प्रिय मित्रों , आप सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
आज मेरे लिए अत्यंत हर्ष और भावनाओं से भरा दिन है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमीके पावन अवसर पर मेरा पहला उपन्यास Kindle eBook के रूप में प्रकाशित हुआ है।
लेखन मेरे लिए केवल शब्दों को पन्नों पर उतारने का माध्यम नहीं है, बल्कि जीवन के अनुभवों, भावनाओं, स्मृतियों और मन में उठते प्रश्नों को पाठकों तक पहुँचाने की एक यात्रा है। लंबे समय से हिंदी साहित्य, विशेषकर उपन्यासों, के प्रति मेरा गहरा लगाव रहा है। आज उसी लगाव ने मुझे लेखक के रूप में अपना पहला कदम रखने का अवसर दिया है।
यह पुस्तक मेरे लिए केवल एक उपन्यास नहीं, बल्कि अनेक विचारों, कल्पनाओं और संवेदनाओं का संकलन है। आशा है कि इसके पात्र, घटनाएँ और भावनाएँ पाठकों के मन को छुएँगी तथा उन्हें सोचने के लिए कुछ नए प्रश्न देंगी।
श्रीकृष्ण का जीवन हमें कर्म, प्रेम, साहस और सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। इसी शुभ दिन पर अपनी पहली ई-पुस्तक का प्रकाशन मेरे लिए ईश्वर का आशीर्वाद और एक नई साहित्यिक यात्रा की शुरुआत है।
मैं अपने परिवार, मित्रों, शुभचिंतकों और सभी पाठकों का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे निरंतर प्रोत्साहित किया। आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि मेरी Kindle eBook पढ़ें और अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया अवश्य साझा करें।
आपका स्नेह और सुझाव मेरी आगामी रचनाओं के लिए प्रेरणा बनेंगे।
पुस्तक का नाम: Hari Cigarette
लेखक: आशीष कुमार
Kindle पर उपलब्ध
संपर्क: ashunao@gmail.com
ब्लॉग: https://asheeshunnao.blogspot.com/
पुस्तक कैसे खरीदें और पढ़ें?
पाठक Amazon पर पुस्तक का नाम “Hari Cigarette” खोजकर इसे खरीद सकते हैं। खरीदने के बाद Kindle
eBook उसी Amazon खाते की Kindle Library में उपलब्ध हो जाएगी।इसे पढ़ने के लिए अलग Kindle मशीन लेना आवश्यक नहीं है। पाठक अपने मोबाइल या टैबलेट में मुफ्त Amazon Kindle App डाउनलोड करके, उसी Amazon खाते से Sign In कर, पुस्तक पढ़ सकते हैं। इसे Kindle e-Reader या कम्प्यूटर के ब्राउज़र पर Kindle Cloud Reader के माध्यम से भी पढ़ा जा सकता है।
पाठकों से विनम्र अनुरोध
पुस्तक पढ़ने के बाद कृपया Amazon पर अपनी ईमानदार समीक्षा (Review) और रेटिंग अवश्य दें। आपकी प्रतिक्रिया नए पाठकों तक पुस्तक पहुँचाने में सहायता करेगी और मेरे आगामी लेखन के लिए प्रेरणा बनेगी।
आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए हृदय से धन्यवाद।
— आशीष कुमार, उन्नाव
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें