर सो रहे थे . night में कितनी आवाज लगाई पर तुम उठे ही नही . मैंने पूछा कि क्या हुआ था . तो चाची ने कहा कि night में लोगो के फ़ोन आये थे कि सोना मत आज रात में बारह बजे सब लोग पत्थर बन जायेगे , इसलिए सब लोगो ने अपने अपने relatives को फ़ोन करके बता रहे थे कि सोना मत . सारी लोग जागते रहे . बहुत से लोग बाहर सडक तक चले गये थे . उनकी बात सुनकर मुझे बहुत हसी आयी लगा कि joke कर रही है . but she was right .
मेरी आदत रात में फ़ोन  switch off करके सोने कि है . फ़ोन on किया तो कई लोगो के message  पड़े थे . कुछ ही देर में एक दो फ़ोन आ गये कि रात में वो जगाने के लिए फ़ोन किया था . मैंने कहा शुक्रिया . मैंने पूछा कि कोई पत्थर बना कि नही . वो भडक गये  कि तुम से तो बात करना ही बेकार है .
खैर  धीरे धीरे पता चला कि सारी रात हंगामे में कटी थी . चाहे kanpur हो या delhi , गोरखपुर , नोयडा लगभग सभी जगह लोग सारी रात जगते और जगाते रहे . ये खबर पेपर में भी आयी थी .
दिमाग में कुछ चीजे यूँ ही याद रह जाती है , इस खुराफात की शुरुआत कहाँ से हुई थी यह आज भी राज है मुझे पता नही किसने बताया था कि ये सारी कलाकारी शुक्लागंज से शुरू हुई थी पर यह जरूरी नही कि सच ही हो . 

सोमवार, 4 जनवरी 2016

STORY OF YO YO HONEY SINGH IN HINDI

 महान कवि शहद सिंह के लिए


नया नया LAPTOP  लिया था।OFFICE से आने के बाद एक सूत्री कार्यक्रम था एक दो HOLLYWOOD  की मार धाड़ ACTION  वाली मूवी देखना। एक दिन मकान मालिक का लड़का १६ बर्ष का लड़का ROOM आ गया उसने बोला मेरे पास फिल्मो का बहुत अच्छा COLLECTION है मुझसे ले लो। झट से वो अपनी PEN DRIVE  में सामग्री ले आया।

उसने कहा मै तुम्हे एक चीज दिखाऊ और उसने एक SONG फुल आवाज में बजा दिया उसने कुछ और गाने बजाए। १० या १५ मिनट बाद मुझे लगा मेरे लैपटॉप के SPEAKER  से ठीक से आवाज नही आ रही है। तब उसने ये बताया ये सारे गाने यो यो शहद सिंह के है। मुझे बहुत गुस्सा आ रहा था।  १६ बर्ष के किसी महानगरीय लड़के से ज्यादा ज्ञान किसी को नही होता है उसने यह लैपटॉप के स्पीकर खराब करने वाली कला अपने साथियो से सीखी थी। उसने बताया कि यो यो के गानो में बीट बहुत ज्यादा होती है और काफी कुछ TECHNICAL LANGUAGE  में बताया।
खैर उस समय यो यो को नाम धीरे धीरे फ़ैल रहा था। अपनी माँ भी अपने बेटे को गर्व के साथ यो यो के रैप सुनाने को कहती और उनके बेटे ने भी कोर्स की तरह यो यो के रैप रट रखा था वो बगैर मतलब समझे गाने लगता
" तुझे बिठा कर रखा था मैंने रानी पलकों पर
तूने मारी ठोकर समझी आ जाऊंगा सडको पर ..."

हमारे room partner  गुरु जी काफी पहुंचे हुए थे। मेरे शहर में कोई स्टार के कार्यक्रम होते तो उसके free  पास उनको जरूर मिल जाते। गुरु जी इस तरह के कार्यक्रमों में जाते नही थे। शहर में पता चला यो यो आ रहे है।  गुरु ने राहुल से वादा कर लिया कि वो पास जुटा लेंगे।  यो यो आये पर गुरु जी को पास   न मिल सके।  उस दिन मुझे अहसास हुआ कि यो यो वाकई बहुत ज्यादा popular  है।

मंगलवार, 29 दिसंबर 2015

story of childhood

परम उपद्रवी बद्री


कुछ लोग जन्मजात प्रतिभा के धनी ( born talented )  होते है। बद्री को भी ऐसा माना जा सकता है। बद्री हम उम्र के थे और बहुत ही हुनर मंद। गावं में ऐसा कोई काम न था जो बद्री न कर पाये।  कुएं में गिरी बाल्टी को निकलने से लेकर कैथे के पेड़ पर चढ़ने तक हर काम ने दक्ष थे। बद्री भी अपने गोलू के तरह अकेले बेटे थे पर उनकी कहानी अलग थी।  बद्री दिन में government school   में पढ़ने के बाद शाम को अपनी भैंसे भी खेतों को चराने के लिए ले जाते थे।  शाम को लौटते वक़्त जब सभी की भैंसे , जानवर तालाब से निकलते नही थे तब बद्री ही तालाब में घुसकर सबकी भैंसे निकलते थे।

