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शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

Kutch's Mango

कच्छ के आम 

    आपका भी ज्यादातर अनुभव यही होगा कि लोग काम के वक़्त ही याद करते हैं। वैसे आजकल लोग खुद में इतने बिजी हैं कि वो आपको याद ही नहीं करते  हैं। ऐसे में सौभाग्यवश मेरे मित्रता सूची में तमाम लोग ऐसे भी हैं  जो खुद से  याद करते है वो भी हमारे लिए, हमारे भले के लिए। यह उनका प्रेम है , आज उनमें से एक की कहानी।  

    अहमदाबाद की एक लाइब्रेरी में उससे संपर्क हुआ था। बेहद स्मार्ट , खूबसूरत , उजला रंग , मीठी बोली। कभी ktm बाइक से , कभी सफेद नई  फॉर्च्यूनर से। ये उन दिनों की बात है जब अपने पास 100 CC  की बजाज डिस्कवर हुआ करती थी। सोचो उन दिनों , कितने प्रभावित करते  रहे होंगे ऐसे लोग। एक और साथी इनोवा से आता था। बाद में दोनों ही अपने मित्र बन गए। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह सफलता मिलने से पहले वाले साथी थे।  

    आज पहले साथी की बात। उसने बस तैयारी शुरू ही की थी। मैं  लंबे समय से तैयारी करके काफी पक चूका था। PRE और मेंस पास होना मेरे लिए कोई बड़ी और नई बात न थी। उसके लिए यह काफी मायने रखता था। एक दो बार उसी ने मेरा PRE  रिजल्ट देखा था। खैर उसी शुभ लाइब्रेरी से मेरा upsc में अंतिम  चयन हुआ। लाइब्रेरी के केयरटेकर ने अगले दिन पेपर  में प्रकाशित मेरे से जुडी कटिंग को नोटिसबोर्ड में चिपका दिया।  

    अब मुझे ठीक से याद नहीं कि वो दिल्ली किस साल आया , पर वो भी आ गया। राजेंद्रनगर में , एक दो बार उसके रूम जाना हुआ। उसका भी एक दो बार ऑफिस आना हुआ , एक दो बार घर भी। वो कच्छ , गुजरात एरिया से था। अब कच्छ का जिक्र हुआ है तो बताऊँ , मेरी अब तक घूमी गई जगहों में सबसे बेहतरीन जगह है। उस यात्रा से पहली बार फेसबुक में पोस्ट लिखनी शुरू हुयी थी। 



    तो जब से हर्ष भाई दिल्ली आए , वो लगातार अपने कच्छ की विशेष मिठाई और आम भिजवाते रहे। पूरे साल शायद ही बात हो , मुलाकात हो, पर आम और मिठाई जरूर आती रही। आम और मिठाई , दोनों ही मुझे विशेष रूप से पसंद है। कच्छ वाले आम , अपने मलिहाबाद वाली दसहरी के ठीक पहले आते हैं। स्वाद में बढ़िया , रसीले , गूदेदार , पतले छिलके वाले। अब तो ऐसा हो गया है कि फोन उसका आने पर , मेरा पहला शब्द यही होता ' आम भिजवाने हैं , या मिठाई।  इस साल हर्ष भाई की शादी हो गयी और वो अब फिर से अहमदाबाद रहने लगे पर इसबार भी पिछले दिनों , ट्रैन , अपने दिल्ली वाले मित्र के जरिये दो पेटी आम भिजवा ही दिए।    


©आशीष कुमार, उन्नाव। 

३ जुलाई , २०२६ 





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