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मंगलवार, 17 दिसंबर 2019

motivational : Two aspirant


वो जो हमेशा  रोते  रहते हैं 

पिछले दिनों मैं घूमने के लिए दिल्ली से बाहर गया था. इस दौरान कुछ जाने अनजाने प्रतियोगियों से मिला। दो  लोगों का जिक्र करूँगा। एक मेरे बहुत पहले के परिचित थे। दरअसल वो मुझे जानते थे पर मुझे ठीक से उनका चेहरा याद न था। एक साथी के जरिये मुलकात हुयी। उन्हें तैयारी करते लम्बा वक़्त हो गया है काफी परेशान लग रहे थे। कुछ देर की बात में ही तमाम बार बोले - " बड़ी दिक्क्त है " उनका मतलब पैसों से था। मेरे हिसाब से वो 12 साल से तैयारी कर रहे है। 

मैंने पूछा कि आईएएस pcs  के अलावा भी फॉर्म डालते हो। बोले हाँ पर फोकस नहीं कर पाता , फोकस केवल आईएएस pcs पर ही रहता है। मैंने पूछा - लेखपाल वाला फॉर्म डाला था। बोले हाँ पर उसमे हो नहीं पाया। बातों 2 में बता डाला कि शिक्षक भर्ती में भी मेरी मेरिट कम रह गयी। कुछ और बाते हुयी यथा कि उत्तर लेखन कैसे करूँ , टिप्स बता दो। फिर घूम फिर कर वही बात बड़ी दिक्क्त है अब घर से पैसे लेने का मन न होता है। किसी मित्र का नाम का नाम लिया और वो बोले की वो थोड़ी बहुत हेल्प कर देता है। 

अब मुझसे रहा न गया। " भाई , आप इतने दिनों से तैयारी कर रहे हो , लेखपाल का एग्जाम निकलता नहीं पर फोकस आईएएस पर। पैसे का रोना क्यों रोते हो वो भी मेरे सामने----- इतने योग्य तो हो ही कि एक दो ट्यूशन पकड़ लो। कब तक दूसरे के सहारे बैठे रहोगे। दिक्क्त -२ बोलकर कब सहानुभूति लेते रहोगे दुनिया की। या तो तुम मेरी कहानी जानते नहीं या फिर तुम्हे रोने की आदत लग गयी  है। " तमाम चीजें बोलता रहा यह भी बताते हुए कि मुझे ऐसे लोगों पर बड़ा गुस्सा आता है। ऐसे लोगो तमाम एक्सक्यूज़ भी देंगे कि ट्यूशन में टाइम बहुत बर्बाद होता है। मेरी समझ नहीं आता कि 24 घंटे पूरी तरह से पढ़ाई पर फोकस बना रहता है क्या। मेरे ख्याल से यह बस भरम है वरना  ठीक से 10 घंटे काफी है। 

मैं देखता हूँ लोग दिल्ली इलहाबाद में वर्षो जमे रहेंगे और बोलेंगे कि बड़ी दिक्क्त है पैसों की। अगर आप दिल्ली अलहाबाद में हो तो फिर वो जो ऐसे शहरों तक नहीं पहुंच पाते है उनको क्या --- पर उन पर नजर कभी जाएगी ही नहीं। वो जो 18 के भी नहीं होते है और ट्यूशन पढ़ाने लगते है उनको दिक्क्त नहीं है ------. 

काफी दिनों बाद इस पोस्ट के जरिये प्रतियोगी साथियों से बात कर रहा हूँ और उक्त कहानी बताने का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि भाई अपनी  क्षमता  भी जान लो।  बेहतर तो यही होगा कि छोटे २ एग्जाम से शुरुआत करो. दिवा स्वप्न देखने बंद कर दो, अब दिन बदल गए है। 

खैर दूसरे मित्र का भी जिक्र कर लेता हूँ - पूरी तरह से अजनबी , फेसबुक पर कभी कभार एक दो मैसेज से बात हुयी थी। अंतिम समय में दौड़ते भागते स्टेशन पहुँच गए मिलने के लिए। 25 की उम्र भी न हुयी है पर नेट करके एक डिग्री कॉलेज में पढ़ाते भी है और तैयारी भी कर रहे हैं। लगातार pcs mains लिख रहे है। अब आईएएस भी देना शुरू करना चाहते है। ऐसे लोगों से मिलना सार्थक भी रहता है। एक विशेष बात का जिक्र भी करना चाहुँगा कि दीक्षित जी ने एक बार भी अपने जनरल होने का रोना भी नहीं रोया ( इस पर ज्यादा बात न करूंगा पर तमाम बार इस तरह की भी सामने आ जाती हैं ). दिल से आशीर्वाद निकला कि तुम जल्द ही sdm बनने वाले हो। मुख्य परीक्षा के लिए भी उनको काफी अच्छे से समझना , बड़ा अच्छा लगा।  