अगर किसी बिजली के खम्बे का बल्ब fuse  हो गया तो बद्री ही खम्बे में चढ़कर उसे सुधारा करते थे। अब इतनी अच्छी  बातो के बावजूद भी उनको परम  उपद्रवी को दरजा भला क्यू मिला था . उसके पीछे थे गावं के कुछ बुजुर्ग।  मेरी समझ में नही आता था बद्री को उनमे क्या खुरापात नजर आती थे।
गांव में जब नौटंकी / राम लीला   होती तो बद्री शाम को ही अपनी , अपने पड़ोसियों की पल्ली, बोरे, चटाई आदि लेकर पहुंच जाते थे। जब तक मै गांव में रहा बद्री की चटाई सबसे आगे ही बिछती रही। गांव में रामलीला भी हुआ करती थी। मै भी देखने जाता था अक्सर वहां जाकर सो ही जाता था। अपने बद्री ही,  जब धनुष टूटने वाला होता था सबको पानी डाल कर जगा देते थे।

रविवार, 30 अगस्त 2015

famous stories of premchand in hindi ( FOR UPSC )

मंजूषा : प्रेमचंद की सर्वश्रेस्ठ कहानियाँ ( अम्रतराय द्वारा सम्पादित ) 



  1. कफन 
  2. पूस की रात 
  3. बूढी काकी 
  4. ईदगाह 
  5. गुल्ली डंडा 
  6. बड़े घर की बेटी 
  7. सदगति 
  8. निमंत्रण 
  9. सभ्यता का रहस्य 
  10. अल्गोझ्या 
  11. नया विवाह 
  12. रानी सारंधा 
  13. शतरंज के खिलाडी 
  14. मुफ्त का यश 
  15. दूध का दाम 
  16. गिला  

' कहानी में नाम और सन के सिवा और सब कुछ सत्य है , और इतिहास में नाम और सन   सिवा  कुछ भी सत्य नही  ' 
' हर एक काल्पनिक रचना में मौलिक सत्य मौजूद रहता है। " 

प्रेमचंद ने अपनी कहानीयों  में किसी न किसी मनोवैज्ञानिक रहष्य को खोलने का प्रयास किया।  वह कहानी के माध्यम से सत्य , निस्वार्थ सेवा , न्याय आदि देवत्त्व के जो अंश है वो जगाना चाहते थे।  वह मानते थे कि  सांस्कृतिक विकास  के लिए सरल साहित्य उत्तम कोई साधन नही है। इस लिए उनकी कहानियों में भाषागत सरलता है। सरल शब्द , सरल वाक्य -विन्यास , इसके चलते वह अपने पाठको से सहजता से संवाद कर पाते है। भाषा सरल , सजीव और व्यवहारिक। अंग्रेजी , फ़ारसी तथा उर्दू के प्रचलित शब्दों का प्रयोग। भाषा का सटीक , सार्थक और व्यंजनपूर्ण प्रयोग।

  • अधिकतर कहानियों में निम्न व माध्यम वर्ग का चित्रण
  • विषय और शिल्प की विविधता 
  • किसान , मजदूर , दलित  आदि की समस्याओ का मार्मिक चित्रण 
  • युग प्रवर्तक रचनाकार 
  • पात्र  अक्सर वर्ग के प्रतिनिधि के तौर पर आते है 
  • हिंदी कथा साहित्य को मनोरंजन के स्तर से उठाकर जीवन की अनुभूितियों से जोड़ते है








मंगलवार, 9 जून 2015

वो भूरी आखो वाला लड़का

वो भूरी आखो वाला लड़का

HIGH SCHOOL  में मेरे सबसे कम अंक ENGLISH  में आये थे और इंटर में सबसे ज्यादा अंग्रेजी में तो इसकी वजह मेरे अंग्रेजी के सर थे जिनके पास मैंने अंग्रेजी की कोचिंग की थी। ये वो दौर था जब मुश्किल  से लोग प्रथम पास होते थे। सारा साल मै कहता रहा कि अंग्रेजी में कोई ५० अंक से ज्यादा लाये  तो वो RECORD तोड़ देगा।
लघु कथाः गिरगिट
जब रिजल्ट आया तो मै सेकंड डिवीज़न पास हुआ पर मेरे अंग्रेजी में ६८ मार्क्स थे और ये सारी क्लास में सबसे ज्यादा था। सच कहु जैसा कि सर ने बताया इतने अंक पिछले कई सालो में नही आये थे। मै इसे अपने सर का आशीर्वाद ,मानता हूँ। मेरे वो आइडियल थे मुझे साहित्य में रूचि  उनसे ही पैदा हुई थी। मौरावां की LIBRARY  में कितनी ही शाम नावेल   गुजरी थी।
अगले साल सर ने  अपनी कोचिंग में इसके लिए मुझे PRIZE  दिया गया। यह के कांच के बॉक्स में  क्रत्रिम फूल थे।  उन दिनों यही GIFT चलते थे। जब मैने गिफ्ट ले कर वापस बेंच में आकर बैठा तभी किसी ने बोला “ बेटा , तुमने बस एक अंक से   मुझे पिछाड़ दिया , वरना ये प्राइज मेरा था। “ ये वो लड़का था जो सारा साल TEST में TOP   करता रहा पर असली एग्जाम में सिर्फ १ अंक से हार गया था। उसकी आँखे भूरी थी। गोरा था। उसकी WRITING बहुत अच्छी थी। हमेशा अपने आप को अच्छा दिखाने की कोसिश करता था। शायद जब वो ११ कक्षा में था   तभी से टूशन पढ़कर खर्च निकला करता था। उन दिनों सब गरीब थे चाहे हम हो  या वो।

