सोमवार, 18 अप्रैल 2016

THAT OLD LADY'S BLESSINGS



हर किसी के जीवन में वो दौर जरूर आता है जब वो बहुत ज्यादा परेशान होता है। हर तरफ निराशा ही निराशा ही नजर आती है। मेरा भी वही दौर चल रहा था परीक्षा पर परीक्षा दिए जा रहा था पर सफलता दूर दूर तक नही नजर आ रही थी।
ऐसे ही मै किसी परीक्षा को देकर लखनऊ से वापस उन्नाव आ LKM से वापस आ रहा था।  सामने की सीट पर एक छोटा सा बच्चा अपनी दादी के साथ बैठा था।  बहुत चंचल था वो।  थोड़ी देर में मुझसे हिल मिल गया।  उसकी दादी से बात होने लगी और बातो बातो में पता चला कि वो एक मुश्किल से गुजर रही है।  दरअसल वो जल्दबाजी में लखनऊ से चलते वक्त अपनी पर्स , बाथरूम ( जिस घर वो गयी थी )  में छोड़ आई थी और इस समय उनके पास १ रुपया भी नही था।  उन्होंने ने बताया कि ट्रेन की टिकट  भी नहीं ली है। उनकी मुश्किल यह थी कि  वह कानपुर सेंट्रल में उतरने के बाद आगे कैसे जाएगी। हालांकि वह कह रही थी कि कोई ऑटो कर लेंगी जो उन्हें उनके घर तक छोड़ आएंगे और घर पहुंच कर पैसे दे देगी।

                                     THAT  OLD KIND LADY  BY  IAS KI PREPARATION HINDI ME


महिला सभ्रांत घर की लग रही थी। मुझसे बात करते वक़्त कुछ परेशान सी लग रही थी। मेरा स्टेशन उन्नाव आने वाला था। मेरे पास उस वक़्त २० या ३० रूपये से अधिक नहीं रहे होंगे पर मेरे दिल ने कहा  इनकी कुछ हेल्प करनी चाहिए। मैंने उनसे पूछा कानपुर से आपके घर तक टेम्पो से जाने में कितने रूपये लगेंगे उन्होंने कहा १० रूपये।  मैंने उन्हें १० रूपये देते हुए कहा  यह रख लीजिए। उन्होंने बहुत मना किया पर मैंने उनके पोते को यह कहते हुए पकड़ा दिए कि आप इसको बिस्कुट दिला देना।

यह कोई बड़ी बात नहीं थी पर असल बात उसके बाद शुरू  होती है। ठीक उसी रात , एक साथी ने अलाहाबाद से फ़ोन किया कि  मेरा DATA ENTRY OPERATOR ( SSC ) में AIR 108 के साथ सिलेक्शन हो गया है . यह सफलता में पहली  सुचना थी उसके बाद एक के बाद एक बहुत सारी सफलताये मिली . अब आप भी समझ रहे होंगे कि उपर की घटना क्यू महत्वपूर्ण थी .

मै कभी भी किसी भिखारी को भीख नही देता . कितना भी दयनीय क्यू न हो अगर वो रूपये मांग रहा है तो मुझसे एक रुपया भी नही पा सकता है ( यह अलग बात है कि मेरा दिल जब करता है तो किसी को भी स्वेच्छा से हेल्प कर देता हूँ . )

जैसा कि आप जानते है कि मै गावं से हूँ . मै 9 और १० अपने घर से 8 KM  दूर स्कूल से किया है . मेरी उम्र थी 13 - 14 साल . रोज साइकिल चला कर आता जाता था . एक रोज मुझे रास्ते में एक उम्रदराज आदमी मिला था . गर्मी में पैदल चला जा रहा था . मैंने उसको अपनी साइकिल में  बैठाकर अपने गाव की बैंक तक छोड़ा था . मन को बहुत खुशी मिली थी .

आज भी मैंने कुछ ऐसा ही काम किया है जिससे मन को बहुत संतोष मिला है और दिल कहता है कि उसका आशीर्वाद कुछ नया लेकर आएगा . उसकी कहानी फिर कभी जब उसका फल मिलेगा तब . पर सभी पाठकों से यह जुरूर कहना चाहूँगा कि भले मंदिर , मस्जिद , गुरुद्वारा मत जाईये  पर आपके जीवन में अगर कभी कुछ अच्छा काम करने का मौका मिले तो उसे छोड़ना मत. अगर आपके जीवन में कुछ ऐसा हुआ है तो जरुर शेयर करिये . याद रखिये यह ऐसे काम है जिनसे दुनिया खुबसूरत बनी हुयी है बाकि तो मोह माया है .





रविवार, 17 अप्रैल 2016

how to write a good essay ?

