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मंगलवार, 21 जून 2016

kbhir ki famous lines / dohe



यह मेरा  नोट्स जैसा है।  कभी कबीर पर लिखना पड़े तो इन को आधार बना कर उत्तर लिखा जा सकता है।  जो 





  • मो को कहाँ ढूँढ़े रे बंदे, मैं तो तेरे पास में


  • 'घर-घर में वह साईं बसता, कटुक बचन मत बोल रे'

  • हिरदा भीतर आरसी, मुख देखणा न जाई/मुख तो तौपरि देखिए, जे मन की दुविधा जाई।'

  • 'साईं इतना दीजिए जा में कुटुम समाय।
  • मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय।'

  • माया तजूँ, तजी न जाय/फिरि फिरि माया मोहे लिपटाय


  • काहे रे मन दह दिसि धावै, विषिया संग संतोष न पावै'

  • जब आवै संतोष धन, सब धन धूरि समान

  • मैं मैं बड़ी बलाई है, सकै तो निकसि भाजि/ कब लग राखौ हे सखी, रूई पलेटी आग'


  • कबीर अपने जीवते, एै दोई बातें धोई / लोभ बड़ाई कारणौ, अछता मूल न खोई
  • जो तू बामन बामनी जाया, आन बाट तै क्यों न आया / जो तू तुरक तुरकनी जाया, भीतर खतना क्यों न कराया


  • 'पाहन पूजे हरि मिले, मैं पूजूँ पहार।
  • ताते या चाकी भली, पीस खाय संसार।'
  • काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय।
  • ता चढ़ मुल्ला बाँग दे, बहरो भयो खुदाय।'

  • 'निंदक नियरे राखिए'

  • सुखिया सब संसार हे, खावै अरु सोवै
  • दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै।'

  • कबीरा खड़ा बजार  में , मागे  सबकी खैर। 
  • कबीरा यह संसार है जैसे सेमल फूल 
  • गुरु गोविन्द दोउ खड़े , काके  लागु पाय 
  • बकरी पाती  खात  है , ताकि काढ़ि खाल 
  • जे नर  बकरी खात  है , उनके कौन हवाल 





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