इंटर करने के बाद मै दूसरी जगह चला आया और सारे दोस्त खो गए। बस कभी कभार किसी से कुछ पता चल जाता तो अच्छा लगता। मै उसे अक्सर मिस करता वजह शायद उसकी पतिद्वन्दिता थी। ये जानने का मन होता कि वो कहा होगा और क्या करता होगा।
FOR UNSUCCESSFUL PERSON
आप ने मेरी एक पुरानी पोस्ट पढ़ी होगी “आप एक्सेल के बारे में क्या  जानते है” जिसमे मै डेल्ही में एक पुराने दोस्त में मिलता हूँ काफी सालो के बाद। वहीं मुझे कुछ पता चला उस भूरी आँखो वाले साथी के बारे में। जिस दोस्त के पास रुका था वो उस लड़के का बहुत करीबी था उसने मुझे यूँ पूछा कि  तुम्हे वो याद है ? मै बहुत बेकरारी से बताया मै उसे बहुत याद करता हूँ। सच कहु मुझे उसकी बातें बहुत याद आती थी।पर उसके आगे की कहानी जानकर मुझे बहुत गहरा झटका लगा। दिमाग शून्य पड़ गया।

आगे की कहानी जैसा मेरे दोस्त में मुझे बताया

इंटर करने के बाद भूरी आँखो लड़का , KANPUR अपने भाई के पास चला गया। जहाँ वो दोनों भाई टूशन पढ़ा पढ़ा कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए जूझ रहे थे। मेरा सहपाठी पहले से ही बहुत खूबसूरत था पर कानपुर आकर वो और भी ज्यादा निखर गया। कसे मसल , भूरी आँखे , घुंघराले बाल और बहुत बहुत गोरा रंग। मतलब कि उस पर कोई भी लड़की फ़िदा हो सकती थी। जैसा कि दोस्त ने बताया वो अब बदल चूका था अब वो बहुत स्मार्ट लगता था और उन चीजो में पड़ गया जिनमे नही पड़ना चाहिए।

एक रोज DELHI वाले दोस्त , के पास ये भूरी आँखो वाला , एक विवाहित महिला ( उससे करीब १५ साल बड़ी ) को लेकर पहुंच जाता है , इस गुजारिश के साथ कि उससे कुछ रोज रुकने दे। ये क्या हुआ , कैसे हुआ और क्यों हुआ इसके जबाब कभी नही खोजे जा सकते है। बस प्रेम हो जाता है वरना जिस लड़के के पीछे खूबसूरत से खूबसूरत लड़कियां पीछे पड़ी हो वो अपने से उम्रदराज , शायद २ या ३ बच्चो के माँ के साथ प्रेम क्यों करेगा। उसने फसा लिया , फस गया , भगा लाया , भाग आया कुछ भी समझो बस दोस्त दरवाजे पर खड़ा था और मदद करनी ही थी। इस तरह के केस में पोलिस में केस भी दर्ज होता है। उधर उसका पति , उस महिला के बच्चे परेशान रहे होगे। मै बहुत हैरान था यह सब जानकर मुझे यकीन नही हो रहा था। हम दोनों ने कुछ अनुमान भी लगाये।
इलाहाबाद : पूर्व का आक्सफोर्ड वाला शहर
मसलन उस औरत का पति  पत्नी को TIME नही देता रहा होगा। ये शायद उसके बच्चो को पढ़ाता था। जहाँ तक उनके घर पर ही किराये पर रहता था। दुःख दर्द बाटते बाटते करीब आ गयी होगी। LOVE IS BLIND मुझे उसकी कहानी सुनकर महसूस हो रहा था। कोई सामाजिक नियम की परवाह नही , समझ नही आता था कि उन दोनों ने अपने पीछे छोड़े गए संसार की CARE क्यों न की।
जैसा कि अंदेशा था एक रोज पोलिस आयी उन दोनों को वापस कानपुर  ले गयी। वो भूरी आँखो लड़का बहुत जिद्दी और क्रोधी था। शायद किसी ने उसको कोई ताना मारा होगा। उसने फिनायल पी ली। जब उसकी तबियत बिगड़ी तो उसे HOSPITAL में भर्ती कराया गया। वो डेल्ही वाला लड़का , ENGLISH वाले सर सब लोग उसको अस्पताल  मिले और खूब समझाया। लड़का ठीक हो कर घर आ गया। पर कुछ रोज बाद  फिर उसने फिनॉल पी और इस बार बच न सका।
घटनाओ में कुछ इधर उधर  हो सकता है क्युंकि किसी तीसरे से सुनी है। यह SUICIDE की तीसरी घटना है जिसको मैंने शेयर किया और पहले भी लिखा था कि आत्महत्या करने वालों के साथ उनके राज चले जाते है बाकि सिर्फ अनुमान और कयास लगाये जाते है। मै स्तब्ध इसके बारे में सुनता रहा जब मैंने FEEL किया कि अब वो भूरी आँखो लड़का से कभी मुलाकात न हो पायेगी मुझे बहुत दुःख हुआ।  