FRIENDS , WRITING ESSAY IS ESSENTIAL PART OF EVERY EXAM. HE WHO SCORE GOOD IN ESSAY , HAVE GREAT CHANCE FOR NOT ONLY SELECTION BUT ALSO TO BE IN TOPPER LIST. 

HERE SOME BASIC TIPS FOR YOU . YOU CAN READ MANY OTHER TIPS BY CLICKING LINK IN LAST. 

  1. निबंध लेखन एक कला है जो आप में लम्बे अभ्यास से विकसित होती है।  
  2. इसके लिए आपके पास व्यापक विचार , अच्छी शब्दावली और शानदार शैली होनी चाहिए।  
  3. अच्छे विचार आपके पास दो तरीके  से आ सकते है - आप अच्छी - अच्छी किताबें पढ़े और आपको जो कुछ भी अच्छा लगे उसे अपने पास नोट करते चले।  
  4. अगर आपके पास अच्छे शब्दों का आभाव होगा तो भी आप चाह  कर  अपने विचारों को अभिव्यक्त नहीं पर पाएंगे।  
  5. शैली आपके व्यक्त्वि पर निर्भर करती है अगर आप की समझ अच्छी है और अपनी बातों  तो सही और सुलझे तरीके  से कहना जानते है तो आपकी लेखन शैली भी सहज होगी।  
  6. अक्सर निबंध लिखते समय हम क्रमबद्धता खो बैठते है - इसलिए सबसे पहले अपने सभी विचारों को लिखे। आउटलाइन बना ले कि पहले क्या लिखना है और बाद में क्या लिखना है।  
  7. शुरुआत किसी रोचक वाकये से करिये।  
  8. अगर आप किताबी निबंध लिखते है या यह कहु  कि  आप निबध  की तैयारी  किसी बुक से पढ़ कर  करते है तो बहुत  संभव है आप बहुत  अच्छा स्कोर न कर  पाए।  
  9. निबंध में प्रवाह होना चाहिए।  
  10. रोचकता बनी रहे इसलिए बीच बीच  में दोहे , सूक्ति, बोध वाक्य  आदि डालते रहे।   

सोमवार, 11 अप्रैल 2016

Frontline , ECONOMIC & POLITICAL WEEKLY , INDIAN EXPRESS

FRONTLINE

frontline को पहली बार इलहाबाद में एक दोस्त के पास देखा था . उस समय मुझे इंग्लिश पढने काफी मुश्किल होती थी . पर दोस्त प्रतिभाशाली था इसलिए मैंने भी बगैर कुछ ज्यादा सोचे विचारे FRONTLINE खरीदने लगा . 
जब मै लखनऊ में आर्मी में जॉब करता था तब इसका चस्का बहुत ज्यादा लग गया . हर १५ में इसको खत्म करके , अगले अंक का इंतजार करता था . धीरे धीरे इसको पढ़ते पढ़ते मै इंग्लिश में सहज होने लगा . मैंने इसे तब लेना शुरु किया था जब इसका दाम २० रूपये हुआ करता है . अब तो इसकी कीमत ६० रूपये हो गयी है . अब भी कभी कभार इसे ले लेता हूँ पर नियमित नही . इसके लेखो से मुझे इतना लगाव है कि मेरे पास ३५ से ४० पुराने अंक होंगे . बहुत बार रूम पार्टनर ने कहा बेच दो अब कभी इनको पढ़ पाने का वक्त नही मिलेगा मुझे भी पता है कि उन्हें शायद ही कभी पढ़ सकू . 

FRONTLINE की खास बात यह है कि बहुत बार आईएएस की मुख्य परीक्षा में इससे सीधे सीधे सवाल आ चुके है . इंग्लिश मध्यम के बहुतायत छात्र इसको पढना पसंद करते है . 

THE INDIAN EXPRESS 


जब मेरी नौकरी अहमदाबाद में शुरु हुई तब मुझे हिंदी पेपर की बहुत दिक्कत हुई . कुछ दिन राजस्थान पत्रिका से काम चलाया पर उसमे विज्ञापन बहुत ही ज्यादा आते है और मतलब की खबर बहुत ही कम . इसी दौरान THE INDIAN EXPRESS से परिचय हुआ . पहले तो पेपर पढ़ पाना , उसे खत्म कर पाना बहुत कठिन लगता था पर अब हालत यह है कि इसके बगैर सुबह कुछ अच्छा नही लगता है . एक बार इंग्लिश पेपर पढना शुरु कर देते है तो आपको पता चलता है कि हिंदी के न्यूज़ पेपर का स्तर कितना न्यून है ..जनसत्ता को छोड़ दे तो किसी पेपर में सम्पादकीय भी काम चलाऊ होता है . आप यह तो पता ही होगा कि जनसत्ता और THE INIDAN EXPRESS एक ही ग्रुप से पेपर है . 

