बुधवार, 16 सितंबर 2026

समुद्र की बेटी से एक यादगार भेंट


सुबह का समय था , स्टाफ ने बोला सर कोई मिलना चाहता है। एयरफोर्स से कोई ऑफिसर हैं। मैंने कहा भेज दीजिए  

 मेरे सामने  भारतीय वायुसेना की अधिकारी श्रद्धा पी. राजू थी। मैंने कहा कि आपका नाम सुना सुना लग  रहा है।  वो मुस्करायी। फिर बातचीत में पता चला कि वो उस काम से जुडी है , जिस पर upsc सामान्य अध्ययन का प्र्श्न बनाया था।   

श्रद्धा पी. राजू उस ऐतिहासिक महिला त्रि-सेवा समुद्री अभियान की उपनेता रही हैं, जिसमें भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों ने त्रिवेणी नौका से विश्व की समुद्री परिक्रमा की। हजारों समुद्री मील की यात्रा, अनिश्चित मौसम, विकराल लहरें, सीमित साधन और अपने सामने फैला अनंत जल यह यात्रा केवल भौगोलिक दूरी तय करने का नाम नहीं थी। यह मनुष्य की सहनशक्ति, धैर्य और आत्मविश्वास की परीक्षा भी थी।

मैं उनसे समुद्र के बारे में पूछता गया और वे अपने अनुभव सुनाती गईं। कभी तेज हवाएँ, कभी ऊँची लहरें, कभी विश्राम का अभाव, कभी नौका में उत्पन्न तकनीकी कठिनाइयाँ। समुद्र में कोई ऐसी सुविधा नहीं कि आवश्यकता पड़ते ही किसी को बुला लिया जाए। वहाँ साथ चल रहे लोग ही एक-दूसरे का सहारा होते हैं। जो समस्या सामने है, उसका समाधान भी वहीं खोजना होता है।


उनकी बातें सुनते हुए मेरे मन में समुद्र की वह छवि बदल रही थी, जिसे हम प्रायः चित्रों में देखते हैं। दूर तक फैला नीला जल, स्वच्छ आकाश और क्षितिज पर डूबता सूर्य निस्संदेह सुंदर है; पर समुद्र का एक दूसरा रूप भी है कठोर, अनिश्चित और मनुष्य के अहंकार को बहुत शीघ्र छोटा कर देने वाला। शायद समुद्र यह सिखाता है कि प्रकृति से बड़ा कोई नहीं। और शायद वही समुद्र यह भी सिखाता है कि मनुष्य स्वयं को जितना कमजोर समझता है, वास्तव में वह उससे कहीं अधिक सक्षम है।

बातचीत स्वाभाविक रूप से शारीरिक क्षमता और सहनशक्ति की ओर भी गई। मैं काफी टाइम से फिटनेस के लिए कुछ न कुछ करता रहता हूँ , किसी उल्लेखनीय स्तर तो न कुछ किया पर अब जीवन शैली में फिजिकल एक्टिविटी के अटूट हिस्सा बना गया है।  लंबी दूरी की दौड़ में मेरी अपनी रुचि होने के कारण यह विषय मुझे और भी प्रिय लगा। मैंने अनुभव किया है कि लंबी दौड़ केवल पैरों से नहीं दौड़ी जाती। एक निश्चित दूरी के बाद शरीर पीछे हटने लगता है और मन को आगे आकर नेतृत्व करना पड़ता है। 

श्रद्धा जी से बातचीत के बाद अपनी रोजमर्रा की कठिनाइयाँ भी कुछ छोटी लगने लगीं। हम कभी नींद कम होने पर परेशान हो जाते हैं, कभी मौसम को दोष देते हैं, कभी थकान को और कभी परिस्थितियों को। पर महीनों तक खुले समुद्र में रहना शायद मनुष्य को यह सिखा देता है कि असुविधा और कठिनाई में बहुत अंतर होता है।