एक प्रेरणादायक विचार

© आशीष कुमार    

गुरुवार, 21 मई 2015

जयपुर में एक दोपहर

गर्मी के  सीजन में अगर आप का टिकट कन्फर्म है तो बहुत सकून की बात है पर आपकी यात्रा के एक सप्ताह पहले आपका प्लान बदल कर कुछ दिन पहले जाना पड़ जाय तो .....
जाना २९ अप्रैल को था . ट्रेन में वातानुकूलित टिकट कन्फर्म थी पर कुछ वजह ऐसी बनी कि २५ अप्रैल को ही निकलना पडा . लम्बे समय बाद घर जाना हो तो समान भी काफी होता है . प्लेन के टिकट वैसे तो काफी सस्ते हो गये पर उसमे में अंतिम समय में टिकट लेने का मतलब अच्छा खासा खर्च .
इधर गुजरात , राजस्थान , देल्ही में स्लीपर  बसो  का खूब चलन है . रेड बस से टिकट बुक करायी और रात में १० बजे जयपुर जाने वाली एक बस में बैठ गया . सुबह ११ बजे जयपुर में था . यहाँ से शाम 7 बजे बस थी  कानपुर के लिए . इसलिए जयपुर में मेरे पास काफी समय था घूमने के लिए . फेसबुक से काफी मित्र जुड़े है जयपुर के , बहुत लोगो ने जयपुर आने के लिए  बोला भी था पर जब वक्त आया तो मेरे पास किसी का नंबर मौजूद नही . कुछ दिनों से जयपुर के एक  मित्र से बात भी हो रही थी पर मेरी लापरवाही , उनका नंबर सेव नही किया . काफी खोजा पर .......
गर्मी बहुत थी सामान भी काफी था . मै वहां उतरा था जहाँ पोलो विक्ट्री है . पास में एक शाकाहारी भोजनालय था . उस दोपहर मै बहुत स्वादिस्ट खाना खाया . १५० रूपये में अच्छा खासा खाना था . काफी दिनों बाद दाल मखानी  खायी बहुत लजीज थी .
अब कहाँ जाऊ , हवामहल के लिए बस जा रही थी पर गर्मी में हिम्मत न हुई . पास में पता किया कोई सिनेमाघर हो तो फिल्म ही देख लू . किसी ने राज मंदिर का नाम लिया तो मुझे कुछ याद आ गया , मैंने बचपन में इसके बारे में कुछ पढ़ा था शायद यह भारत का सबसे खुबसुरत सिनेमाघर है .
वहां भी नही गया क्युकि पता चला कि पोलो विक्ट्री , जहाँ मै था वो खुद एक सिनेमाघर था . सिंगल स्क्रीन में बहुत दिन बाद पिक्चर देखने जा रहा था . इस सप्ताह  बहुत बकवास फिल्म रिलीज हुई  थी . फिल्म लगी थी इश्क के परिंदे   . उसका पोस्टर देख लगा राजस्थानी फिल्म है  .
फिल्म की टिकट २. ३० बजे मिलनी  थी पर अभी १ ही बजा था . उपर कोई भी नही था . इतना सन्नाटा ..... एक चेयर खाली पड़ी थी . थिएटर शायद उपर था . मै नीचे ही हाल में अकेला बैठा था . रोमिंग में होने की वजह से किसी से फ़ोन पर बात करके भी  टाइम  नही काटा जा सकता था . व्हाट एप तो चल रहा था पर वहा भी कोई नही था ..जब मै किसी को वक्त नही देता तो भला मेरी बोरियत को कौन मिटाए . पर मुझे चरित्र मिल ही जाते है . कुछ लोग धीरे धीरे आने लगे थे . तभी मैंने कुछ सुना साला आज १५ , २० साल बाद फिल्म देखने आया हूँ .”  मै समझ गया आ गया कोई आस पास है जो अपने मतलब का है . पास में ही दो लोग खड़े थे . एक कसे बदन का ३५ – ३६ साल का इन्सान था . मैंने भी बात करने की गरज से पूछा “ऐसा क्या हुआ जो अपने  इतने सालो से पिक्चर नही देखी . बस उस बातूनी आदमी को छेड़ने ने की जरूरत थी वो शुरू हो गया और तब तक शुरू रहा जब तक हम सिनेमाघर के अंदर नही गये .
