लघुकविता : बेबसी
प्रिय तुम जानती भी हो,या नहीं,
कि मैं बेबस सा हूँ,दिल से मजबूर हूँ
तुम्हारे लिए ,तुम्हारे एकनिष्ठ प्रेम में।
चाहता हूँ कि, तुम भी चाहो मुझे
उसी शिद्दत व बेकरारी से
देखो उन्हीं तीखी, गहरी नजरों से
जिनसे मैं तुम्हे देखा करता हूँ
अक्सर अपनी मुलाक़ातों में ।
© आशीष कुमार, उन्नाव ।
5 फरवरी, 2020, हैडो, पोर्ट ब्लेयर।
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