ऐसी यात्राएँ केवल शरीर को नहीं तपातीं, मन को भी नया आकार देती हैं। घर, परिवार, सामान्य भोजन, मीठा जल, शांत नींद जिन चीजों को हम सहज उपलब्ध मानते हैं, उनका महत्व शायद तब सबसे अधिक समझ में आता है जब वे सहज उपलब्ध न हों। इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद भी श्रद्धा पी. राजू की सहजता और सरलता ने मुझे विशेष रूप से प्रभावित किया। मुझे लगा कि वास्तविक उपलब्धियाँ मनुष्य को ऊँचा अवश्य उठाती हैं, किंतु यदि व्यक्तित्व सचमुच बड़ा हो तो उसके पैर जमीन पर ही रहते हैं।

मैंने कहा आप ने वास्कोडिगामा , कोलम्बस वाला काम कर दिखाया है। वो मुस्कुरायी। आज की यह भेंट मेरे लिए केवल एक अधिकारी से मुलाक़ात नहीं थी। यह साहस, अनुशासन, सहनशक्ति और नारी सामर्थ्य से एक छोटा-सा साक्षात्कार था। चलते वक़्त मैंने उन्हें कुछ सलाह दी जैसे कि अपनी इस यात्रा को शब्दबध्द करिये , किसी पुस्तक के रूप में इस साहसिक यात्रा को पढ़ना , तमाम लोगो को लिए प्रेरणा बनेगा। दूसरा किसी पॉडकॉस्ट में भी इसे बतलाइये। 

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© आशीष कुमार, उन्नाव

गुरुवार, 10 सितंबर 2026

How I cracked Ias exam

 मैंने आईएएस की परीक्षा कैसे पास की


    काफी समय से अपने ब्लॉग पर लिखता आ रहा हूँ। वर्षों में इतनी सामग्री जमा हो गई है कि उससे शायद 10 किताबें तक तैयार हो सकती हैं। लिखना तो लगातार होता रहा, लेकिन उन्हें पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने के लिए समय और मन दोनों एक साथ नहीं मिल पाए।

    अब कुछ समय मिला है, तो पुराने लेखों को फिर से पढ़ने, सँवारने, विषयवार जोड़ने और किताब का रूप देने में मन लग रहा है।सच कहूँ तो अपनी वर्षों पुरानी रचनाओं को एक-एक करके पुस्तक बनते देखना अपने आप में एक अलग ही सुख है।

    शायद लेखन की भी अपनी यात्रा होती है पहले विचार आते हैं, फिर शब्द बनते हैं, वर्षों तक कहीं सुरक्षित पड़े रहते हैं और एक दिन वही शब्द पुस्तक बनकर नई यात्रा शुरू करते हैं।अभी शुरुआत है… बहुत-सी पुरानी रचनाएँ और कई पुस्तकें अपनी बारी का इंतज़ार कर रही हैं।धीरे-धीरे उन्हें भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास रहेगा।







मैंने आईएएस की परीक्षा कैसे पास की’ केवल सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी संबंधी पुस्तक नहीं, बल्कि लंबे संघर्ष, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की एक यात्रा है। लेखक आशीष कुमार ने सामान्य ग्रामीण पृष्ठभूमि, सीमित संसाधनों और सरकारी नौकरी के साथ तैयारी करते हुए लगभग नौ वर्षों तक संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा का सामना किया और अपने अंतिम प्रयास में सफलता प्राप्त की। पुस्तक इसी वास्तविक अनुभव से निकले व्यावहारिक सूत्रों को सरल हिंदी में प्रस्तुत करती है।

पुस्तक के 40 अध्याय लक्ष्य निर्धारण, समय-प्रबंधन, पढ़ने की सही पद्धति, पुनरावृत्ति, उत्तर-लेखन, मुख्य परीक्षा की रणनीति, समाचारपत्रों के उपयोग, एकाग्रता, अध्ययन-कक्ष, समय-सारिणी, व्यक्तित्व विकास और आत्मअनुशासन जैसे विषयों पर केंद्रित हैं। लेखक बार-बार यह स्पष्ट करते हैं कि सफलता किसी एक कोचिंग, पुस्तक, रणनीति या असाधारण प्रतिभा पर निर्भर नहीं होती; अपनी परिस्थितियों को समझकर लगातार प्रयास करना अधिक महत्वपूर्ण है।