वो पहले CISF में जॉब करता था . फिर जॉब छोड़ थी . अब कोई कोचिंग चला रहा था और ठेकेदारी शुरु करने वाला था .  आज मुझे माफ़ करना वजह उस इन्सान के व्यक्तित्व को दिखाने के लिए मुझे कुछ सीमाये तोडनी पड़ेगी .
सिनेमाघर में शा  4 -5   जोड़े भी फिल्म देखने आये थे . उसमे हैरानी की बात बस इतनी थी कि महिलाये शादीशुदा थी और उनके साथ जो लड़के थे वो बहुत कम उमर के  थे . यह दूर से ही समझा जा सकता था कि वो सब पति पत्नी नही थे .  बातूनी आदमी इस बात को बहुत नोटिस कर रहा था . वो सारा ज्ञान दिखाने लगा . उसने बताया कि अमुक शहर में इससे ज्यादा ऐसा चलन है ... फिर उसने कुछ और ज्ञान बताया जैसे केरल की महिलाये का चेहरा अच्छा होता है पर रंग काला और जम्मू – कश्मीर की तरफ  रंग साफ होता है पर चेहरा लोटे की तरह होता है पूर्व में तो परी जैसी लड़कियाँ  रहती है ..बस कयामत ..मुझे उसके सारे शब्द नही याद आ रहे थे पर उसका ये ज्ञान मुझे बहुत मजेदार लग रहा था . वो इस जगहों पर जॉब कर चूका था . उसने बोला उधर असम में जहाँ परी जैसी लडकियाँ रहती है वहां कोई चक्कर नही शुरु कर सकते वरना तुमको उनसे जबरदस्ती शादी करनी पड़ेगी और यह मत सोचना कि शादी के बाद उनको  तुम अपने घर ले आओगे . मैंने पूछा की अपने यहाँ का भी कुछ बता दीजिये तो बातूनी आदमी में तुरंत बोला अपने यहाँ सब मिक्स है . बातूनी आदमी अपने पुरे रंग में था . इतना रोचक बाते कि मेरे आस पास करीब ५ -६ लोग घेरा बना कर खड़े बात सुनने लगे .  अब सारी  बाते बताने लायक नही है .
जब टाइम हो गया तो हम सभी सीढियों पर चढ़ कर उपर गये . उपर जो गैलरी थे वो बहुत ही भव्य थी . अपने जवानी के  दिनों में यह सिनेमाघर भी क्या लगता रहा होगा . न जाने कितनी ही प्रेम कथाये इसमें पनपी होंगी . चोरी चोरी कितने ही इश्क के परिंदे इस खुबसूरत सिनेमाघर में प्रेम के दाने चुगे होंगे .
 उपर भी बातूनी आदमी शुरु था . जहाँ वो कपल थे उनके पास जाता और जोर जोर से कुछ सुनाता . ऐसा लग रहा था कि वो जो चोरी से फिल्म देखने आये थे उनको और नर्वस करना उसको बड़ा आनंद दे रहा था। मुझे अक्षय कुमार पर फिल्माया वो गाना  याद आ गया “ लड़की देखी मुँह से सिटी बजी हाथ से ताली
Ladki dekhi munh se seeti baje haath se taali - 2

Saala aila usma aiga pori aali aali.......

Chaahe Ghadwaal ki ho, ya Nainitaal ki ho

Chaahe Punjab ki ho ya phir Bangaal ki ho

Lovely haseen koi bheed se dhoondenge - 2
Not permanent, temporary dhoondenge re “


. अन्दर जा कर मुझे कुछ और भी पता चला . अंदर जो बातूनी टाइप, सिटी बजाने वाले आदमी थे उनको हाल के एक तरह बैठाया गया और जो कपल थे उनको दूसरी तरफ  सबसे पीछे . शायद हाल वाले कपल की भावनाए समझते थे .
पोस्ट काफी लम्बी हो चुकी है इसलिए इसे यही से खत्म समझ सकते है बाकि मेरी स्टाइल तो पता ही है ....मेरी कहानियाँ कभी पूरी नही होती .....