ECONOMIC & POLITICAL WEEKLY 

अब बात इस magzine की जाय . इसके बारे में सुना तो बहुत पहले से रखा था पर कभी खरीदा या पढ़ा नही . पिछले २ या ३ माह से इसे पढना शुरु किया और अब जा कर पता चला यह magzine सबकी बाप जैसी है . क्या जबरदस्त लेख आते है .. बहुत सरल इग्लिश जो आसानी से सबके समझ में आ जाये . मै तो इसके एक लेख को पढने में बहुत समय लगता हूँ वजह हर लेख इतना सटीक विश्लेष्ण करता है , शोधपरक , गुणवत्तापूर्ण आलेखों में इसका कोई जबाब नही . वैसे यह पत्रिका वैश्विक स्तर पर पढ़ी जाती है और एशिया में टॉप लेवल की रैंकिंग में है . इसमें सब कुछ अच्छा है बस एक ही चीज नकरात्मक है .इसका दाम , हर सप्ताह आती है और एक अंक की कीमत है ८०  रूपये . अब एक स्टूडेंट के लिए हर महीने ३२० रूपये खत्म कर पाना बहुत कठिन है . यह अलग बात है कि अपने दिमाग को बेहतरीन बनाने के लिए आपको magzine और न्यूज़ पेपर में बहुत ज्यादा इन्वेस्ट करना चाहिए . 



आप अपने अनुभव शेयर करना मत भूलना और कोई अच्छी , स्तरीय magzine आपकी नजर में हो तो मेरे ध्यान में लायिएगा . 

STRANGE BUT IT IS TRUE

है न यह विचित्र बात 

जैसा कि आपको पता है कि मै अपने मूल जिले से काफी दिनों से दूर रहता आ रहा हूँ . अक्सर जब कही परिचय देना होता है तो मै बताता हूँ कि मेरा जिला कलम व तलवार दोनों का धनी है . उन्नाव  से  सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी , प्रसिद्ध आलोचक राम विलास शर्मा जी , चित्रलेखा जैसे कालजयी नावेल के लेखक भगवती चरण वर्मा जी जैसे लोग जुड़े रहे है . यह चन्द्रशेखर आजाद की भी धरती है . ऐसा बहुत कुछ गर्व से बतलाता हु पर बहुत कम लोग इससे मेरे जिले को पहचान पाते है . मेरे पाठक भी शायद इस unnao  नाम से अनजान हो पर आज आपको ऐसी बात बताने जा रहा हूँ जो निश्चित ही आप ने सुना होगा . 

आपको याद है २०१३ में एक जगह पर एक साधू ने सपने में देखा था कि जमीन में १००० टन सोना दबा है . इस खबर की चर्चा सारे भारत के साथ वैश्विक स्तर पर हुई थी  . सोना तो नही मिला पर मुझे बड़ी आराम हो गयी है . अब लोगो से इतना ही कहना होता है कि उसी जिले से हूँ जहाँ पर सोना खोदा जा रहा था . 

है न यह विचित्र बात जानना किस चीज से चाहिए पर जानते किस चीज से है . 

शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016

ATTITUDE IS VERY IMPORTANT THING



बात उन दिनों की  है जब मै इंटरर पास करके , B.SC.  करने के लिए शहर आया।  नया नया  था , जानने की इच्छा बहुत  थी।  मेरे छोटे से शहर में काफी सांस्कृतिक गतिविधियाँ बहुत  होती रहती थी. कवि सम्मेलन , पुस्तक मेला , राजू श्रीवास्तव के प्रोग्राम , अनूप जलोटा , गोपाल दास नीरज , साबरी बंधू  जैसे  सैकड़ो लोगो को रूबरू सुना या देखा था।  
ऐसे ही किसी प्रोग्राम में गया था। मेरे पास ही वो बैठी थी अब ठीक से याद नही कैसे हुआ पर यह हो गया। उसने अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा ' फ्रेंड्स ' . मैंने बहुत संकोच करते हुए उससे हाथ मिला लिया।  शायद वो ११ या १२ में पढती थी उसकी संगीत और डांस में रूचि थी।  उस दिन भी उसका डांस कर प्रोग्राम था। ज्यादा विस्तार में न जाते हुए पॉइंट पर आते है। उसके ही मुह से पहली बार सुना था " आप में attitude बहुत ज्यादा है " . सच कहू उस समय मुझे attitude का ठीक से मतलब भी नही पता था।  मुझे उससे  पूछना भी पड़ा क्या मतलब है आपका।  आज वो काफी उपर जा चुकी है टीवी में भी कभी प्रोगाम आ जाते है।  