इस पुस्तक की विशेषता इसका अनुभवजन्य और आत्मीय स्वर है। असफलताओं, सीमाओं और कठिनाइयों को छिपाने के बजाय लेखक उन्हें सीख में बदलते हैं। इसलिए यह पुस्तक केवल यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए नहीं, बल्कि हर उस विद्यार्थी और युवा के लिए उपयोगी है जो बड़े लक्ष्य के लिए धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहता है।

आशीष कुमार, उन्नाव .


गुरुवार, 3 सितंबर 2026

कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मेरा पहला Kindle eBook प्रकाशित


प्रिय मित्रों , आप सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं। 

    आज मेरे लिए अत्यंत हर्ष और भावनाओं से भरा दिन है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमीके पावन अवसर पर मेरा पहला उपन्यास Kindle eBook के रूप में प्रकाशित हुआ है।

    लेखन मेरे लिए केवल शब्दों को पन्नों पर उतारने का माध्यम नहीं है, बल्कि जीवन के अनुभवों, भावनाओं, स्मृतियों और मन में उठते प्रश्नों को पाठकों तक पहुँचाने की एक यात्रा है। लंबे समय से हिंदी साहित्य, विशेषकर उपन्यासों, के प्रति मेरा गहरा लगाव रहा है। आज उसी लगाव ने मुझे लेखक के रूप में अपना पहला कदम रखने का अवसर दिया है।

    यह पुस्तक मेरे लिए केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि अनेक विचारों, कल्पनाओं और संवेदनाओं का संकलन है। आशा है कि इसके पात्र, घटनाएँ और भावनाएँ पाठकों के मन को छुएँगी तथा उन्हें सोचने के लिए कुछ नए प्रश्न देंगी।

    श्रीकृष्ण का जीवन हमें कर्म, प्रेम, साहस और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसी शुभ दिन पर अपनी पहली ई-पुस्तक का प्रकाशन मेरे लिए ईश्वर का आशीर्वाद और एक नई साहित्यिक यात्रा की शुरुआत है।







    मैं अपने परिवार, मित्रों, शुभचिंतकों और सभी पाठकों का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे निरंतर प्रोत्साहित किया। आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि मेरी Kindle eBook पढ़ें और अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया अवश्य साझा करें।आपका स्नेह और सुझाव मेरी आगामी रचनाओं के लिए प्रेरणा बनेंगे।

पुस्तक का नाम: Hari Cigarette

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लेखक: आशीष कुमार
Kindle पर उपलब्ध

संपर्क: ashunao@gmail.com
ब्लॉग: https://asheeshunnao.blogspot.com/


     पुस्तक कैसे खरीदें और पढ़ें?

पाठक Amazon पर पुस्तक का नाम “Hari Cigarette” खोजकर इसे खरीद सकते हैं। खरीदने के बाद Kindle
eBook उसी Amazon खाते की Kindle Library में उपलब्ध हो जाएगी।

इसे पढ़ने के लिए अलग Kindle मशीन लेना आवश्यक नहीं है। पाठक अपने मोबाइल या टैबलेट में मुफ्त Amazon Kindle App डाउनलोड करके, उसी Amazon खाते से Sign In कर, पुस्तक पढ़ सकते हैं। इसे Kindle e-Reader या कम्प्यूटर के ब्राउज़र पर Kindle Cloud Reader के माध्यम से भी पढ़ा जा सकता है।

पाठकों से विनम्र अनुरोध

पुस्तक पढ़ने के बाद कृपया Amazon पर अपनी ईमानदार समीक्षा (Review) और रेटिंग अवश्य दें। आपकी प्रतिक्रिया नए पाठकों तक पुस्तक पहुँचाने में सहायता करेगी और मेरे आगामी लेखन के लिए प्रेरणा बनेगी।

आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए हृदय से धन्यवाद।

— आशीष कुमार, उन्नाव





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