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रविवार, 21 मई 2017

India Iran relations


भारत - ईरान सम्बन्ध 

ईरान के हाल में हुए चुनाव में हसन रोहानी का दोबारा चुना जाना , भारत तथा विश्व के लिए कई मायनों में अहम है। ईरान में हसन रोहानी ने चुनाव के लिए खुलेपन , नुक्लिएर ऊर्जा , उदारवाद को मुद्दा बनाया था। उन्होंने ने अपने विपक्षी इब्राहिम रईसी को अच्छे अंतर् से हराया है। इब्राहिम रईसी कटटरवाद के समर्थक है , वह पश्चिमी देशो से ज्यादा गहरे सम्बन्धो के हिमायती नहीं रहे है।  

हसन रूहानी की जीत को फ्रासं में मैक्रॉन , दक्षिण कोरिया में मून जे की जीत के क्रम में देखा जा सकता है और यह निष्कर्ष निकला जा सकता है कि विश्व में अभी भी खुलेपन को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। 

भारत के लिए महत्व 

ईरान भारत के लिए न केवल ऊर्जा सुरक्षा  के लिए महत्वपूर्ण है वरन यह मध्य एशिया के लिए वैकल्पिक रास्ता भी मुहया करा रहा है। भारत ने २००२ में चाबहार पोर्ट के विकास के लिए समझौता किया था। यह पोर्ट लगभग तैयार हो चूका है। इसके माध्यम से भारत मध्य एशिया के साथ गहरे सम्बन्ध विकसित कर सकता है। चीन ने इसके पास ही पाकिस्तान में ग्वादर बंदरगाह का विकास कर रहा है। एक प्रकार से यह भारत के लिए इस मायने में भी अहम है।  
 ईरान उत्तर -दक्षिण संपर्क मार्ग का एक अहम सदस्य है। इस मार्ग के माध्यम से भारत ईरान होते हुए रूस तक एक बहु आयामी मार्ग (रेल ,सड़क, समुद्री रास्ता ) बनाने की भी योजना है। अभी स्वेज नहर वाला मार्ग , भारत अपना रहा है। इस नए मार्ग के विकास से भारत मध्य एशिया , पूर्वी यूरोप तक ज्यादा तेज , वहनीय तरीके से पहुंच सकेगा। 

आशीष कुमार 
उन्नाव ,उत्तर प्रदेश।  

बुधवार, 10 मई 2017

South korea president election


विश्व शांति की ओर एक कदम 

विश्व में पश्चिम  एशिया के बाद सबसे संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्र दक्षिण कोरिया से एक अच्छी खबर आयी है। मानव अधिकार  कार्यकर्ता , वकील 64  वर्षीय मून जे को राष्टपति चुना गया है। वह अपने चिर प्रतिद्वंदी देश उत्तर कोरिया से अच्छे सम्बन्ध रखने के हिमायती है।  मून जे के पिता 1950  में उत्तर कोरिया के साम्यवादी शासन से भाग कर दक्षिण कोरिया आ गए थे।  
मून जे , अमेरिका के उत्तर कोरिया ऊपर लगाए गए प्रतिबंधों की आलोचना करते रहे है। वह दोनों देशों के साथ बातचीत के द्वारा मुद्दों को सुलझाए जाने के हिमायती रहे है।  मून की सनशाइन पालिसी इस बात का अच्छा उदाहरण है। उन्होंने यहाँ तक आशा कि है एक दिन दोनों देश एक हो जायेंगे। 
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच प्रारम्भ से ही तनावपूर्ण रिश्ते रहे है। अमेरिका ने हाल में ही टर्मिनल हाई अलटीटूड एरिया डिफेन्स ( थाड ) सिस्टम को दक्षिण कोरिया में तैनात किया था। मून ने इस पर समीक्षा करने के संकेत दिए है दरअसल अमेरिका ने अपने द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा के बदले धन की मांग भी की थी जिसे बाद में वापस ले लिया था। अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच 1953 में एक सहयोग संधि की गयी थी जिसके तहत 29000 अमेरिका के  सैनिक इस देश में तैनात है।  
वस्तुतः मून जे की चुनाव में जीत से  अमेरिका को एक झटका लगा है । वैसे भी इन दिनों , बहुध्रुवीय विश्व में , शांति और स्थिरता के लिए सीमा व् अन्य विवाद आपसी बातचीत से सुलझाना ज्यादा बेहतर होगा। अमेरिका को इस तरह के विवादों में न उलझकर उसे अपना ध्यान अन्य गंभीर वैशिवक मुद्दों यथा जलवायु परिवर्तन , अकाल , गरीबी , भुखमरी , रिफ्यूजी समस्या आदि में देना चाहिए।

-आशीष कुमार, उन्नाव , उत्तर प्रदेश

(This article has been published in jansatta editorial as letter on dated 11.05.2017)

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