© आशीष कुमार ( पिछले दिनों मेरी पोस्ट चुरा कर किसी ने अपनी बता कर पोस्ट की है ...कृपया ऐसा न करे . आप जैसे कुछ लोगो की वजह से लिखने का मन नही होता है ....काफी दिनों बाद कुछ लिखा है .....आशा है पसंद आयेगा  )


गुरुवार, 12 मार्च 2015

A sad story of a poor man in Hindi

वो चाट बेचने वाला आदमी


पिछली बार जब भाई के पास उसके कमरे पहुंचा तो पता चला पड़ोस में एक नए किरायेदार आये है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के दौरान  पहले मै वहां रहता था फिर मेरे बाद मेरे भाई रहने लगे। लगभग हमारे पास वो कमरा ७ सालो से है। कितने ही किरायेदार आये और गए।

इस बार पता चला कोई  नया परिवार आया  है। पति , पत्नी और दो बेटे थे। एक तो बस १० या १५ दिन का ही था। दूसरा ३ साल का। उनका बड़ा बेटा बहुत जल्द ही सारे महल्ले का प्रिय बन गया। बहुत शरारती था। आम तौर पर अपनेकमरे पर किसी को अंदर आने की इजाजत नही देता हूँ , वजह पढ़ाई में  व्यवधान होता है पर ये लड़का डरता ही नही था। अक्सर कमरे में आ जाता।

कुछ ही दिन रुकना था पर उस परिवार के बारे में बगैर बात किये ही काफी बाते पता चल गयी  । पत्नी , सुंदर थी और काफी तेज,चकड़  भी। पति भी गोरा  था , सीधा था और घुन्ना भी ( जो कम बातचीत करे ) . अक्सर उनके कमरे से जोर जोर आवाज आती जिनसे यही पता चलता कि वो अपने पति की कमाई से खुश नही है। शायद परिवारिक कलह इसे ही कहते है।

पति शहर किसी फैक्ट्री में काम करता था। शायद उसे २०० रूपये मिलते थे। जब उनके घर झग़डा बढ़ने लगा तो पति ने सोचा अब अपना धंधा करुगा। कुछ रोज बाद , भाई ने मुझे बताया कि ठेलिया आ गयी है। पड़ोसी अब आलू पापड़ी बेचेंगे।  मै भी उत्सुकतावश उस ठेलिया को  देखने गया।

अपनी मकान मालकिन (दीदी) से लगभग सारी बाते पता चलती रही। पता चला कि  अब वो आदमी चाट बेचेगा।  हमारे शहर में , एक नई तरह की सुबह सुबह चाट बिकती है , उबले चने , उबले आलू ,खट्टी चटनी और पापड़ी। अच्छा स्वाद होता है। कभी आना तो चखना जरूर।

जिस रोज वो आदमी अपनी ठेलिया लेकर चाट बेचने निकला। घर के सभी किरायेदारों ने उसके धंधे की शुरुआत करायी।  १० रूपये में एक पत्ता बिक रहा था। वो आदमी अपनी ठेलिया रेलवे स्टेशन  ले गया।

शाम को सब लोग खास तौर पर मकान मालकिन ने उससे जानना चाहा कि कितने का धंधा हुआ ? पता चला कि  उसके ५०० रूपये बचे है। अब सब अच्छा था। अच्छी आमदनी  होने लगी थी फिर भी उनके घर में चीजे बिगड़ रही थी।

अब उस  आदमी को घर में सुबह जल्दी उठना पड़ता। उसके साथ उसकी बीवी को भी उठना पड़ता था।  सुबह आलू, मटर और पापड़ी तैयार करनी पड़ती थी। अक्सर दिन में वो तेज महिला आँगन में कुकर और बर्तन धोती और भुनभुनाती रहती थी।

मेरा उनसे कभी भी INTERACTION नही हुआ पर उनका FUTURE मुझे दिखाई सा पड़ रहा था। एक रात , बहुत जोर से उस महिला की आवाज सुनाई पड़ी। धीरे धीरे कुछ और किरायेदार बाहर निकले। उपर दीदी के पास वो महिला अपने बड़े बेटे के साथ कुछ जोर जोर आवाज में कह रही थी। जब बर्दाश्त से बाहर शोरगुल होने लगा तो मुझे भी बाहर निकलना पड़ा। मुझे दूसरे दिन सुबह ५ बजे  LUCKNOW पेपर देने जाना था।

उपर जाकर देखा तो पता चला उनके बड़े बेटे ने अपने नाक में मटर का दाना डाल लिया था। उस रात बहुत हंगामा हुआ। उसका पति , चुपचाप कमरे में सो रहा था। इधर पत्नी इसी बात का हंगामा कर रही थी कि बेटा चाहे मर जाये पर वो इंसान उठेगा नही। 

कुछ रोज बाद मै वापस अपनी JOB में लौट आया। आते वक़्त पता नही क्यू पर भाई से बोल कर आया कि इसकी पत्नी बहुत तेज है कहीं ऐसा न हो कि उसका घुन्ना पति SUICIDE न कर ले। भाई ने समझा मजाक कर रहा हूँ पर  मुझे कुछ चीजे कभी कभी आभास होने लगती है। अभी खुद UNMARRIED  हूँ पर दुनियादारी की बहुत गहरी समझ है। मुझे दूर से उनके घर की हकीकत नजर आ रही थी। 