तो भई उस दिन से आज तक मुझे यह बात दर्जनों  लोगो (बहुतायत फीमेल ) से अलग अलग तरीके से सुननी पड़ी है " आप में attitude बहुत ज्यादा है।  " आप मुझे attitude का ठीक से मतलब भी  पता चला गया है और इस बारे में  लिखने के बारे में बहुत दिनों से सोच भी  रहा था।  चलो आज बात करते है।  

सबसे पहले मै यह बात भी बता दू  अगर दर्जनों के विचार में मुझ में attitude बहुत है तो सैकड़ो या कहू हजारो दोस्तों , पाठकों की नजर में जमीन से जुड़ा , सिंपल , हेल्पफुल हूँ।  

अब बात करते है यह विरोधाभास क्यों।  दरअसल दोनों ही चीजों सत्य है। मै खुद स्वीकार  करता हूँ कि मुझमे में बहुत attitude है और मेरा यह मानना है कि अगर आप में attitude ही नही है तो आप कुछ नही है।  

पहले attitude का मतलब समझने की कोशिस करते है।  attitude का मतलब सीधा सीधा यह है  कि आप को अपनी किसी चीज को लेकर बहुत यकीन है।  attitude का मतलब है कि आप अपने आप को बहुत गहराई से समझते है , अपनी क्षमताओ को लेकर बहुत संजीदा है। आपको पता है कि आप अपनी किस्मत खुद लिख सकते है।  वैसे attitude के मायने सबके लिए अलग अलग हो सकते है मेरे लिए तो attitude यही है।  

कैसे तलाशे अपने में attitude 

सबसे पहले आप अपने बारे में सोचे कि आप में कोई ऐसी बात है जो बहुत हटकर है जो यूनिक है। यह कुछ भी हो सकता है जैसे आप गाते अच्छा है , नाचते अच्छा है , चेस में एक्सपर्ट है , खाना बनाने में एक्सपर्ट है , आप अच्छे रनर है , लिखते अच्छा है  , पेंटिंग अच्छी बनाते है  आदि ।  रूचि होना अलग बात है और एक्सपर्ट होना अलग बात है जब आप एक्सपर्ट होंगे तभी attitude आएगा।  मेरे विचार में अपनी अच्छी चीजो के बारे में attitude होना अच्छा होता है।  बस चीजे अच्छी होनी चाहिए।  

इससे इतर अगर में आप नकारात्मक चीजो में attitude दिखाते है तो वो आपको गर्त में ले जायेगा। जिन्दगी में अच्छी चीजे सीखते रहिये।  गलत चीजो , गलत इंसानों को कभी भी अपने पर हावी न होने दीजिये। अपने पर्सनालिटी को खुद के अनुसार बनाईये। भले लोग आपको ज्यादा attitude वाला कहे पर क्या फर्क पड़ता है अगर आप सही है।  

क्यों होता है attitude का टकराव 

attitude का टकराव आज के दौर में बहुत बढ़ गया है।  दरअसल हर किसी का अपना attitude है पर टकराव क्यों करे। क्यों अपनी बाते , अपने विचार किसी पर थोपे या स्वीकारे ।  क्यों  किसी से ज्यादा उलझे या उसे उलझाये ।  उसको उसके विचारो , उसकी मान्यताओ के साथ छोड़ दे, आगे बढ़े।  इंसान के कर्म तो महत्पूर्ण होते ही है उसमे attitude कितना और किस तरीके का है यह भी बहुत मायने रखता है। 

कभी कभार मुझे नकारात्मक टिप्पड़ी भी मिलती है मै उन पर कोई भी राय देने के बजाय उसे हटा देता हूँ ज्यादा हुआ तो ब्लाक। इसलिए नही कि मुझे आलोचना पसंद नही या वो पाठक गलत है बस इसलिए कि मै बहस करने को प्रमुख नही मानता मेरा वो काम ही नही है।  मेरा काम है लिखना तो  फिर बहस में क्यों उलझु। जो बहस करते है उनका काम ही है बहस करना न कि लिखना। 
सीधा और सुलझा हुआ जीवन , मेरी मान्यताये मेरे विचार 

प्रिय दोस्तों आशा है आप मेरी बात समझ रहे होंगे।  IN CIVIL SERVICE MAINS PAPER 4TH THERE IS A TOPIC ABOUT ATTITUDE . HERE ,IN THIS ARTICLE THERE IS NOTHING DIRECTLY FOR MAINS BUT U CAN LEARN A LOT ABOUT WHAT ATTITUDE NEED CIVIL SERVANT.

