shoes लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
shoes लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 15 जून 2026

Without you

 उसके बिना 


    अपने भी जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर , यह जरूर सुना होगा कि किसी के चले जाने का बाद ही उसका महत्व पता चलता है। मैंने भी बड़ी शिद्द्त से यह महसूस किया है, उन दिनों जब वो साथ था तब उसका जिंदगी में  होना सामान्य सी बात थी, अब जब वो हमेशा के लिए खो गया है , मैंने उसे हर रोज याद किया है।  

    जब यमुना एक्सप्रेस पर आगरा से दिल्ली की तरफ आते है तो कुछ टोल के पास एक बड़ा सुन्दर मंदिर का बोर्ड दिखाई पड़ता है। मुझे लगभग 7 साल हो गए, इस रास्ते आते जाते और लगभग हर बार ही इसको देखा। मैं प्रेममंदिर वृंदावन के बोर्ड की बात कर रहा हूँ जो टोल के पास लगे है। तमाम लोगों से इसकी भव्यता , विशालता के  बारे में सुना भी था।  

    कहते है किसी जगह या मंदिर में तब तक  जाना होता नहीं जब आपको वो बुलाये न।  पिछले तमाम सालों से मथुरा , वृन्दावन के पास से गुजरना हुआ पर कभी उधर जाना न हुआ।  पिछले साल , सावन के महीने में कुछ संपर्कों के चलते वृन्दावन जाने का अवसर मिला। होस्ट बड़े सज्जन थे। सैकड़ो मंदिर में कुछ सबसे महत्वपूर्ण की लिस्ट बना दी और उनका क्रम बता दिया। सब जगह बड़ी सुविधा से दर्शन हो गए। बांके बिहारी जी मंदिर में स्थानीय पुलिस  के सहयोग से  काफी सुविधा से दर्शन हो गए। 

    मेरी लिस्ट में सबसे अंत में प्रेम मंदिर था। शाम हो गयी थी. धीरे धीरे बारिश भी  हो रही थी।  मंदिर काफी बड़ा और सुन्दर  बना है। जूते जमा करने की व्यस्था थी और तमाम लोगों ने ऐसे खुले में भी जूते डाल दिए थे। लाइन जरा लम्बी थी। इससे पहले भी मैंने अपने जूते तमाम मंदिर के बाहर ऐसे ही डाल दिए थे। यहाँ पर भी एक कोने में रखकर मंदिर दर्शन के लिए चला गया। करीब 30 मिनट के बाद जब लौटा और अपने जूतों के पास गया तो वो वहाँ न थे। एक पल को यकीन न हुआ कि जूते चोरी भी सकते हैं पर वो हो चुके थे।  ठीक उस क्षण तक वो मेरे तमाम जूतों में महज एक जोड़ी जूते थे  पर खोने के बाद , दिल बैठ सा गया। 

    पिछले साल रनिंग का जोश सा आया था , उससे जुडी तमाम चीजों,  तमाम अलग अलग कम्पनी के जूते , अलग अलग जगह से खरीदे थे। सकनी , होका , ब्रुक्स , नाइके , एसिक्स , प्यूमा  आदि। इनमें से कुछ बहुत मुश्किल से मिले थे। 

    मेरा जो जूता प्रेम मंदिर खोया था , वो HOKA का नीले कलर के जूते थे। ठीक से से याद नहीं कि दिल्ली से लिए थे या गुरुग्राम से। एमआरपी 14000 के आस पास था , मुझे ९००० के मिले थे। शुरू में उन्हें ज्यादा पहनता न था , एक रेस में आजमाया तो बड़ा अच्छा लगा। उनका वजन काफी कम था और बाउंस अच्छा था , शायद कॉर्बन प्लेट वाले थे। उसके बाद तो वो मेरे रेगलर जूतों की तरह हो गए।  उनकी एक और खास बात थी कि लसेस खोले बगैर भी पहना और उतारा जा सकता था।  

    तमाम बार उनके लिए अलग अलग तारीफ सुनी थी। एक शिमला की रेस थी , किसी ने कहा ये कहाँ से लिए , इम्पोर्टेड है क्या ? बड़े अच्छे लग रहे हैं.... धीरे धीरे वो मुझे काफी प्रिय हो गए। इसलिए जब वृन्दावन गया  तो कोई रेस न थी , बस वो कम्फ़र्टेबल थे इसलिए साथ थे। 

    जैसा मैंने शुरू में लिखा , जबतक  चीजे हमारे साथ होती है , उनकी हमें कदर न होती है। उनके खोने के बाद  वो बड़ा याद आये। विशेषकर जब उन्हें स्टोर में पता किया  तो पता चला अब वो नही आ रहे। एक दो बार संयोग बना। एक सज्जन मुझसे मिलने ऑफिस  आते थे। तमाम बार बोलते थे कि सर कोई हेल्प चाहिए तो बताइये , मेरा अमुक काम है , अमुक शहर में होटल है आदि आदि।  मै बाहर आता जाता रहता हूँ आदि।  एक पल को मन में ख्याल आया बोलूं मेरे लिए बाहर से होका के जूते ला सकते हो क्या ? पर ख्याल मन में रह गया कि कौन अहसान ले और फिटिंग का इशू अलग। 

    यूँ तो कुछ और जूते कलेक्शन में जुड़ गए है, पिछले दो सालों में लगभग 2500 km के आस पास रनिंग हो गयी , तमाम शूज फटने को आये। उन सबके बीच मुझे होका का नीला वाला शूज बहुत याद आता है। जैसे कि कोई मोहब्बत की दास्ताँ जो ठीक से शुरू भी हुयी , उसका अंत आ गया।   पिछले दिनों , यमुना एक्सप्रेस से आना जाना हुआ और टोल के पास प्रेममंदिर के होर्डिंग को देख , होका की बड़ी याद आयी।  

( प्रसंगवश , इन दिनों फिल नाईट ( funder नाइके ) की बुक शू डॉग पढ़ी जा रही है ).

- आशीष कुमार , उन्नाव।  

15 मई , 2026 . 




 

Featured Post

SUCCESS TIPS BY NISHANT JAIN IAS 2015 ( RANK 13 )

मुझे किसी भी  सफल व्यक्ति की सबसे महतवपूर्ण बात उसके STRUGGLE  में दिखती है . इस साल के हिंदी माध्यम के टॉपर निशांत जैन की कहानी बहुत प्रेर...