एक रोज जब मै ऑफिस रात में लौट कर घर आया तो भाई का फ़ोन आया कि आप सही थे। उस चाट वाले ने POISON खा लिया। भाई भी गावं में था उसके पास मकान मालकिन का PHONE आया था। उस रोज घटना कुछ इस तरह घटित हुई। 

सुबह वो आदमी अपनी ठेलिया ले कर निकला। आदमी थोड़ी देर बाद ही घर लौट आया।  चाट तो बिकी नही थी तो उसे सारी गाय को खिला दी। घर आकर बीवी से न जाने के किस बात पर झग़डा शुरू हुआ। थोड़ी देर बाद वो आदमी बाहर निकल गया। पास की रेलवे लाइन की पटरी के साथ चलता शहर से बाहर निकल गया। वही बैठ कर उसने शराब पी साथ में कोई जहर भी खा लिया। उसने उधर से अपनी पत्नी को फोन किया। पहले तो उसकी बीवी को मजाक लगा पर कुछ देर बाद आस पास के लोग उसे लिवाने गए। अगले कुछ घंटो में वो चाट बेचने वाला आदमी , इस WORLD से हमेशा  के लिए जा चुका था। 

… गलती किसकी थी ? यह कह पाना मुश्किल है हम भी आप की तरह बाहर से चीजो को जाना और कानो सुनी चीजो के आधार पर कहानी विकसित की पर एक बार आप उस WIDDOW के आगे के जीवन पर नजर डाले , दो छोटे बच्चे---------. वैसे तो कभी CASTE का उल्लेख नही करता यहाँ भी नही कर रहा हूँ पर अगर आप को लगता है यह कोई ऐसे वैसे की कहानी है तो आप गलत है , वह उत्तर भारत की सबसे अच्छी मानी /समझी  जाने वाली जाति /समुदाय से थी। 

कुछ आप भी निष्कर्ष निकालिये। वो महिला सच में सुंदर थी और काफी तेज थी शायद उसके सपने कुछ ज्यादा  ही बड़े थे। आदमी भी सुंदर था ,  गरीब था पर वो हाई फाई नही था। चीजे कैसे बिगड़ती है आप समझ सकते है। 

© आशीष कुमार ,  

शनिवार, 3 जनवरी 2015

PART: 3 सफेद सूट वाली लडकी ?

PART: 3

सफेद सूट वाली लडकी   ?


मुझे पता नही क्या हुआ और मैंने ऐसा DECISION क्यू लिया बस  उस SATURDAY  कॉलेज से लौट कर घर जाने का मन न हुआ।  दिल ने कहा  ये घुटन भरी LIFE अब मै नही जी सकती।  एक ऐसी जिंदगी जिसमे मेरी कोई सहमति नही बस मॉम , डैड की मर्जी के अनुसार चलना। मै क्या करना चाहती हूँ उन्होंने कभी जानना ही नही चाहा।  दिल ने कहा  बस  इस उबन भरी जिंदगी से कही  दूर चली जाऊ जहां मै अपनी शर्तो पर जी सकु , 
स्कूटी STAND पर ही लगी रहने दी।  ऑटो पकड़ कर RAILWAY STATION चली गयी। मुझे पता नही था जाना कहा है।  बस पहले प्लेटफॉर्म पर पहली जो गाड़ी खड़ी थी उसी में चढ़ ली।  COACH के बाहर मैंने ऐसे सीट देख ली थी जहाँ  आसानी से कुछ देर बैठा जा सकता था।  मेरे पास TICKET नही था और चालाकी क्या होती है जानती भी नही पर जब आप अपनी धुन में होते है रास्ते अपने आप सूझने लगते है।  