फुटनोट :-  हनी सिंह के गाने के हिट क्यों होते है  क्यूकि उनके सारे गानों में बहुत attitude रहता है . उदाहरन के लिए 
- मेरा १६ का डोला , ४६ की छाती ..........
- मुझको तू पहचाने न तेरे घर अख़बार न आता ---
- पास करा दू , फ़ोन घुमा दू , तेरी प्रिंसिपल भी बेबी यो यो कि फैन है --
- तुझे बिठा कर रखा था मैंने रानी पलको पे , 
   तूने मारी ठोकर समझी आ जाऊंगा सडको पर ..( पूरी लाइन सुनकर किसी का भी दिमाग असमान पर जा सकता है . ) 

गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

success mantra




अच्छा आप लोगो ने कौन कौन कोर्स की किताबो के अलावा किताबे पढने का शौक रखता है . मेरा मतलब नावेल , कहानिया , मैगजीन पढने से है ..
मुझे कभी इन सबका का बहुत शौक हुआ करता था सच कहूँ वो भी क्या life थी . आज बस अचानक यूँ फील हुआ कि अब तो सिर्फ कोर्स की किताबे पढने का ही टाइम मिल पाता है .. न जाने कितना टाइम हो गया होगा कोई मन का नावेल नही पढ़ा ..

पिछले साल अप्रैल में डेल्ही जाना हुआ था .. मेट्रो के एक स्टेशन पर मुझे नेशनल बुक ट्रस्ट का बुक स्टाल दिख गया .फिर क्या था उसमे तुरत घुस गया .. ५ किताबे खरीद डाला .सारी सारी कहानियों बुक थी .. बहुत मन से खरीदा पर तब से अब तक उन्हें पढने की जरा भी इच्छा नही हुई .. कई बार उन्हें उठा कर भी देखा पर न जाने क्यों मन ही तैयार नही हुआ ..

अब शायद वो पहली सी आजादी नही महसूस होती है .यह सच है सरकारी जॉब मिलना , इस दौर में भगवान मिलने सरीखा होता है .. इतनी मारा –मारी है जॉब के लिए .. पर एक बार जॉब में आने के बाद ही पता चलता है कि यह तो वो चीज ही नही थी जो सोची थी .. जॉब में रोज का वही ढर्रा रहता है ..

जब कभी भी मेरी चिंतक जी से मेरी बात होती है वो कहते है कि कितना अच्छा है तुम्हे तो २१ साल में ही नौकरी मिल गयी थी पर मेरा उनसे यह कहना होता है कि तुम भले बेरोजगार हो पर पढने के लिए आजाद हो .. तुमको सारा दिन पढना ही है उससे अच्छी क्या बात हो सकती है .. सच तो यह है एक जॉब कर रहे व्यक्ति जो साथ में तैयारी कर रहा होता है के लिए पढाई के लिए टाइम निकाल पाना कठिन होता है .

इसलिए मै उन सभी पाठको को यह कहना चाहता हूँ कि अगर आप को सिर्फ पढना है तो खूब जम कर पढ़े और सोचे कि आप भाग्यशाली है कि आपको सिर्फ पढना है जरा उनको सोचे जो जिन्दगी में चुनौती उठाते हुए भी पढाई कर रहे है मेरा मतलब उनसे है जिन्हें मजबूरी में जॉब करनी पड़ी जिन्हें  अपने मन मुताबिक तैयारी करने के लिए के लिए विरासत का सहयोग नही मिला .

पिछले दिनों मेरी  गूगल हैंगआउट पर अपने एक  रीडर से बात हुई .. उनके पापा की कैंसर में डेथ हो चुकी है ..वो और उनकी माँ .. अकेली लडकी अपनी माँ को भी सम्भाल रही है .. पैत्रक साइबर कैफे को चलाते हुए तैयारी भी कर रही है ..ज्यादा बात तो नही हुई पर यह कल्पना की जा सकती है कि उसके लिए तैयारी करना कितना जटिल होगा .. इसलिए मै हमेशा इस बात पर जोर देता हु कि अगर आप लगन है और कुछ कर दिखाने का जस्बा है तो सफलता कुछ देर से ही सही पर आपके कदम जरुर चूमेगी . ईमानदारी से प्रयास करते रहिये .   