तो दो लोग आपके सामने है आपका दिल क्या कहता है -- कौन बेहतर दावेदार लग रहा है। स्वाभिमानी व्यक्ति कभी भी अपने अभावों को सामने नहीं रखेगा। जितना मैंने देखा सुना भोगा पाया है उससे यही कहूंगा कि स्वाभिमानी व्यक्ति को सफलता मिलती है न कि रोने वालों को।  

17 दिसंबर 2019 ,
© आशीष , उन्नाव , उत्तर प्रदेश। 

सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

ABOUT CHINTAK JI

     चिन्तक जी के बारे में बहुत से लोगो ने पूछा है पर एक पाठक को वह कहानी इतनी भायी कि मुझे ३ – ४ मेल लिखे . मैंने उन्हें हमेशा जबाब दिया कि समय मिलते है पोस्ट करूगां . पास लिखने के लिए बहुत से विचार होते है पर समय के आभाव में उन्हें लिख नही पाता हूँ . वैसे भी लिखने के लिए फ्री mind होना चाहिए जो आज के दौर में बहुत कम होता है
 .    ABOUT  CHINTK  JI  BY  IAS KI PREPARATION HINDI ME
ज्यादातर लोगो को यह जानने कि उत्सुकता रही है कि चिन्तक जी इन दिनों क्या कर रहे है तो समय आ गया है जब आप को जानकारी दे दू चिन्तक जी ने दिसम्बर १५ में uppcs lower का इंटरव्यू दिया है . पहली बार इंटरव्यू दिया है और उम्मीद की जानी चाहिए उनका सिलेक्शन हो जायेगा .
चितंक जी के तेवर अभी भी वैसे है जैसे पुराने दिनों में हुआ करते थे अब मेरी उनसे बातचीत बहुत कम ही हो पाती है महीने या २ महीने में एक बार पर जब भी बात होती है मुझे ख़ुशी होती है कि अभी भी उनमे बहुत कुछ बाकि है २००६ में पहली बार में आईएएस का pre निकालने के बाद , काफी कोशिस के बाद भी उनका कभी pre नही निकला .

२०१५ में जब ias का पैटर्न फिर से बदला उन्होंने पुरे जोर शोर से , दम लगा कर एग्जाम दिया . एग्जाम के बाद मेरी उनसे फ़ोन पर बात हुई पता चला उनका स्कोर मात्र ८० अंक है यानि इस बार भी उनका होना नही था .. इस बार भी वो ias का मैन्स देने से वंचित रह गये ...अच्छा स्कोर ने कर पाने के कारण भी बताये थे जो मुझे अब याद नही ... वैसे भी आपको पहले की कहानियों से चिन्तक जी के बारे में एक बात बहुत अच्छे से समझ में आ गयी होगी वह बहुत गंभीरता से सोचते और समझते है ..

वो ias के एग्जाम से भले दूर रहे हो पर हमेशा २०१३ में भी मुझसे ias मैन्स के पेपर मागे थे ताकि समझ ले कैसे प्रश्न पूछे जा रहे है इलाहाबाद में उनके परिचितों में दूर दूर तक कोई मैन्स लिखने वाला नही था .. मैंने भी समय निकल कर पेपर्स की कॉपी करवा कर पोस्ट कर दी थी हलाकि यह बहुत झंझट का काम लगा था ..

२०१४ में भी मैन्स के पेपर मागते रहे जब भी बात होती थी वह यह डिमांड करना नही भूलते थे पूरे  साल मै टालता रहा वजह साफ थी मुझे ऐसा लग रहा था कि जब मैन्स लिखना ही नही है तो मैन्स के पेपर के विश्लेष्ण करके  क्या करोगे ... पर उनसे सीधे सीधे कैसे कहूँ कि अब ias  का पैटर्न  बिलकुल बदल गया है .. अब इसमें COMPETITION  भी बहुत बढ़ गया है .

अभी जनवरी में फिर उनसे बात हुई तो बोले होली जब घर आना तो २०१४ और २०१५ के मैन्स के पेपर लाना मत भूलना ... मतलब अभी भी वो ias को छोड़ेगे नही .....मेरे ख्याल से अभी भी उनके २ या ३ चांस बचे है .....देखो क्या होता है ......( अगर कोई पाठक इलाहाबाद से हो और चिन्तक जी ias मैन्स के पेपर उपलब्ध करा सके तो प्लीज संपर्क करे क्यूकि चिंतक जी अभी भी सिंपल फ़ोन रखते है और उनका कोई फेसबुक , जीमेल अकाउंट नही है ..मैंने नेट पर देखने कि सलाह दी थी तो उनका कहना था कि हार्ड कॉपी में देखना ज्यादा अच्छा होता है .....उनके तर्को को मै कभी काट नही पाता हूँ ... उनसे जुडी शेष कहनियाँ फिर कभी ........)

चिंतक जी से जुडी पुरानी पोस्ट यहाँ पर पढने के लिए क्लिक करिये .

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