सीट पर जाकर देखा एक लड़का बैठा था। मुझे देखते ही उसने  मेरे लिए आधी  सीट छोड़ दी।    ज्यादा तो नही पर मुझे इतनी समझ तो  आ  ही गयी थी कि  चिपकू लड़को से कैसे बचा जाय।  सीट पर बैठने से पहले अपना APPLE PHONE कान में लगा कर झूठे ही  फुसफुसाने लगी। इससे दोहरा असर होता एक उसको मुझसे जान पहचान करने का अवसर न मिलता दूसरा मै जताना चाहती थी कि  वो मेरे फ़ोन का SILVER C  वाला एप्पल का लोगो देख ले और समझ ले कि मै  कोई मामूली लड़की नही हूँ। आप सोच रहे होंगे मै किस तरह की लड़की हूँ।    आप मुझे गलत मत समझईये प्लीज जो सच्चाई है वही  बता रही हूँ।  
ये मेरी उम्मीद से परे  थे मुझे सीट पर बैठे ५ मिनट हो गए थे अभी तक उस लड़के ने  एक  बार भी  मेरे चेहरे पर नजर नही डाली थी।  मै अब अपने फ़ोन पर गेम खेलने लगी थी।  मै  चाहती थी कि  मै  व्यस्त दिखू  ताकि वो मुझसे चिपके नही। वो  अच्छी कद और शक्ल  का था।  उसकी एथलेटिक बॉडी को देख कर ऐसा  लगा   कि  किसी आर्मी या पोलिस में जॉब करता है।  कॉलेज के लड़को जैसा नही था।  कोई फैशन नही जैसे किसी छोटे शहर का हो।  मैंने एक  दो बार जब भी चोरी से उस पर नजर डाली वो मेरी ड्रेस  को घूर रहा था। वैसे मेरी ड्रेस घूरने लायक थी आज कॉलेज में BEAUTY CONTEST  था।  उसके लिए मैंने  वाइट कलर का FROCK SUIT पहना था। मेरी ड्रेस इतनी अच्छी थी कि  मै  बता नही सकती।  आम तौर पर मै  JEANS TOP पहनना पसंद करती हूँ।  मै  कम्पटीशन में जीत गयी थी।  मन में इतनी उलझन थी कि DRESS  चेंज किये बगैर मै  अपनी उस जिंदगी से भाग ली।

ये  कैसी उलझन थी ? मै  चाहती थी कि  उसका ध्यान  मेरी तरफ भी  जाये  और  मै  उदासीनता भी दिखा रही थी। उसकी ख़ामोशी अखरने लगी थी।  ट्रैन के कोच की SIDE SEAT पर एक स्मार्ट लड़के एक साथ सीट शेयर कर रही थी और वो लड़का मेरी ड्रेस और बालो में ही उलझा रहे।  मै बात करने के लिए बेचैन हो रही थी।  पागल एक बार मेरे चेहरे पर भी नजर डाल  तो सही मेरी काली गहरी आखो में डुंब न जाये तो कहना।  न जाने कितने लड़को ने मुझसे बात करनी चाही पर मैंने उन्हें कभी भाव न दिया और आज जब मै तुम्हारे बारे में जानने के लिए बेचैन हो रही हूँ तब तू चुप बैठा है। मै  सच में बहुत ज्यादा उत्सुक हो रही थी आखिर ये शक्स है कौन ? 

शायद मै  ही पहल कर उस लड़के से बात शुरू  देती पर तभी  एक और घटना हो गयी।  मेरी  सीट के पास  एक   शख्स आ कर खड़ा हो गया। उसका चेहरा लोहे जैसा सख्त दिख रहा था। BLACK COAT और हाथ में ब्रीफ़केस लिए वो अजनबी किसी विलेन जैसा लग रहा था।  आते ही उसने मुझे सीट से उठा दिया।  मै अपना   बैग उठा कर आगे बढ़ आयी।  मेरे पास कोई विकल्प नही था।  रिजर्वेशन की बात छोड़ो  मेरी पास तो टिकट भी नही थी।  

मुझे  बहुत शर्मिदगी हो रही थी।  उस सहयात्री ने मेरे बारे में क्या सोचा होगा ? मै  कितनी घटिया लड़की हूँ  जो झूठ मूठ  ही उसकी सीट पर अपना अधिकार जता रही थी।  मै कोच में आगे बढ़ आई दरवाजे के पास अपना PHONE  चार्ज करने लगी।  TRAIN में बहुत भीड़ थी।  दिवाली की छुट्टी में सभी अपने अपने घर जा रहे थे।  और एक मै  थी जो अपना घर छोड़ कर जा रही थी।   मै  उस बारे में अधिक सोचना नही चाहती थी।  बस  मैंने जो निर्णय लिया था वो सही था मैंने अपने आप को समझाया।  

रात  के १२ बज रहे थे।  फ़ोन तो चार्ज हो गया था  खड़े खड़े मेरे पैर दुखने लगे थे पर मै  क्या करती मेरे पास उसी जगह खड़े रहने के सिवा  दूसरा विकल्प न था। गाड़ी रुक रही थी शायद कोई STATION आ रहा था।  तभी मैंने देखा मेरा सहयात्री , उस अजनबी साथ मेरी  ओर  चले आ रहे थे।  मै  घूम कर खड़ी हो गयी मै  उसकी नजरो का सामना कैसे करती  ?  

वो दोनों उतर  रहे थे। समझ नही आ रहा था कि  वो दोनों  परिचित है या अपरिचित।  दोनों में कोई बातचीत नही।  बस  अजनबी के पीछे मेरा सहयात्री चला जा रहा था।  मेरी SIXTH SENSE ने कहा  ' कुछ तो गड़बड़ है। '  मैंने अपना CHARGER  निकाल  कर बैग में रख लिया। मै  भी उस स्टेशन पर उतर रही थी।     
       
STORY OF A REAL HERO

( कहानी जारी है >>>>>>>) © आशीष कुमार

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