बुधवार, 9 मार्च 2016

chintak ji and an ips' mother

चिंतक जी और एक  IPS की माँ

भागीदारी भवन, लखनऊ  की बात है चिंतक जी घर गये थे लौट कर आये तो बहुत मुदित थे उनकी खुशी राज मुझे कुछ रोज बाद पता चला जब चिंतक जी ने मुझे hostel की तीसरी मजिल पर छत पर शाम के समय बताया कि अब वो एक ips के  direct tuch में रहने वाले है . . उनकी बातो से पता चला कि लौटते समय चितंक जी को ट्रेन में एक महिला मिली थी उस महिला ने जब चितंक जी पूछा क्या करते हो तो चितंक जी बताया “ मै ias की तैयारी कर रहा हूँ ... “ उस महिला ने खुश होते कहा मेरा बेटा भी काफी लम्बी तैयारी के बाद अभी जल्द ही ips बना है इस समय ट्रेनिंग पर है ..” चिंतक जी यह सुनकर बहुत खुश हुए और उनसे , उनके बेटे का नंबर ले लिया .

चितंक जी के पास उन दिनों मोबाइल तो था नही सो उस नंबर को कागज पर बहुत सहेज कर रखे थे . मुझसे बोले अगर तुम चाहो तो यह नंबर दे सकता हूँ पर वो ips किसी से  ज्यादा बात नही करते . मैंने मना कर दिया कि मेरी हिम्मत नही है और मेरे को इसमें कुछ फ़ायदा ही नही दिख रहा है ..

चिंतक जी उन व्यक्तियों में है जो रणनीति बना कर काम करते है .. सफल लोगो के से बात करना ..उनकी एक रणनीति का एक हिस्सा है .. उन दिनों तो ias और ips में चयनित लोगो से मिल पाना और बात कर पाना बेहद कठिन था और फेसबुक का भी ज्यादा चलन नही था .
एक शाम , किसी से मोबाइल मांग कर चितंक जी उस ips को फ़ोन लगाया .. चिंतक जी से उस ips ने बहुत सीमित बात करके यह कहा कि वह बहुत व्यस्त है और फ़ोन काट दिया . चिंतक जी इससे दुखी नही हुए उनको पता था कि ips ऐसे ही होते है रिज़र्व nature के .


chintak ji  &  AN IPS'S  MOTHER  BY IAS KI PREPARATION HINDI ME

मैंने कई बार लिखा कि जिन्दगी में बहुत से अजीबोगरीब चमत्कार होते है . बमुशिकल २० बीते होंगे एक सुबह चितंक जी अख़बार लेकर मेरे पास भागते हुए आये .. एक खबर को दिखाते हुए पढने को बोला ..
खबर यह थी कि हजरतगंज , लखनऊ थाने में एक फर्जी ips को पकड़ा गया . वो ips तब पकड़ा गया जब वह थाने पर अपना रोब दिखाते हुए बोला कि मै ips हु मुझे   चलकर shopping करवाओ  .....पता चला वो फर्जी ips ने इंटरव्यू तो दिया था पर उसमे फ़ैल हो गया था पर उसने अपने घर में भी नही बताया और यही बोला कि वो ips बन गया है .. उसका यह नाटक ७ या ८ महीने से चल रहा था ..
कहने कि जरूरत नही यह खबर उसी ips की थी जिससे चिंतक जी बात की थी . दुख की बात यह थी वो बेचारी माँ भी , अपने लडके की करतूतों से अनजान थी .
पिछले दिनों भी एक खबर फर्जी ias की निकली थी जिसमे कोई लडकी मसूरी में काफी दिनों तक फर्जी आधार पर ट्रेनिंग भी कर डाली थी .

चिंतक जी से जुडी पुरानी पोस्ट यहाँ पर पढने के लिए क्लिक करिये .

बुधवार, 17 फ़रवरी 2016

Learn like this ......

चिंतक जी और ज्ञानी गुरु

क्या आप सोच सकते है कि चिंतक जी जो खुद अहम ब्रह्म हो किसी के , हमउम्र के पैर छु सकते है ......वैसे भारतीय संस्कृति में पैर छूना आदर की बात होती है ..पर इस घटना में पैर छुवाना ,,एक प्रकार से उन्हें नतमस्तक करना था ... यानि इस कहानी में आप देखगे कि बात कि बात में चिंतक जी को किसी के पैर छूने पड़ गये ..
चिंतक जी के बारे में आप काफी कुछ पढ़ चुके है पर अभी तक आपको  ज्ञानी गुरु के बारे में कुछ भी नही बताया है ......दरअसल कई किरदार है एक दुसरे से जुड़े और जीवंत भी .ज्ञानी गुरु के चरित्र को किसी रोज फिर विश्लेषित करेगे आज सीधे कहानी पर आते है ......
CHINTAK JI  AUR  GYANI GURU BY  IAS KI PREPARATION HINDI ME

