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रविवार, 15 नवंबर 2015

CITIZEN CHARTER IN HINDI


                      सिटीजन चार्टर




सिटीजन चार्टर लोगो के लिए किसी संगठन द्वारा अपनी सेवाओ services, कार्य शैली  के प्रति की गयी घोषणा announcement  से है . इससे उस संगठन के ग्राहकों को सही और पूरी जानकारी मिल जाती है . इससे सबसे पहले u.k. में जान मेजोर के समय लाया गया था . भारत में 1997  में मुख्य मंत्रियो के एक सम्मेलन में लाये जाने की बात कही गयी थी . सारे विश्व में इसके बेहतरीन परिणाम मिले है .

अक्सर देखा गया है कि हमे ज्यादातर किसी कार्यालय की सेवाओ के बारे में पता नही होता है . सिटीजन चार्टर citizen charter  में संगठन का उदेश्य , उसके द्वारा दी जा रही सेवाओ , उसमे लगने वाले समय तथा असुविधा होने पर किससे संपर्क किया जाय दिया रहता है . इसका एक सबसे अच्छा उदाहरन हम बैंक में देख सकते है . किसी अच्छे शहर की sbi की बड़ी branch  में यदि आप जाये तो देखेगे कि हर काउंटर पर दी जाने वाली सेवाओ के बारे में दिया होता है . आपको  account खुलवाना है तो कितना time लगेगा यह भी दिया होता है . यही है सिटीजन चार्टर का अनुपयोग . जिसने भी इस तरह की सेवा का लाभ लिया होगा वह समझ सकता है कि सिटीजन चार्टर की कितनी उपयोगिता है .

वास्तव में सुशासन के लिए इसे सभी विभागों में लागु किया जाना है . क्रेंद्र सरकार के बहुत सारे विभागों में इसे लागु किया जा चूका है पर राज्यों के विभागों में इसकी स्थिति बहुत निचले स्तर पर है .
 एक प्रश्न उठता है वो कौन से कारण है जिसके चलते सिटीजन चार्टर सभी जगह लागु नही हो पाया है – इसका सबसे प्रमुख कारण है – उदासीनता , धन का आभाव , इसके प्रति सही समझ का आभाव . बहुत से कार्यालय ऐसा सोचते है कि इसके चलते ग्राहक ज्यादा द्वावः डाल सकते है . जब उन्हें नियमो के बारे में पता ही नही होगा तो वह मजबूरन रिश्वत देने पर बाध्य होंगे .


अगर भारत में इसके लागु किये जाने पर विवेचना करे तो पायेगे कि इसका सही तरीके से implementation नही हो पाया है . ज्यादातर जगहों पर एक ही तरह के सिटीजन चार्टर बनाकर लटका दिए गये है जबकि अलग अलग जगहों पर इनको अलग अलग बनाना था क्यूकि हर कार्यलय , अपने मुख्यालय की तरह नही होता है . दूसरी problem इसके अपडेट करने की है इसको ६ माह में update करना था पर कई सालो से इसमें change नही किया गया है . इसको लागु करने के लिए किसी तरह के प्रोत्साहन का आभाव दिखा 



NOTE : एथिक्स बहुत ही नीरस विषय लगता है , इसको कुछ रोचक तरीके से लिखने का प्रयास कर रहा हु ... कृपया इसे अन्य जगहों से मिला कर ही पढ़े .

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