चिंतक जी का वो पुराना रूम याद है न जो किसी ज़माने में पुरानी  रेलवे कालोनी का था ..उसी रूम की बात है ज्ञानी गुरु भी मेरे भागीदारी भवन , लखनऊ से ही परिचित थे .. वही पर चिंतक जी मुलाकात हुई थी तो जब भी मेरा इलाहाबाद जाना होता ज्ञानी गुरु भी मिलने आ जाते थे ( ज्ञानी गुरु से मेरी ४ सालो से बातचीत बंद है आज लिखते वक्त उनकी बड़ी याद आ रही है ...लगता है मुझे ही पहल करके उन्हें फ़ोन करना होगा ..)
पता नही कैसे हुआ पर मेरे सामने ही जोरदार  बहस शुरू हो गयी . वैसे इलाहाबाद में इस तरह की बहस होना बड़ी स्वाभाविक बात है ..
ज्ञानी गुरु और चिंतक जी इतिहास के एक प्रश्न को लेकर भिड गये प्रश्न यह था कि मुहम्मद तुगलक के राजधानी परिवर्तन का कारण किस ने यह बताया है कि delhi के लोग उसे गाली भरे पत्र लिखते थे ?  बरनी या इब्नबतूता ( अब याद नही यही आप्शन थे या कुछ और ..)
मैंने कई बार इस बात पर जोर दिया है कि इलाहाबाद में जितना बारीकी से , तथ्य आधारित पढाई कि जाती है उतनी पुरे देश या कहू विश्व में कही नही होती ....इसके पीछे लोक सेवा आयोग की कारस्तानी है .. लगे हाथ बता दू .. uppcs के जैसे सवाल शायद ही कही पूछे जाते हो ..एक नमूना भी देख लो .. एक बार पूछा गया कि गाँधी जी २ गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने जिस जहाज से लन्दन गये थे उसका नाम क्या था ............यही कारण है मेरे जैसे लोग uppcs से हमेशा दूर रहे इस तरह के प्रश्नों से दिमाग का दही हो जाता है ......)
जब चितंक जी और ज्ञानी गुरु में बहस हुई तो मेरे लिए प्रश्न ही नया था पर बहस थी कि गर्म होती जा रही थी कोई हार मानने को तैयार नही था ऐसा लग रहा था मेरे जैसे नैसिखिये के सामने कोई हार कैसे मन सकता है ..
बात इतनी बढ़ गयी कि शर्त लगने लगी तय यह हुआ कि जो हारेगा वो दुसरे के पैर छुवेगा ( मतलब यह कि शिष्यत्व स्वीकार करेगा ) 
ज्ञानी गुरु अपने आंसर के प्रति इतना sure थे कि बोले अमुक बुक का फला पेज खोलो .. ( आज भी ऐसे लोग है जो पेज सहित जबाब रट जाते है )
किताब का वो पेज खोला गया वहां जबाब न था पर उसके अगले पन्ने पर जो जबाब था उसके अनुसार ज्ञानी गुरु ने चितंक जी को परास्त कर दिया था ..
शर्त के मुताबिक चिंतक जी ने ज्ञानी गुरु के पैर छुवे यह कहते हुए कि ज्ञानी गुरु उम्र में बड़े है तो उनके पैर छूने में क्या शर्म.... तो इस प्रकार अपने दो शूरवीरो की कहानी पढ़ी .. ( ज्ञानी गुरु बाद में अपने रटने की विशेष क्षमता के चलते आयोग द्वारा  उप समीक्षा अधिकारी पर चुन लिए गये )

चिंतक जी से जुडी पुरानी पोस्ट यहाँ पर पढने के लिए क्लिक करिये .

सोमवार, 15 फ़रवरी 2016

वो गुमनाम लेखिका

अक्सर मै आहा जिन्दगी का जिक्र करता रहता हु पिछले दिनों सैनी अशेष के लेख पढ़े और बहुत प्रभावित हुआ। सोचा इनसे बात करनी ही चाहिए। दिमाग में विचार था कि सम्पादक को फ़ोन कर उनसे नंबर ले लूँगा।  
पता नही क्यू पर मुझसे रहा न गया और मैंने उनको गूगल से खोजना शुरु किया। कुछ ब्लॉग पर उनके कमेंट मिले , फेसबुक पर id भी मिल गयी। id मिलने पर उनकी टाइम लाइन को पढना शुरु किया।  यह एक प्रकार से खोज सी शुरु थी अधिक से अधिक जान लेने का मन था। आखिर उनके लेखो में जो जादू दिखा था वह सच में ही बहुत लाजबाब था।  
टाइम लाइन से ही पता चला कि वो स्नोवा बर्नो के सह - लेखक है। स्नोवा बर्नो -------२००८ के आस पास उनकी कुछ कहानिया हंस में छपी थी। एक - दो मैंने भी पढ़ी थी क्या कमाल की कहानियाँ थी।  बहुत दिनों तक लेखिका के बारे में लोग कयास लगाते रहे कि आखिर एक अंग्रेज इतनी गहरी हिंदी में कहानी कैसे लिख सकती है।  ऐसा माना जाता रहा कि उनका छद्म नाम इस्तमाल कर कोई पुरुष ही यह कहानियाँ लिख रहा है. 

ABOUT CHINTAK JI

     चिन्तक जी के बारे में बहुत से लोगो ने पूछा है पर एक पाठक को वह कहानी इतनी भायी कि मुझे ३ – ४ मेल लिखे . मैंने उन्हें हमेशा जबाब दिया कि समय मिलते है पोस्ट करूगां . पास लिखने के लिए बहुत से विचार होते है पर समय के आभाव में उन्हें लिख नही पाता हूँ . वैसे भी लिखने के लिए फ्री mind होना चाहिए जो आज के दौर में बहुत कम होता है
 .    ABOUT  CHINTK  JI  BY  IAS KI PREPARATION HINDI ME
ज्यादातर लोगो को यह जानने कि उत्सुकता रही है कि चिन्तक जी इन दिनों क्या कर रहे है तो समय आ गया है जब आप को जानकारी दे दू चिन्तक जी ने दिसम्बर १५ में uppcs lower का इंटरव्यू दिया है . पहली बार इंटरव्यू दिया है और उम्मीद की जानी चाहिए उनका सिलेक्शन हो जायेगा .
चितंक जी के तेवर अभी भी वैसे है जैसे पुराने दिनों में हुआ करते थे अब मेरी उनसे बातचीत बहुत कम ही हो पाती है महीने या २ महीने में एक बार पर जब भी बात होती है मुझे ख़ुशी होती है कि अभी भी उनमे बहुत कुछ बाकि है २००६ में पहली बार में आईएएस का pre निकालने के बाद , काफी कोशिस के बाद भी उनका कभी pre नही निकला .

२०१५ में जब ias का पैटर्न फिर से बदला उन्होंने पुरे जोर शोर से , दम लगा कर एग्जाम दिया . एग्जाम के बाद मेरी उनसे फ़ोन पर बात हुई पता चला उनका स्कोर मात्र ८० अंक है यानि इस बार भी उनका होना नही था .. इस बार भी वो ias का मैन्स देने से वंचित रह गये ...अच्छा स्कोर ने कर पाने के कारण भी बताये थे जो मुझे अब याद नही ... वैसे भी आपको पहले की कहानियों से चिन्तक जी के बारे में एक बात बहुत अच्छे से समझ में आ गयी होगी वह बहुत गंभीरता से सोचते और समझते है ..

वो ias के एग्जाम से भले दूर रहे हो पर हमेशा २०१३ में भी मुझसे ias मैन्स के पेपर मागे थे ताकि समझ ले कैसे प्रश्न पूछे जा रहे है इलाहाबाद में उनके परिचितों में दूर दूर तक कोई मैन्स लिखने वाला नही था .. मैंने भी समय निकल कर पेपर्स की कॉपी करवा कर पोस्ट कर दी थी हलाकि यह बहुत झंझट का काम लगा था ..

२०१४ में भी मैन्स के पेपर मागते रहे जब भी बात होती थी वह यह डिमांड करना नही भूलते थे पूरे  साल मै टालता रहा वजह साफ थी मुझे ऐसा लग रहा था कि जब मैन्स लिखना ही नही है तो मैन्स के पेपर के विश्लेष्ण करके  क्या करोगे ... पर उनसे सीधे सीधे कैसे कहूँ कि अब ias  का पैटर्न  बिलकुल बदल गया है .. अब इसमें COMPETITION  भी बहुत बढ़ गया है .

अभी जनवरी में फिर उनसे बात हुई तो बोले होली जब घर आना तो २०१४ और २०१५ के मैन्स के पेपर लाना मत भूलना ... मतलब अभी भी वो ias को छोड़ेगे नही .....मेरे ख्याल से अभी भी उनके २ या ३ चांस बचे है .....देखो क्या होता है ......( अगर कोई पाठक इलाहाबाद से हो और चिन्तक जी ias मैन्स के पेपर उपलब्ध करा सके तो प्लीज संपर्क करे क्यूकि चिंतक जी अभी भी सिंपल फ़ोन रखते है और उनका कोई फेसबुक , जीमेल अकाउंट नही है ..मैंने नेट पर देखने कि सलाह दी थी तो उनका कहना था कि हार्ड कॉपी में देखना ज्यादा अच्छा होता है .....उनके तर्को को मै कभी काट नही पाता हूँ ... उनसे जुडी शेष कहनियाँ फिर कभी ........)

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